ख़ुद को आवाज़ लगाकर देखें

ख़ुद को आवाज़ लगाकर देखें

ख़ुद को , आवाज़, लगाकर देखें ।
फिर से , ख़ुद को पाकर देखें ।
खोई हैं , जितनी मुस्कानें ।
जीवन में ,फिर लाकर देखें ।
गीत अधर से , छूट‌ गए जो ।
उनको , गुनगुना कर देखें ।
अंतस में ,छाया जो अंधेरा ।
आओ उसे, मिटाकर देखें ।
टूटी हैं ,जितनी उम्मीदें ।
सब में ,जोड़ लगाकर देखें ।
बदकिस्मती ,भूलकर सारी ।
किस्मत को ,चमकाकर देखें ।
छोड़कर सारी , चिंताओं को ।
जीवन सुखी बिताकर देखें ।
वो जो ,हमको भूल चुके हैं ।
हम भी ,उन्हें भुलाकर देखें ।
खुद को , आवाज़ लगाकर देखें ।

Pragati Dutt

श्रीमती प्रगति दत्त
अलीगढ़ उत्तर प्रदेश

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • |

    Hindi Kavita By Binod Begana -कैसे-कैसे लोग

    कैसे-कैसे लोग ( Kaise-Kaise Log )     अक्ल के कितने अंधे लोग। करते क्या-क्या धंधे लोग।   मासूमों के खून से खेले, काम भी करते गंदे लोग।   रौब जमा के अबलाओं पर, बनते हैं मुस्तंडे लोग।   तन सुंदर कपड़ों से ढकते, मन से लेकिन नंगे लोग।   अपनाते दौलत की खातिर, बुरे-बुरे …

  • महफिल | Mehfil

    महफिल ( Mehfil )   महफिले आम न कर चाहत मे अपनी लुटेरों की बस्ती मे न बसा घर अपना बच के रह जरा ,बेरुखी जहां की नजर से इस महफिल का उजाला भी शराबी है घरौंदे से महल के ख्वाब ,ठीक नही होते दीए का उजाला भी ,भोर से कम नहीं होता ये महफिल…

  • अब कलम लिखे किसकी जयगान

    अब कलम लिखे किसकी जयगान जब हुआ सबेरा खून खराबा इसी में रहता है जग सारा, वेद मंत्र सब धरे धरा पर नहीं करे कोई गुणगान | अब कलम लिखे ———–! रक्षक, भक्षक बनकर जीता अरमानों के अश्क़ को पीता, माली रौंदे अपनी बगिया गा गाकर पूरबी तान | अब कलम लिखे———! एक चमन है…

  • Hindi Poem Makarsankranti – मकर संक्रांति

    मकर संक्रांति ( 2 ) सूर्य देव ने मकर राशि में प्रवेश कर मकर संक्रांति के आने के दी है खबर सोंधी सोंधी गुड़ की वो महक कूटे जाते हुए तिल का वो संगीत मौज-मस्ती बेसुरे कंठो का गीत गंगा स्नान खिचड़ी का वो स्वाद आज होगी आकाश में पतंगबाजी रंग बिरंगी पतंग से भरा…

  • पुड़िया का नशा | Kavita pudiya ka nasha

    पुड़िया का नशा ( Pudiya ka nasha )   पुड़िया खा मुंह भरे गुटखा का रसपान सड़क दीवारें हो गई अब तो पिक दान   दंत सारे सड़ने लगे उपजे कई विकार दिनभर खर्चा ये करे रसिक पुड़ियादार   मुंह तो खुलता नहीं आदत पड़ी बेकार समझाए समझे नहीं छोड़ो नशा अब यार   फैशन…

  • लवली-अक्षय

    लवली-अक्षय   –>अक्षय अक्षय नहीं, ब्रांड है ब्रांड”बिग ब्रांड”|| 1.प्यारा है दिल वाला है, हर आँख बसा वो तारा है | काम से अपने काम रखे, हर काम करे वो न्यारा है | देश का कोई भी कोना हो, या सारे देश कोरोना हो | हर बार मदद वो करता है, अक्षय सच मे तुम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *