Kisi ke Liye

किसी के लिए | Kisi ke Liye

किसी के लिए

( Kisi ke Liye )

कौन मरता जहाँ में किसी के लिए
मर मिटे हम मगर दोस्ती के लिए

तुग़लक़ी देते फ़रमान वो हैं सदा
मारे निर्दोष भी बंदगी के लिए

ग़ैर की बाँह में प्यार को देखकर
चाँद रोता रहा चाँदनी के लिए

आज छाई उदासी चमन में बहुत
कोई भँवरा मरा है कली के लिए

जान के मौत नज़दीक उसकी खड़ी
ज़िंदगी रो रही ज़िंदगी के लिए

दम घुटा जा रहा तीरगी से मेरा
इक दिया तो जला रोशनी के लिए

बज़्म में आज मीना बहुत शोर है
क़त्ल होते कई शायरी के लिए

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • साये चले | Ghazal Saaye Chale

    साये चले ( Saaye Chale ) ऐसे ऐसे अंधेरे कि साये चले पाँव डर डर के हम भी बढ़ाये चले जश्न तेरी ख़ुशी का मनाये चले अश्क पलकों में अपनी छुपाये चले अपनी हर इक ख़ुशी का गला घोंटा कर तेरी महफ़िल को रंगीं बनाये चले रात चमकी थी कुछ देर नन्ही किरण हम उसी…

  • फूल तितली सनम हुए बे-रंग

    फूल तितली सनम हुए बे-रंग क़ाफ़िया – ए स्वर की ‌बंदिश रदीफ़ – बे-रंग वज़्न – 2122 1212 22 फूल तितली सनम हुए बे-रंग इंद्रधनुषी छटा दिखे बे-रंग तेरी खुशबू जो ज़िंदगी से गई रात-दिन मेरे हो गए बे-रंग ये मुहब्बत सज़ा बनी है आज दौर-ए-हिज़्राँ लगे मुझे बे-रंग याद जब तेरी आती है मुझको…

  • राधा कान्हा के द्वार | Radha Kanha ke Dwaar

    राधा कान्हा के द्वार ( Radha kanha ke dwaar )    फिर से  खड़ी  हुई  है  राधा  आ कान्हा के द्वार । माँग  रही है  उससे  अपने , सारे  ही  अधिकार ।। वापस करे कन्हैय्या गोकुल से चोरी की खुशियाँ और चुकाए  वृन्दावन का, पिछला  सभी उधार ।। महका रचा बसा खुशबू सा फिर भी…

  • आपकी आश्की | Aapki Aashiqui

    आपकी आश्की ( Aapki Aashiqui ) खुशबुओं से भरी आपकी आश्कीताजगी भर गई आपकी आश्की बात ही बात में बात बनने लगीप्यार से भर गई आपकी आश्की खूब हँसते रहे और हँसाते रहेगीत में ढल गई आपकी आश्की । हर जगह तुम दिखे नूर अपना लिएसूफियाना हुई आपकी आश्की ।। राह तकते रहे उम्र भर…

  • अपनी कहानी लिखना | Apni Kahani Likhna

    अपनी कहानी लिखना दिल के औराक़ पे जब अपनी कहानी लिखनादूध को दूध मगर पानी को पानी लिखना पढ़ तो लेता हूँ मैं तहरीर तेरे चेहरे कीदास्ताँ फिर भी कभी दिल की ज़ुबानी लिखना तेरे हाथों में है अब मेरे मुक़द्दर का वरक़मेरी रातों में उजालों की रवानी लिखना कैसे जलते हैं मेरे होंठ तेरी…

  • हमें होश ऐसे भुलाए गए हैं

    हमें होश ऐसे भुलाए गए हैं हमें होश ऐसे भुलाए गए हैं।निगाहों से साग़र पिलाए गए हैं। सितम हम पे ऐसे भी ढाए गए हैं।हंसा कर भी अक्सर रुलाए गए हैं। जिन्हें देखकर ताब खो दे ज़माना।वो जलवे भी हम को दिखाए गए हैं। जो चाहो करो हम से बरताव यारो।हम आए नहीं हैं बुलाए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *