किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है

किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है

       दुल्हेराजा घोड़ी पर सवार थे.. बाराती नाच रहे थे.. डीजे का शोर सुस्त कदमो को भी थिरकने के लिए मजबूर कर रहा था.. महिलाएं पुरुष पसीने से लथपथ हो रहे थे.. धीरे धीरे बारात आगे बढ रही थी तभी किसी ने मेरा हाथ पकड़ा ओर बारातीयो की भीड़ से मुझे बाहर खींच लिया.. मैं चौका.. मुझे खिंचने वाली नीलिमा थी.. वह जोर से बोली तू बारात में क्या कर रहा है..? ओर फिर वह मुझे डीजे के शोर से काफी दूर ले आयी.. मैं उसे एकटक देखने लगा.. वह हँसते हुए बोली देखता क्या रे पागल मुझे.. पहली बार तो नही देखा न..!

नीलिमा को देख मैं भी चौक गया.. बीस साल बाद भी नीलिमा वैसी ही थी जैसी की तब हम साथ मे पढ़ते थे.. खनकती हुई उसकी आवाज.. आंखों में अनोखी मस्ती.. एक दम चपल.. कुछ भी नही बदली थी वो.. चेहरा थोड़ा परिपक्व हो गया था.. मैं बोला तुम बारात में कैसे आयी हो..? कोई रिश्तेदारी है..? वह हंसते हुए बोली अरे पगले अभी तक तू सुधरा नही.. मुझे तुम कह कर बात कर रहा है.. चल उधर होटल में बैठते है.. वही बात करेंगे.. यहां सड़क पर कब तक खड़े रहेंगे.. ओर फिर मेरा हाथ पकड़ एक होटल की ओर बढ़ गयीं.

   वेटर आया तो वह बोली बोल क्या खायेगा..? मैने इंकार में सिर हिलाया तो वह हँसते हुए बोली अरे पागल बिल मैं दूंगी.. तू तो सिर्फ ऑर्डर कर.. ओर फिर उस ने दो कोल्डड्रिंक मंगा लिए.

   नीलिमा ओर मै साथ मे ही पढ़ते थे.. वह बड़े घर की इकलौती बेटी थी और मैं एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार का बेटा.. वह पढ़ने लिखने में भी बहुत अव्वल थी और मैं औसत.. मैं यादों के बवंडर में उतरने जा ही रहा था कि वह बोली ओर सुना गुड्डू.. क्या हालचाल है तेरे.. आजकल क्या कर रहा है..?

मैं बोला कुछ नही, बस यूँही जिंदगी काट रहा हु.. ओर तुम बताओ.. कैसी हो तुम..? वह बोली बहुत बढ़िया हु.. बढ़िया खाती पीती हु.. जहा जी करे घूमती हु.. मेरे तो मज्जे ही मज्जे है और फिर वह खिलखिला कर हँस पड़ी.. फिर वह हँसते हुए बोली गुड्डू तूने अगर फिर मुझे तुम तुम कहा न तो मैं तेरा नाक तोड़ दूंगी.. मैं कुछ नही बोला.. चुपचाप उसे देखता रहा.. मुझे चुप देख वह बोली शादी हो गयी तेरी..?

मैने हा कहा तो खुश होते हुए बोली अरे वाह रे मेरे मिट्ठू.. शादी की ओर मुझे बुलाया भी नही.. बड़ा कमीना है रे तू.. उसकी बात सुन मैं हँस पड़ा.. मुझे हँसते देख वह बोली गुड्डू तू हँसता  है न तब बहुत प्यारा लगता है.. मुझे अपने वे कॉलेज के पुराने दिन याद आ गए है.. कितने अच्छे दिन थे न वे..! बहुत मजा आता था.. ओर तुजे याद है वो राखी..? मैने कहा हाँ याद है.. क्यो.. क्या हुआ..?

  नीलिमा मुस्कराते हुए बोली राखी ने तेरे नाम लव लेटर लिखा था और मुझे दे कर कहा कि तुजे दे दु.. मैने उसकी चुटिया खींच कर बताया कि खबरदार जो कभी गुड्डू को अपने मन मे भी सोचा तो.. गुड्डू से तो मैं प्यार करती हूं ओर बेचारी राखी ने उस के बाद कॉलेज आना ही छोड़ दिया नीलिमा हँसते हँसते बोली.. थोड़ी देर नीलिमा चुप रही और फिर उस ने कहा गुड्डू मुझे नही पता था कि तू इतना डरपोक ओर कायर होंगा.. मैने अपनी तरफ से तेरी तरफ हाथ बढ़ाया मगर तू मेरा हाथ नही थाम सका.. सच बता क्या मैं इतनी बुरी हु..? जवाब में मैने कहा नीलिमा बारात बहुत दूर चली गयी है और हम पीछे रह गए है.. चलो जल्दी.

हा.. नीलिमा बोली.. बहुत पीछे रह गए.. करीब दो दशक से भी ज्यादा.. बहुत पीछे.. इतने की अब हम चाहे कितनी भी दौड़ लगाए तो भी वहां तक नही पहुच सकते.. बहुत पीछे रह गए है.. नीलिमा की आवाज भारी हो गयी थी.. मैं चुप ही रहा.. वह फिर बोली.. गुड्डू सच सच बता क्या तुजे मैं पसंद नही थी..?

नीलिमा की  बातो का जवाब मैं क्या देता..? मैं उठने को उद्दत हुआ तो मेरी बाह पकड़ कर वह जरा गुस्से से बोली बैठ न.. क्यो भाग रहा.. तुजे खा  न थोड़े ही जाऊंगी.. बैठ.. मैं बैठ गया.. फिर वह मुस्कराते हुए बोली अभी तक तुजे वही परफ्यूम पसंद है जो तू उन दिनों पसंद करता था.. खुशबू तो वही आ रही है.. डायर होमें की.. मैने कहा अब मैं परफ्यूम इस्तेमाल नही करता.. आज शादी में आना था सो लगा लिया.. मगर तुम्हे कैसे पता कि यह डायर होमे है..?

वह गहरी सांस लेते हुए बोली गुड्डू, कुछ बातों को याद नही रखना पड़ता.. वे तो बस दिल की अनंत गहराइयों में कही बसी रहती है.. एक हुक सी उठती है और यादे दौड़ पड़ती है.. तू वही एकमात्र इंसान है गुड्डू जो मेरे जीवन की मीठी मधुर याद के रूप में मेरे ह्दय में बसा है.. फिर भला मैं कैसे भूल सकती हूं कोई वह बात जो तुज से जुड़ी हुई हो.. मुझे सब याद है.. सब.. मैने तेरी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया मगर तुने ध्यान नही दिया..

मैने अपने प्यार का इकरार किया मगर तूने स्वीकार नही किया.. तेरे लिए मैं अपने परिवार तक छोड़ने के लिए तैयार थी मगर तूने यहाँ भी इंकार किया.. कुछ नही भूली हु मैं.. सब याद है.. सब.. नीलिमा भावुक हो रही थी.. चलो अब छोड़ो पुरानी बातों को.. मैं बोला.. बहुत देर हो गयी है.. बारात पता नही अब कहा होंगी..!

वह बोली मुझे किसी बारात में नही जाना है.. तुजे जाना है तो जा.. मैं रोकूंगी नही.. ओर फिर वह मेरी तरफ एकटक देखने लगी.. ठीक है मैं भी नही जाता बारात में.. यही बैठता हु तुम्हारे पास.. मैने कहा तो उसके चेहरे पर मुस्कान दौड़ गयी.. फिर अपने पर्स में से सिगरेट निकाल वह बोली गुड्डू सिगरेट पिता है न..!

मैने ना में सर हिलाया तो उसने अपने होठों पर सिगरेट लगा दी.. उसे सिगरेट पिता देख मुझे आश्चर्य हुआ.. पूछा तुम्हारे पति नाराज नही होते.. वह जोर से हँसते हुए बोली पति होंगा तो नाराज होंगा न.. मेरा कोई पति नही है.

तो तुमने शादी नही की..? मैने धीमे स्वर में पूछा तो उसने इंकार में सर हिलाते हुए कहा गुड्डू तेरे सिवाय कोई दूजा कभी भाया ही नही मुझे.. जब तूने ही मना कर दिया तो मैं भला किसी और से शादी कैसे करती..?

यह तुमने ठीक नही किया.. जीवन मे एक हमसफ़र जरूरी है मैने कहा तो वह बोली हमसफ़र जरूरी तो है मगर तू मिला नही न..! फिर हँसते हुए बोली क्यो रे गुड्डू इतनी देर हो गयी मगर तूने बताया नही की मैं तुजे पसंद  क्यो नही आई..?

  किस ने कहा कि तुम मुझे पसंद नही हो..? मैंने कहा..  तुम तो बहुत ही समझदार, शालीन और पारिवारिक लड़की थी.. तुम मुझे हमेशा से ही पसंद थी मगर उस पसंद में जीवन संगनी वाला कोण नही था.. मैं तुम्हे एक मित्र की तरह पसंद करता था.. ओर आज भी मित्र की हैसियत वाला प्यार मेरे मन मे तुम्हारे लिए है.

   उस ने गहरी सांस ली और सिगरेट का धुआं मेरे मुँह की तरफ उड़ाते हुए बोली क्या एक दोस्त जिंदगी भर का हमसफ़र नही बन सकता..? मैं चुप ही रहा.. फिर अचानक वह चहकते हुए बोली पगले तूने सच मे शादी की या मेरी तरह ही अकेला है..?

नीलिमा, मैं बोला.. बताया न कि मेरी शादी हो गयी है और एक बेटा भी है.

तूने शादी कर ली और मुझे बुलाया भी नही शादी में..! वह कृतिम गुस्सा करने लगीं.. कैसे बुलाता.. मैने कहा.. शादी आननफानन में तय हुई.. इतनी जल्दी की मैं शादी की पत्रिका अपने किसी भी मित्र को नही भेज पाया.. बस यूं समझ लो कि घर परिवार के लोगो के अलावा कोई और शामिल नही हुआ मेरी शादी में.

  नीलिमा हँसते हँसते बोली कही तुजे डर तो नही था कि मैं तेरी शादी में रुकावट बनूंगी..! उसकी बात सुन मैं हँस पड़ा.. उस ने मेरे हाथों को अपने हाथों में लिया और बोली तेरी बीबी से मिलवा न.. देखना है कि कौंन है वो जिसने मेरे गुड्डू की मुझ से छीन लिया..! मैने हाथ छुड़ाते हुए कहा क्या करोगी मिलकर..?

करना कुछ नही है, बस मिलना है.. अगर तू नही चाहता तो रहने दे वह धीमे स्वर में बोली.. सच मे मिलना है..? मैने पूछा तो उसने हा में सर हिलाया तो मैने कहा चलो मेरे घर.. मैं खड़ा हो गया ओर बाहर निकला.. एक टैक्सी को आवाज दी.. हम दोनों टैक्सी में बैठ गए.

   घर पहुँचे तो दरवाजा खुला ही था.. मैने नीलिमा को बैठने का इशारा किया और आवाज दी राखी देखो तो तुम से मिलने कौंन आया है..! राखी नाम सुन नीलिमा उछल सी पड़ी.. अस्पष्ट स्वर में बोली गुड्डू तूने राखी से शादी की है..! इतने में राखी आ गयी और नीलिमा को देख वह चौक पड़ी.. वह विस्मय से बोली नीलिमा तुम..? कैसी हो..? बहुत सालो बाद मिली हो.

 मैं तो बढ़िया हु ओर तुम..? नीलिमा ने कहा तो राखी बोली मैं बढ़िया हु.. गुड्डू जी ने कभी मुझे कोई चीज की कमी होने ही नही दी.. मैं बहुत खुश हूं.

   नीलिमा कुछ न बोली.. चुप सी हो गयी.. राखी से मैने कहा राखी नीलिमा जी पहली बार हमारे घर आई है तो बढ़िया सी चाय और नाश्ता ले आओ.

हा हा.. क्यो नही.. नीलिमा हमारी बहुत पुरानी दोस्त है तो मैं तो इन्हें बिना भोजन किये जाने ही नही दूंगी राखी ने कहा तो नीलिमा बोली राखी पेट भरा हुआ है सो भोजन फिर कभी करेंगे, तुम तो चाय ले आओ बढ़िया, आज सालो बाद हम दोस्त एक साथ चाय पियेंगे.. राखी मुस्करा कर रसोई घर में चली गयी.

  गुड्डू आखिर ये क्या माजरा है.. मुझे सब बता नीलिमा के स्वर में आग्रह था.. मैने कहा नीलिमा जी, राखी से मेरा ब्याह संजोग से हुआ है.. पिताजी अचानक हमे छोड़ परलोक सिधार गए.. दोनो बहनों की शादी हो गई और फिर माँ और मैं अकेले रह गए.. माँ ने एक दिन कहा कि अब तू बड़ा हो गया है.. तेरा ब्याह हो जाये तो मेरी एक जिम्मेदारी पूरी हो जाये.. तेरे लिए मैने किसी से बात की है.. लड़की बहुत सुशील ओर संस्कारी है.. तू ब्याह की तैयारी कर।

माँ की बात सुन मैं चौक पड़ा.. मुझे तुम्हारे मन की थाह थी.. जीवनसाथी के रूप में कभी तुम्हे सोचा तो नही था मगर माँ की बातों से तुम्हारी तरफ ध्यान गया और मैने पाया कि तुम मेरे जीवन की हमसफ़र बन सकती हो.. माँ को तुम्हारे बारे में बताया तो माँ ने कहा बेटा वह बहुत बड़े घर की बेटी है।

हमारे साथ वह रचबस नही सकेंगी.. हम मध्यम वर्गीय लोग है और वे बहुत अमीर.. हमारी उनकी तुलना कभी नही हो सकती.. उस लड़की के परिवार वाले भी हमारे यहां राजी नही होंगे.. राजी हो भी गए तो लड़की की ख्वाइशें तू पूरी नही कर पायेगा.. हमे हमारे जैसी लड़की चाहिए.. मैं माँ की बातों को नकार नही सका और माँ से कह दिया कि जहाँ आप कहोंगें वही शादी करूँगा ओर फिर संजोग भी कैसे गजब के हुए की माँ ने जिस लड़की को पसंद किया वह राखी ही थी।

राखी हमारे साथ मे ही पढ़ती थी और उसकी सादगी मुझे हमेशा भाती थी.. मैने राखी को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया और राखी ने पहले दिन ही मुझे वह प्रसंग बता दिया था जो कि तुमने उस के साथ किया था.. वही उसका प्रेमपत्र ओर तुम्हारा गुस्सा होना.. मैने गहरी सांस ली और कुछ  बोलने जा ही रहा था कि राखी चाय ले कर आ गयी।

चाय देख नीलिमा हैरान हुई.. हँसते हुए बोली गुड्डू तुम तो सच मे बहुत ही गरीब हो.. तुम्हारे यहां दूध नही है जो कि काली चाय पीते हो.. जवाब राखी ने दिया.. वह बोली नही ऐसी कोई बात नही है.. हम लोग खा पीकर बहुत सुखी है.. दूध तो हम जानबूझकर नही पीते है.. ओर न ही हमारे घर आये किसी मेहमान को पिलाते है.

नीलिमा हैरानी से बोली मगर क्यो..? राखी ने कहा मेरा ऐसा मानना है कि गाय और भैंस को जो दूध आता है वह हमारे लिए नही बल्कि उस के बच्चे के लिए आता है.. हमारी दूध की चाहतों की वजह से उन के बच्चे को भूखा मरना पड़ता है और कोई नन्हा शिशु हमारी वजह से भूखा रहे यह न तो मुझे पसंद है और न ही इनको.. सो हमारे परिवार ने हमेशा के लिए दूध से दूरी बनायी है.. नीलिमा प्रशंसा भरे स्वर में बोली वाकई यह बात तो बिल्कुल सही है.. मैं भी कोशिश करूंगी की दूध से बचु.

    नीलिमा काफी देर रुकी.. राखी ओर नीलिमा दोनो बीते समय की यादों को ले कर गपशप करती रही.. कभी हंसी के ठहाके तो कभी अचानक खामोशी.. फिर अचानक नीलिमा उठ खड़ी हुई.. बोली राखी बहुत देर हो गयी है.. अब चलती हु.. गुड्डू को बोल के मुझे बाहर रिक्शा कर के दे।

राखी बोली हा क्यो नही.. आप जाओ और नीलिमा को इनके घर तक छोड़ कर आओ.. मैं बाहर निकला तो कानो में राखी की आवाज पड़ी.. नीलिमा आती रहना.. तुम्हारे आने से मुझे बहुत अच्छा लगा.. बाहर तुरंत रिक्शा मिल गया.. नीलिमा रिक्शे में बैठ बोली अच्छा गुड्डू चलती हु.. मैं बोला नीलिमा जी मेरा मोबाइल नम्बर दु..?

वह हँसते हुए बोली नही रे पगले.. तेरा नम्बर ले कर मुझे क्या राखी का घर उजाड़ना है.. आज हम संजोग से मिल गए.. अब मैं तुजे कभी नही मिलूंगी.. कभी नही.. मैने महसूस किया कि उसकी आँखों मे नमी उतर रही है.. मैं तुरंत अपने घर की ओर चल पड़ा.. राखी बाहर दरवाजे पर ही खड़ी थी.. मुझे देख बोली नीलिमा ने शादी नही की ओर इसकी वजह मैं हु न..! मैं कुछ न बोला.. राखी मेरे सीने से लग रोने लगीं.. मेरी भी आंखे भर आयी।

रमेश तोरावत जैन
अकोला
मोब 9028371436

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