कृत्रिम बुद्धिमत्ता | Kritrim Buddhimatta

कृत्रिम बुद्धिमत्ता

( Kritrim buddhimatta ) 

जानें कृत्रिम बुद्धिमता का यथार्थ

वर्तमान विज्ञान प्रगति प्रयास,
मनुज दिव्यता प्रतिस्थापन ।
यंत्रवत परिवर्तन उपमा,
तीव्रता शुद्धता कार्य संपादन ।
लघु काल लाभ आधिक्य,
सकारात्मक प्रयोग मानव हितार्थ ।
जानें कृत्रिम बुद्धिमता का यथार्थ ।।

जॉन मैकार्थी प्रतिपादक ,
उन्नीस सौ छप्पन अमेरिका ।
स्वदेश प्रणेता राज रेड्डी,
विज्ञान वरदान स्वरिका ।
स्नेहिल कदम आलोक पथ,
समस्या हल रूप सरलार्थ ।
जानें कृत्रिम बुद्धिमता का यथार्थ ।।

प्रतिक्रियाशील सीमित स्मृति मन सिद्धांत,
आत्म जागरूक अनूप चार प्रकार ।
प्रश्न समझ अधिग्रहण अन्वेषण,
प्रस्तुति मूल्यांकन चरण आधार ।
न्यून श्रम दक्षता अभिवृद्धि,
मानवता वंदन सेवा भावार्थ ।
जानें कृत्रिम बुद्धिमता का यथार्थ ।।

नीरसता श्रृंगार सरस रूप,
काम काज सक्रियता दर्शन ।
औद्योगिक क्रांति कल्पनातीत,
अद्यतन प्रौद्योगिकी आनंद स्पर्शन ।
चिकित्सा अभियांत्रिकी शिक्षा सह
मनोरंजन क्षेत्र मंगल चरितार्थ ।
जानें कृत्रिम बुद्धिमता का यथार्थ ।।

मनुज आविर्भाव अद्भुत,
ए आई मात्र छद्म रूप ।
भावनाहीन संश्लेषण विश्लेषण,
वैचारिक शून्यता प्रतिरूप ।
नियोजन अवसर संकुचन,
विलोपन संवेदना पुरुषार्थ ।
जाने कृत्रिम बुद्धिमता का यथार्थ ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें:-

आद्या से आराध्या तक | Aadya se Aaradhya Tak

Similar Posts

  • टिप-टिप करती बूंदे | Tip-Tip karti Boonde

    टिप-टिप करती बूंदे ( Tip-tip karti boonde )   आसमान‌ से बरस रहा है आज झमाझम पानी, झूमो‌ नाचों ख़ुशी मनाओ मिलकर दिल जानी। टिप टिप करती बूॅंदे लगती है सभी को सुहानी, चलों सोनू मोनू ‌टीना बीना करें सभी मनमानी।। जूता-चप्पल कोई ना पहनो भागो दौड़ो सरपट, उछल कूद का आनन्द लो आओ सब…

  • गोरैया | Poem on sparrow in Hindi

    गोरैया ( Goraya )   चहचहाती गोरैया फुदकती सबके मन को हर्षाती रंग बिरंगी डाल डाल पे जब पंख पसारे उड़ जाती   नील गगन में उड़ाने भर छत पर आकर बैठती सुंदर सी मनभावन लगती मीठी-मीठी चहकती   रौनक आ जाती घर में सब गौरैया को डाले दाना फूरर फूरर उड़ना फिर आकर घर…

  • कथा सम्राट | Katha Samrat

    ‘कथा सम्राट’ ( Katha samrat )   सरल व्यक्तित्व के धनी नाम था धनपत राय, लमही गांव में जन्मे प्रसिद्ध कथाओं के सम्राट, संघर्षो से भरे जीवन को लेखनी में ऐसा ढाला। कालजयी हो गई फिर उपन्यासों की हरेक धारा, रचनाओं में जन- जीवन को गहराई से था उतारा। समाज की अव्यवस्थाओं पर किया कड़ा…

  • शेखावाटी गंध | Kavita Shekhawati Gandh

    शेखावाटी गंध ( Shekhawati Gandh )   खबरों की खबर है या वो बेखबर है। हमको भी सबर है उन्हें भी सबर है। कहीं आसपास दमके नव ज्योति उजाला। चमक रहा भास्कर मेरी किस्मत का ताला। मरूवेदना सुन लो आकर दर्द मेरे दिल का। आज तक जागरण हुआ मेरे जनमत का। शेखावाटी गंध फैली हिंदुस्तान…

  • यादें | Kavita

    यादें ( Yaaden ) जाती है तो जाने दों,यह कह नही पाया। नयनों के बाँध तोड़ के, मैं रो नही पाया। वर्षो गुजर गए मगर, तू याद है मुझको, मै भूल गया तुमको, ये कह नही पाया।   दिल का गुबार निकला तो,शब्दों में जड दिया। तुम जैसी थी इस दिल में तुझे,वैसा गढ़ दिया।…

  • गुमान | Kavita Gumnam

    गुमान ( Gumnam ) पहुँच जाओगे एवरेस्ट की उचाई तक नाप लोगे पाताल की गहराई भी पर, गिरने या डूबने पर बचाने वाले लोग भी हों ख्याल इस बात का भी रखना होगा हर मौसम अनुकूल नहीं होता हर कोई प्रतिकूल नही होता बनाकर चलते हैं जो उन्हे कुछ भी मुश्किल नहीं होता लहरों की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *