Kushmanda Mata

चैत्र नवरात्र भक्ति धारा | Kushmanda Mata par Kavita

चैत्र नवरात्र भक्ति धारा

( Chaitra Navratra Bhakti Dhara ) 

 

अष्ट भुजाओं वाली आओ, सिंह सवार हो माता।
धनुष बाण कमंडल, शोभित हे कुष्मांडा माता।
नवदुर्गा स्वरूप चतुर्थ, सर्व सुख दायिनी माता।
दिव्य ज्योति आलोक प्रभा, तेज तुम्हीं से आता।
सिंह सवार हो माता

उत्साह उमंग भरने वाली जीवन में आनंद भरो।
जग कल्याणी मात भवानी, अंबे जग पीर हरो।
आदि शक्ति आदि स्वरूपा, सर्व सिद्धि सुखदाता।
दसों दिशाएं आलोकित हो, जग रोशन हो जाता।
सिंह सवार हो माता

सूर्यलोक निवासिनी माता, दिव्य प्रभा कांति देती।
खुशहाली से झोली भरती, संकट सारे हर लेती।
अमृत कलश हाथ में तेरे, सुशोभित जपमाला।
विद्या बुद्धि यशदात्री, सजा है दरबार निराला।
सिंह सवार हो माता

मां कुष्मांडा कल्याण करें, वैभव देती भंडार भरे।
ध्यान धरे जो सच्चे मन से, उनका बेड़ा पार करें।
भाग्य तारे चमकाती, आराधक पूजक दर आता।
सबकी झोली भरने वाली, खोलो मार्ग सारे माता।
सिंह सवार हो माता

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मेरे खुदा | Poem Mere Khuda

Similar Posts

  • सावन में | Geet Sawan Mein

    सावन में ( Sawan Mein ) मधुर मिलन का ये महीना। कहते जिसे सावन का महीना। प्रीत प्यार का ये महीना, कहते जिसे सावन का महीना। नई नबेली दुल्हन को भी, प्रीत बढ़ाता ये महीना।। ख्वाबों में डूबी रहती है, दिन-रात सताती याद उन्हें। रिमझिम वारिश जब भी होती, दिलमें उठती अनेक तरंगे। पिया मिलन…

  • यह आग अभी | Geet Yah Aag

    यह आग अभी ( Yah Aag Abhi ) यह आग अभी तक जलती है ,मेरे आलिंगन में। स्वर मिला सका न कभी कोई ,श्वासों के क्रंदन में ।। जब छुई किसी ने अनायास ,भावुक मन की रेखा । दृग-मधुपों ने खुलता स्वप्नों, का शीशमहल देखा। खिल उठे पुष्प कब पता नहीं ,सारे ही मधुवन में।।…

  • मैं अपनों से हारा हूं | Main Apno se Hara Hoon

     मैं अपनों से हारा हूं ( Main apno se hara hoon )   हिम्मत हौसलों जज्बों की, बहती प्रेम धारा हूं। औरों से तो लड़ भी लेता, मैं अपनों से हारा हूं। मैं अपनों से हारा हूं पग पग पे बाधाओ से, लोहा लेना सीख लिया। तूफानों से टक्कर लेना, मुस्कुराना सीख लिया। बारूदों के…

  • सारा जीवन ही बीत गया | Geet Sara Jeevan

    सारा जीवन ही बीत गया ( Sara jeevan hi beet gaya )  सारा जीवन ही बीत गया , यह अश्रु-गरल पीते-पीते । जो भरे कलष समझे हमने ,वे मिले सभी रीते-रीते।। मत पूछो त्याग-तपस्या से,क्या जीवन को उपहार मिला। शापों से आहत गंगाजल, पीने को बारम्बार मिला। क्या जीत सके उन्मादों से , वो हार…

  • आ गया फिर चुनाव उत्सव | Geet Chunaav Utsav

    आ गया फिर चुनाव उत्सव आ गया फिर चुनाव उत्सव, करो मतदान जाकर के। आ गया फिर चुनाव उत्सव, करो मतदान जाकर के । करो मतदान जाकर के… करो मतदान जाकरंके ….. करो मतदान जाकर के, आ गया फिर चुनाव उत्सव…… कहीं भी तुम रहो भैया , कहीं भी तुम रहो बहना, कहीं भी तुम…

  • रंग रूप और गुण | Geet Rang Roop aur Gun

    रंग रूप और गुण ( Rang roop aur gun )    रंग रूप और गुण मिले जुड़े हैं दिलों के तार। अपनापन अनमोल मिले हृदय उमड़ता प्यार। धरती अंबर जब मिले बहती भावों की रसधार। उतरे चांद जमीन पे चांदनी खुशियों की फुहार। हृदय उमड़ता प्यार रंग मिले रोशन हो चेहरे, रुप मिले निखार आए।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *