क्या बात हो गई

क्या बात हो गई

क्या बात हो गई

तुम रूठ कर चले गए क्या बात हो गई।
हम बुलाते रह गए क्या बात हो गई।

तुम रात ख्वाब में पैगाम ले कर आए।
विन सुनाए बैठे रहे क्या बात हो गई।

मुफलिसी का हल ढूंढ़ने में जिंदगी गई।
हल निकला ना कोई क्या बात हो गई।

मालूम होता तो बताता चौखट को।
दरबाजे को क्या बाताऊं क्या बात हो गई।

निकल जाती हो करीब से विन बात किए।
सब पूछते हैं कि क्या बात हो गई ।

तुझसे ही इक आश बंधी थी जिंदगी को।
वह भी बे वक्त टूटी क्या बात हो गई ।

सुदेश दीक्षित

बैजनाथ कांगड़ा

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • प्रश्न | Prashn

    प्रश्न ( Prashn )   हर आदमी गलत नहीं होता किंतु ,घटी घटनाएं और मिलते-जुलते उदाहरण ही उसे गलत साबित कर देते हैं भिन्नता ही आदमी की विशेषता है किसी की किसी से समानता नहीं न सोच की ना व्यवहार की तब भी कर लिया जाता है शामिल उसे भ्रम और वहम की कतार में…

  • जय महाराणा प्रताप | Kavita on Maharana Pratap

    जय महाराणा प्रताप ( Jai Maharana Pratap )   हल्दीघाटी युद्ध चरम पर था स्वयं अरि काल बने राणा नर मुंडो से सटी रणभूमि जिधर निकलते महाराणा   महाराणा के बिन बोले ही अरि दल में जा घुसता चेतक पराक्रमी सवार प्रतापी राणा ओजस्वी दमकता मस्तक   ना भूख लगे ना पांव थके मेवाड़ी वीरों…

  • उजाले मिट नहीं सकते | Kavita

    उजाले मिट नहीं सकते ( Ujale mit nahin sakte )   हटा लो दीप द्वारे से, उजाले ये नही करते। जला लो मन में दीपों को,उजाले मिट नही सकते। जो जगमग मन का मन्दिर है,कन्हैया भी वही पे है, अगर श्रद्धा भरा मन है, तो फिर वो जा नही सकते। हटा लो दीप द्वारे से,…

  • अनटोल्ड स्टोरी | Untold Story

    अनटोल्ड स्टोरी ( Untold story )    ओ मेरा सब कुछ;मैं उसकी अनटोल्ड स्टोरी अचानक मेरी जिंदगी में एक शख़्स आता है जो मेरा दोस्त भी नही,हम सफर भी नहीं,लेकिन मुझे बहुत भाता है कुछ तो है दरमियां हमारे जिससे बंधी है हम दोनों के बीच बंधन की डोरी ओ मेरा सब कुछ; मैं उसकी…

  • भारत के | सजल

    भारत के ( Bharat ke ) तुम हो वीर सपूत महान भारत के बढाते हो तुम्हीं सम्मान भारत के ।।1। निछावर करते प्राण, मोह नहीं करते तुम विश्व-गुरु अभियान हो भारत के ।।2। मौत का कफन बांध लडते हो वीर तुम भारती-सपूत लाल महान भारत के ।।3। मातृभूमि की मिट्टी लगे सबसे अनमोल, कण-कण है…

  • योग पर कविता | Poem on Yoga in Hindi

    योग पर कविता ( Yoga par kavita )    थका हुआ जब पाओ तुम योगा को अपनाओ तुम योगा से भागे रोग सभी खुशियां होंगी पास तभी अनुलोम-विलोम किया करो जीवन जी भर जिया करो बच्चे बूढ़े हो या जवान योग से मिलता आराम सुबह सवेरे उठ जाओ निवृत्त सबसे हो आओ योगा से ताजगी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *