हिस्से की शय | Laghu Katha Hisse ki Shay

वे तीन भाई थे।
मझले पक्के शराबी और जिद्दी।
छोटे वाले स्नातक और अपने कर्मों के भरोसेमंद ।
सबसे बड़े अध्यापक , पक्के कर्मकांडी, मगर बेहद चालाक।
बड़े ने विधवा माँ को बहला – फुसला कर बचे – खुचे बाप के धन पर हाथ साफ कर लिया। माँ के तेरहवें में सम्मिलित न होते हुए भी ज्यादा जमीनें हड़पने में लग गया। मझले ने उत्पात मचा कर अपना हक ले लिया लेकिन छोटे ने तकरार करना उचित नहीं समझा, और अपने छोटे- से मकान में सिमट गया।
मजा ये कि माँ – बाप, जो सदैव छोटे में रहे, की भटकती आत्मा, जैसी की सामाजिक मान्यता है, भी इसी के हिस्से आ गयी। दिन – प्रतिदिन छोटा मतिभ्रम की वजह से ब्लड सूगर व हाई ब्लडप्रेशर का शिकार हो गया।
एक दिन ऐसा आया कि छोटे का ब्लडप्रेशर इतना हाई हुआ कि वह फिर उठा ही नहीं।

 

डॉ.के.एल. सोनकर ‘सौमित्र’
चन्दवक ,जौनपुर ( उत्तर प्रदेश )

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