क्यूं चाहते हो इतना

क्यूं चाहते हो इतना

क्यूं चाहते हो इतना

 

 

मुझे खूबसूरत पहेली बताता है जो

आंखों से नींदे मेरी चुराता है वो

 

ख्वाबो से हटाकर धूल की परतें

रुह को मेरी महकाता है वो

 

दिन हमेशा खिल जाता है गुलाब सा

कांटे सभी दामन से छुडाता है वो

 

तन्हाईयों की जो लिपटी हुई थी चादरे

सिलवटें उनकी खोल जाता है वो

 

आँसुओ को बहने से रोकती हूं बहुत

पल पल याद आ कर रुलाता है वो

 

किसी रोज हो गया मेरे रूबरू कभी

पर्दानशी से भी नजरे मिलाता है वो

 

खुशी ही नहीं गमों से भी बावस्ता होगा

मुझे देख  हर घड़ी गुनगुनाता है वो

 

ना कर मुझे मजबूर इस कदर ऐ मालिक

दिले आइने में बार बार चमक जाता है वो

 

शमां पर मिट जाने की हसरत लिए हुए

दिल की हर धड़कन को आजमाता है वो

 

नीलम कभी हीरा कभी पुखराज हो जाए

ईश -आशीष का बेमिसाल तोहफा है वो

 

“क्यूँ चाहते हो इतना” पूछ बैठा ये जमाना

एक आह सी भरके सिर्फ मुस्कुराता है वो

 

?

लेखिका : डॉ अलका अरोडा

प्रोफेसर – देहरादून

यह भी पढ़ें :

वक्त रुका ही नहीं कभी किसी के लिए

Similar Posts

  • 21 जून की ख़ास पहचान | 21 June ki Khaas Pahchan

    21 जून की ख़ास पहचान ( 21 June ki khaas pahchan )   सारी ज़िन्दगी अपने-आप को स्वस्थ वही है पाता, आनंदित प्रफुल्लित होकर योगाभ्यास जो करता। मानसिक शारीरिक आध्यात्मिक ऊर्जा वो बढ़ाता, जीवन को सार्थक बनाता जो रोज़ इसको करता।। ऋषि-मुनि और महर्षियों की सत्य हुई यें कहावत, योगाभ्यास ही है जरिया जो रोगों…

  • आप ही बदल गए | Aap hi Bada Gaye

    आप ही बदल गए ( Aap hi Bada Gaye ) हम अपने जंजालो में और फंसते चले गए, उन्हे लगा यारों, हम बदल गए । करके नजदीकी, ये दूर तलक भरम गए, कुण्ठा के मस्तक पर ,दाग नया दे गए। खुशी की अपील नहीं मुस्कुराहट मॉगे, आपाधापी की जिन्दगी से अनगिन आप गए। ऐसा नहीं…

  • जिंदगी की पगडंडियों

    जिंदगी की पगडंडियों कांटों से भरी, ऊ उबड़ खाबड़ जिंदगी की पगडंडियां कहां तक साथ चलेंगी क्या जानूं। कष्टकर हैं बोझिल सी फिर भी मेरी, जिंदगी में उम्मीद की किरण लातीं , कहीं तो मंजिल मिलेगी मुझे चलते चलते अविराम डगर पर। मै हूं कि कभी कभी निराश हो जाती हूं, थक जाती हूं खुद…

  • तन्हा रातें | Tanha Raatein

    तन्हा रातें ( Tanha raatein )   जाड़े की ठिठुरती तन्हा रातें कोहरे में लिपटे जर्द होते जिस्म और बर्फ  होते रिश्तों को पिघलाने के लिये काफी हैं कुछ तेरी कुछ मेरी चंद गरम सांसें या फिर . . . . साथ गुजारे पलों की यादों की तपिश.. लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब…

  • बेटे भी दहलीज छोड़ चले

    बेटे भी दहलीज छोड़ चले ऊंची शिक्षा पाने को जो रुख हवा का मोड़ चले। बेटियों की बात नहीं बेटे भी दहलीज छोड़ चले। कोचिंग क्लासेज हॉस्टल शिक्षा का ठिकाना है। कड़ी मेहनत रातदिन कर मंजिल तक जाना है। घर आंगन दीवारें दहलीज सूना सूना सा लगता है। मात पिता की याद सताती दीप प्रेम…

  • सोचो तो सही | Socho to Sahi

    सोचो तो सही ( Socho to Sahi ) सोचो तो सही, होगा वही । सोचेंगे जो भी , मिलेगा वही । सोचना है ज़रूरी , हर कामना होगी पूरी । छू लोगे ऊंचाई , सोच को बदलो भाई । पूरा होता है , हर सपना । बस ज़रूरी है , सपने देखना । मिलेगी अवश्य…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *