बहू
“संध्या बेटा, मैं पड़ोस में अमित की बहू देखने जा रही हूँ। घर का दरवाजा याद से बंद कर लेना।” कपड़ों पर प्रेस कर रही संध्या से उसकी सास ने आवाज देकर कहा।
“ठीक है मां जी। अभी आई।” संध्या बोली।
कानों में अम्मा के जाने की आवाज पड़ते ही 4 वर्षीय विभोर बोल उठा-
“अम्मा कहाँ जा रही हो?”
“बहू देखने जा रही हूँ।” अम्मा ने जवाब दिया।
“किसके लिए अम्मा?” विभोर ने पुनः सवाल किया।
“तेरे लिए और किसके लिए?” मजाक में अम्मा बोली।
“मेरे लिए बहू देखने जा रही हो तो मैं भी जाऊंगा।” विभोर बोला।
“विभोर के लिए बहू देखने मैं भी जाऊंगी।” विभोर की 6 वर्षीय बहन इलिशा बोली।
“ठीक है। सब चलो। अच्छा विभोर, एक बात बताओ…शादी के बाद क्या होता है?” अम्मा ने सवाल किया।
“शादी के बाद घर में मेरी बहू आयेगी। वो हम सबके लिए खाना बनायेगी। हम खूब मजे से खाएंगे।” विभोर ने कहा।
“फिर तो मेरे भी मजे आ जाएंगे। मुझे भी नई नई चीजें खाने को मिलेगी। तेरी बहू मेरे लिए भी तो रोटी बनायेगी।” अम्मा मजे लेते हुए बोली।
“अम्मा, बहू तो आएगी, रोटी भी बनाएगी लेकिन मेरी मम्मी के लिए…. तुम्हारे लिए नहीं?” दो टूक विभोर बोला।
“क्यों भई? मेरे लिए क्यों नहीं?” अम्मा ने सवाल किया।
“क्योंकि तुम गंदी हो। तुम मेरी मम्मी से लड़ती रहती हो। उनको बात-बात पर डांट लगाती रहती हो। रात आपने मेरी मम्मी को रुलाया भी था, इसलिए मैं तुम्हारे लिए अपनी बहू से रोटी नहीं बनवाऊंगा।” विभोर ने अम्मा के सवाल का जवाब दिया।
बच्चे विभोर के मुँह से ऐसी बात सुनकर संध्या की सास सकते में आ गई। संध्या ने बात संभालते हुए विभोर को समझाना शुरू किया-
“विभु बेटा, ऐसा नहीं कहते। अम्मा हम सबसे बड़ी हैं। जो घर में बड़े होते हैं वो हम सबका ध्यान रखते हैं। अम्मा भी घर में सबसे बड़ी हैं। वो हम सबको प्यार करती हैं और हमारा ध्यान रखती हैं। अगर अम्मा हमको हमारी गलती पर डांटती हैं तो क्या हुआ? हमें चुपचाप डाँट खा लेनी चाहिए, अपनी गलती सुधार कर उनकी कहीं बातों पर अमल करना चाहिए। गलती को दोहराने से बचना चाहिए। अभी तुम बहुत छोटे हो इसलिए तुम्हें पता नहीं चलेगा कि उनकी डाँट के पीछे हमारी कितनी परवाह छुपी हुई है। हम गलती करते हैं तभी तो डाँट खाते हैं। मैं भी तो तुम्हें डाँटती हूँ, गलतियों पर टोकती हूँ।”
“मम्मी, फिर रात तुम रो क्यों रही थी?”
“बेटा, वो मैं अम्मा की वजह से नहीं रो रही थी बल्कि अपनी गलती का एहसास करके रो रही थी। जब हमें एहसास होता है कि हमने कुछ नासमझी में गलत कर दिया है तो रोना आ जाता है।”
“विभोर बेटा, एक बात हमेशा याद रखना, अगर कोई हमारे साथ गलत व्यवहार करे तो बदले में हमें उसके लिए गलत व्यवहार नहीं करना चाहिए। गलत बातें नहीं बोलनी चाहिए क्योंकि अगर हम भी गलत व्यवहार करेंगे तो हममें और उसमें क्या अंतर रह जायेगा।
हम भी उसकी तरह बुरे इंसान बन जायेंगे। भगवान जी सब देख रहे हैं। जिन लोगों को हम सजा नहीं देते, उनको सजा भगवान जी देते हैं इसलिए हमें सब कुछ भगवान पर छोड़कर.. दूसरों की बुराई न देखकर सिर्फ अपने अच्छे कामों पर ध्यान देना चाहिए। भगवान जी अच्छे लोगों की हमेशा मदद करते हैं और बुरे लोगों को दंड देते हैं।” मम्मी ने विभोर को समझाते हुए आगे कहा-
“तुम्हे पता है विभोर… अम्मा रोज सुबह तुम्हें तैयार करवाने में कितनी मदद करती हैं? रोज तुम्हें स्कूल छोड़ने जाती हैं, फिर स्कूल से लेकर आती हैं। तुम्हें ढेर सारा प्यार करती हैं। जो चीजें तुम्हें पसन्द हैं वो भी अपने हिस्से की तुम्हें खिला देती हैं। तुम्हें याद है कल तुम्हें अम्मा ने बाजार से आइसक्रीम खरीद कर भी दी थी। कुछ दिनों पहले मेला घुमाने लेकर गई थी है, वहाँ से तुम्हें खिलौने भी दिलवाएं थे। अब सोचकर बताओ कि अम्मा अच्छी हैं या बुरी?”
“तुम ठीक कहती हो मम्मी, अम्मा अच्छी हैं लेकिन मम्मी एक परेशानी है..।”
“वो क्या?”
“मम्मी, रसोई का चूल्हा बहुत ऊंचाई पर है, मेरी छोटी सी दुल्हन वहाँ तक पहुँचेगी कैसे? रोटी बनायेगी कैसे? वह तो सबके लिए रोटी बनाते-बनाते बहुत जल्दी ही थक जाएगी ना?”
“अच्छा रोटी बनाने में ये परेशानी है मेरे विभोर को। चलो, मैं तुम्हारी परेशानी हल कर देती हूँ। मैं तुम्हारी दुल्हन के लिए बाजार से एक छोटा सा चूल्हा लाकर दे दूंगी। फिर खाना बनाने में तुम्हें और तुम्हारी दुल्हन को कोई परेशानी नहीं आयेगी।”
“फिर ठीक है मम्मी। अम्मा की तरफ मुखातिब होकर विभोर बोला-
“अम्मा, अब आप रोटी को लेकर परेशान मत होना। मम्मी मुझे छोटा सा चूल्हा लाकर दे देंगी। फिर मैं और तुम्हारी बहू मिलकर उस पर खाना बनाएंगे और सब खूब मजे से खाएंगे।” विभोर के मुंह से बड़ो जैसी बातें सुनकर सास-बहू दोनों मुस्कुरा उठी।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा
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