लौटआओगे तुम | Love Kavita

लौट आओगे तुम

( Laut aaoge tum )

 

याद है
एक बर्फीली
पहाड़ी शाम
सफेद चादर सी
दूर तक फैली बर्फ
देवदार के वृक्ष
ठंडे ,काँपतें
तुम्हारे हाथों की
वो छूअन मात्र से
पिघलने लगा
मेरा रोम,रोम
आँखों में तेरी
मदहोशी
लवों पर मुस्कान
कानों में गूँजती
वो निश्चल हँसी
खो गये जो पल
सब कुछ वहीं
बस तुम नही
दूर तक फैला
गहरा सन्नाटा
लगता है जैसें
तुम हो यहीं
वादियों में
धुंध के सायें से
निकलकर आओगें
पकड़ कर हाथ
संग अपने
आगोश में
ले जाओंगे
करती हूँ
इंतजार
कभी तो लौटेंगे
लौट आओगे तुम….

 

डॉ रचनासिंह “रश्मि ” ( लखनऊ )
स्वतंत्र स्तंभकार
singh79rashmi@gmail.com

यह भी पढ़ें :-

कितनी मजबूर बेटियां | Beti par Kavita in Hindi

Similar Posts

  • निंदा से मन मलीन | Man Maleen

    निंदा से मन मलीन ( Ninda se man maleen )    करना चाहो जगत में पुण्य के सब काम करो। निंदा करके तुम खुद को यूं ना बदनाम करो। क्यों मन मलीन करते हो क्या ठहरा पानी है। निंदा करना नीचता की बस एक निशानी है। क्यों कलह करते हो तुम खड़ी दीवार ढहाते हो।…

  • गुरु की महिमा

    गुरु की महिमा गुरु की महिमा सबसे न्यारीगुरु ज्ञान की खान है।राह दिखाते हैं सबको हीमिल जाते भगवान है।। बीच भंवर में डूब ही जातागुरु की बात न मानी,अमृत – रस बरसाने वालीहै सदगुरु की वाणी।गुरु के चरणों में ही रहकरमिल जाता सम्मान है।गुरु की महिमा…..।। पुष्प चढ़ाऍं – शीश झुकाऍंकरें वंदना मिलकर सारे,खुशियों की…

  • उत्तम शौच | Uttam Sauch

    उत्तम शौच ( Uttam Sauch ) उत्तम शौच~ भावों की पवित्रता दिल में रख ● मन है चंगा~ हृदय के भीतर पावन गंगा ● अन्तःकरण~ तन के साथ मन शुद्धिकरण ● कर तू ध्यान~ लोभ की तलवार रख तू म्यान ● एक आधार~ मनुष्य जीवन में शुद्ध विचार ● निर्मल जैन ‘नीर’ ऋषभदेव/राजस्थान यह भी…

  • काश (कांस) के फूल

    काश (कांस) के फूल बचपन से मैनें देखा है,काश के फूलों को खिलखिलाते।सफेद सफेद काश के फूल,हवा के झोकों से लहराते।खेत के मेड़ों में,खुले मैदान पर,नदी किनारे,घाट पहाड़ पर।जब काश के फूल खिलते,वर्षा विदाई का संकेत दे जाते।1। रुई-सी सफेद काश के फूल,धरती का नया परिधान है।अपनी ख्वाहिशों की तरह बिखर जाने का अभिमान है।कोमलांगी…

  • अनुपम खेर | Anupam Kher par kavita

    “अनुपम” खेर ( Anupam Kher )  –> क्या उपमा दूँ मैं “अनुपम” की …….|| 1. हैं अनुपम जी खुशहाल बडे,इन्डस्ट्री मे नाम अमर उनका | सूट करे किरदार कोई भी,आवाज बुलंद हुनर उनका | है सिर पर हांथ माँ दुलारी का,आशीष सदा बरसाती है | खट्टी-मीठी सी नोक-झोंक,सबके मन को हर्षाती है | –> क्या…

  • गिरे आंखों से आंसु तो क्या

    गिरे आंखों से आंसु तो क्या गिरे आंखों से आंसु तो क्या ,नहीं मिले गले उनके तो क्या ,तराने लिखने मिले थे दो डगर,नहीं लिख सके मिलन गीत तो क्या ,गिरे आंख से आंसू तो क्या …..सभी कदम तरंग की धुन में ,कोई सुने कुछ कोई कुछ मन में ,मिलाते रहे बिंदुओं को रेख में,जिन्हें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *