माता-पिता और हम

माता-पिता और हम

माता-पिता और हम

 

->पिता जडें-माँ वृक्ष, तो हम फल फूल पत्ते हैं ||

1.लंम्बा रास्ता-लंम्बा सफर, मुसाफिर हम कच्चे हैं |
नहीं है अनुभव नई राहों का, अभी तो हम बच्चे हैं |
चले अकेले बिना तजुर्बे, पग-पग मे बस धक्के हैं |
पिता रास्ता-माँ सफर है, तो हम मुसाफिर अच्छे हैं |

–>पिता जडें-माँ वृक्ष, तो हम फल फूल पत्ते हैं ||

2.करते मेहनत मिलती वेतन, चलता घर-परिवार है |
घर में खुशहाली आती,मिलते सब अधिकार हैं |
जो चाहे सब मिलता है,हम पर कितने उपकार हैं |
पिता मेहनत माँ वेतन है,तो हम खुशियाँ अपार हैं |

–>पिता जडें-माँ वृक्ष,तो हम फल फूल पत्ते हैं ||

3.नदियाँ लंम्बी नीर लवालव,प्यासों की अभिलाषा है |
जीव-जन्तु-धरती-कृषि-प्राणी,सब को पानी की आशा है |
जहाँ नहीं जल सब सूना है,फैली चारो तरफ निराशा है |
पिता नदी और माँ जल है,तो हम जल की परिभाँषा हैं |

–>पिता जडें-माँ वृक्ष,तो हम फल फूल पत्ते हैं ||

4.भव्य शिवालय सुन्दर मूरत,भक्तों की भीड अपार है |
खडे पंक्ति मे करें प्रतीक्षा,दर्शन की धुन सबार है |
हुए अलौकिक दर्शन मन में,खुशियों का भंण्डार है |
पिता शिवालय माँ मूरत है,तो हम भक्तों की कतार हैं |

–>पिता जडें-माँ वृक्ष,तो हम फल फूल पत्ते हैं ||

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लेखक:  सुदीश भारतवासी

नोट=> जड़ो के बिना वृक्ष नहीं,वृक्ष के बिना फल फूल पत्ते नहीं |यहीं कहानी हमारे जीवन की है | जिन्होने आपको इस खूबसूरत दुनियां से अवगत कराया, इस दुनियां की हर अच्छाई-बुराई से अवगत कराया, जिन्होने ईश्वर से अवगत कराया | आपके लिए तो आपके पिता ही देव,आपकी माता ही देवी हैं |इसलिए माता-पिता का हमेशा सम्मान करें | आप खुद अच्छी समझ (सोच) के मालिक हैं |?|

 

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