Madhushala

मधुशाला | Madhushala

मधुशाला !

( Madhushala )

 

छूत – अछूत में भेद करो नहीं,
जाकर देखो कहीं मधुशाला।
मन मैल करोगे मिलेगी न मुक्ति,
संभालो जो ब्रह्मा दिए तुम्हें प्याला।

झुक जाता है सूरज चंदा के आगे,
पीता है निशदिन भर -भर प्याला।
तेरे होंगे जब कर्म मधु-रितु जैसे,
तब छलकेगी अधरों से अंतर हाला।

जाति-कुजाति के चक्कर पड़ो न तू,
हाथ लगा बड़ी मुश्किल से प्याला।
ज्ञान के होंठ से दूर करो न तू,
खिसकाओ न औरों की खातिर हाला।

जाते समय पछताएगा केवल,
मिट्टी से सोना बना जानेवाला।
देखो सूर, कबीर, रहीम पिए जो,
वो पीकर प्यास बुझा मतवाला।

मिट्टी का प्याला है दुर्लभ बहुत ये,
काल प्रबल है समझ पीनेवाला।
मोक्ष की आस लगाया है तूने जो,
जाना पड़ेगा तुम्हें मधुशाला।

सोने का घर हो या माटी का हो घर,
या आती हो घर में भले सुरबाला।
दुनिया है सोने के मृग के ये जैसी,
ठगों से बचाएगी मेरी मधुशाला।

मत रौदों अछूतों को पैरों तले फिर,
पड़ेगा तेरा उससे सुन पाला।
जातीय उन्माद ये ठीक नहीं सुन,
श्मशान में डोम जलाने ही वाला।

श्रीराम जी शबरी के बेर चखे थे,
अंगूठे के दान की जिन्दी है छाला।
कर्मों की जाँच करेगा विधाता,
न मिलेगी दुबारा तुम्हें मधुशाला।

 

लेखक : रामकेश एम. यादव , मुंबई
( रॉयल्टी प्राप्त कवि व लेखक )

यह भी पढ़ें :-

दशहरा | Dussehra

Similar Posts

  • कविता श्रृंखला हमारे शहर में

    कविता श्रृंखला हमारे शहर में  हमारे शहर में बहुत सारे लोग अल्पाहारी हैं साथ ही शुद्ध शाकाहारी हैं. वे लहसुन -प्याज नहीं खाते हैं मगर रिश्वत खाने से बाज़ नहीं आते हैं. तल्ख़! क्या तुमको पता है? रिश्वत सरकारी है रिश्वत सहकारी है रिश्वत तरकारी है रिश्वत खाने वाला ही एकमात्र विशुद्ध शाकाहारी है…..  …

  • हिंदी से हिंद का परचम | Hindi se Hind ka Parcham

    हिंदी से हिंद का परचम ( Hindi se Hind ka Parcham )    पढ़ूं हिंदी ,लिखूं हिंदी, मेरी पहचान है हिंदी। है माता तुल्य जन जन की, हमारी शान है हिंदी ।। दिए हिंदी नें हमको सूर ,तुलसी कबीर औ मीरा । सुमित्रानंदन भारतेंदु, प्रेमचंद सा दिया हीरा ।। सतत उत्थान हो हिंदी ,सदा सम्मान…

  • बस रह गई तनहाई | Tanhai

    बस रह गई तनहाई ( Bas reh gayi tanhai ) मिट्टी के घर चूने की पुताई गाय का रमहाना गोबर से लिपाई चूल्हे से उठता धुआं खुशबू रोटी की आई नीम के नीचे खटिया अम्मा की चटाई वो ठंडी हवा वो पुरवाई नदिया का पानी वह मंदिर की घंटी छाछ की गिलसिया गुड़ की डीगरिया…

  • ब्याह | Byah

    ब्याह ( Byah )    तेरे आंगन की चिड़ियां बाबा एक दिन मैं उड़ जाऊंगी, दिखेगा चंदा सूरज तुझको पर मैं नजर ना आऊंगी। मंडप सजाया खुशियां मनाई सहरे सजें बाराती थे, वो तो तेरे दहेज के बाबुल आए बन सौगाती थे, तेरी आंखों ने सपने बुने थे गुड़ियां को ऐसे ब्याहूंगा, अपनी लाडो की…

  • वृंदावन | Vrindavan

    वृंदावन ( Vrindavan )   मुरली मनोहर बजाई बृंदावन में धूम मचाई राधे कृष्णा की जोड़ी बृज को प्रेम गाथा बतलाई ।। गोकुल ग्वाला कान्हा मेरा राधे बरसाने की छोरी रे नंद के आनंद भयो था बृषभान की किशोरी थी ।। एक दूजे से प्रेम था जिनको दया,करुणा कृपा सब बतलाई! न पाना ,न खोना…

  • नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) नवम दिवस

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) नवम दिवस भुवाल माता सबकी आँखों के तारे ।जन – जन की प्यारी भुवाल माता ।आस्था की आधार भुवाल माता ।सबके ह्रदय में करती वास माता ।सचमुच माता का दर्शन क्रान्त हैं ।चिन्तन माता का निभ्रान्त हैं ।सबके सपनों की आकार माता ।आस्था पर ज्योति उभारती माता।सत्य – शोध में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *