Mahal Bhojpuri Kavita

महल | Mahal Bhojpuri Kavita

महल

( Mahal ) 

 

धूल में मिल के सब धूल भईल
का पताका , का सिंघासन कवन भुल भईल
आज दुनिया देख रहल चुप चाप ओके
छप पन्ना में पढ़ल इतिहास भईल

शान, शौकत आऊर तमाशा सब खाक भईल
का पता कवन आग में जल के राख भईल
तोप दागत रहे कबो सलाम ओके
सजल सजावल आज सब बरबाद भईल

झर रहल ऊ महल कंकाल भईल
धर गोड कबर में बचल निशान भईल
चिंख भी मिट गईल बा देवार के
आज ऊ दुनिया जईसे शमसान भईल l

 

रचनाकार – उदय शंकर “प्रसाद”
पूर्व सहायक प्रोफेसर (फ्रेंच विभाग), तमिलनाडु

 

यह भी पढ़ें:-

समय | Samay par Bhojpuri Kavita

 

Similar Posts

  • कबड्डी | Bhojpuri bal kavita kabaddi

    ” कबड्डी ” (ल‌इकन के कविता)   आव कबड्डी खेली हम, रेखा के एने ठॆली हम, दऊड़-दऊड़ के पकड़ी हम, एने-ओने जकडी हम शोर मचाई दऊड़ल जाई उठा पटक हूडदूग मचाई कबो जियाई कबो मुआई जिया मुआ के गोल बनाई माटी में हम खूब लोटाई कबड्डी-कबड्डी आव चिल्लाई     कवि – उदय शंकर “प्रसाद” पूर्व…

  • हडिया | Haria Bhojpuri Kahani

    ” हडिया ” ( Haria )  एगो गांव में एगो लड़की रहे उ बहुत सुन्दर रहे लेकिन उ बहुत झगडाईन रहे । गांव के सारा लोग ओकरा से परेशान रहे। रोज-रोज उ केहु ना केहु से झगड़ा फंसा लेत रहे । ओके घर वाला लोग भी बहुत परेशान रहे ओके ठिक करेके सारा उपाय अपना…

  • आयल फगुनवाँ घरे-घरे | Bhojpuri Holi Geet

    आयल फगुनवाँ घरे-घरे! ( Ayal fagunwa ghare – ghare )    आयल फगुनवाँ घरे -घरे, चोलिया भीगै तरे -तरे। (2) होली है…….. बाजै लै ढोल औ बाजै मृदंग, उड़े ग़ुलाल लोग पीते हैं भंग। कोई न होश, न कोई बेहोश, मारे पिचकारी खड़े -खड़े। आयल फगुनवाँ घरे -घरे, चोलिया भीगै तरे -तरे। (2) होली है……..

  • उड़त बा रंगवाँ | Urat ba Rangwa

    उड़त बा रंगवाँ ( Urat ba Rangwa )    उठावा न साया घड़ी-घड़ी, उड़त बा रंगवाँ गली-गली। तोड़ा न सिग्नल,न तोड़ा कली, उड़त बा रंगवाँ गली-गली। (2) गमकत बा तोहरो ई फुलवा की क्यारी, लाल-लाल हुई मिट्टी,लाल हुई साड़ी। लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी, लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी। भरी पिचकारी…

  • कलयुग | Kalyug par Bhojpuri Kavita

    ” कलयुग “ ( Kalyug )   धधक-धधक अब धधक रहल बा चिंगारी अब भड़क रहल बा लोगन में बा फुटल गुस्सा हर जान अब तड़प रहल बा कहीं आवाज अउर कहीं धुलाई धरती पे अब लालिमा छाइल जान प्यारा हऽ सबके भाई फिर काहे बा गुस्सा आइल कहीं ना बा कवनो लेखा जोखा भाई…

  • बेचारा | Bechar Bhojpuri Kavita

    बेचारा ( Bechara )   जब से गरीबी के चपेट में आइल भूख, दर्द, इच्छा सब कुछ मराइल खेलें कुदे के उम्र में जूठा थाली सबके मजाइल का गलती, केके क‌इलक बुराई जे इ कठीन घड़ी बा आइल ना देह भर के पावेला जामा ठंडा, गमी, बरसात सब आधे पे कटाइल ठिठुर-ठिठुर गावेला गाना जल्दी-जलदी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *