Main Janti hoon

मैं जानती हूं | Main Janti hoon

मैं जानती हूं

( Main janti hoon ) 

 

मैं जानती हूं की मैं कौन हूं
क्या हूं
पता है मुझे ,मेरी वास्तविकता…..

मैं ,कोई तस्वीर या
श्रृंगार का सामान नही
ना ही ,यादों को संजोकर
ना याद रखनेवाली भुलक्कड़ लड़की हूं
और ना ही कोई भटकती हुई आत्मा हूं….

मैं , मतलब की पुड़िया नही
कांच की चूड़ियां नही,बल्कि
बादलों को उड़ाती हुई हवा सी हूं
चट्टानों से टकराती हुई लहर सी हूं
समंदर से मिलती हुई नदी सी हूं…..

बेशक,
मैं ,तीखी मिर्ची नही
मिश्री की डली भी नही
खट्टी मीठी इमली सी हूं
पत्थर सी कठोर भी हूं और
कली सी कोमल भी हूं
मुझे पता है ,में कौन हूं….

दुनियावालों
मुझे कमजोर समझने की भूल न करना
बेबस या लाचार न समझना
अबला समझने से पहले
चट्टान से टकराने की सोच लेना…

मैं जानती हूं
की मैं क्या हूं,कौन हूं
मेरी वास्तविकता क्या है
और …मुझे कैसे रहना है….

 

नौशाबा सूरिया

( महाराष्ट्र )

 

यह भी पढ़ें :-

सोच की संकीर्णता | Soch ki Sankirnata

Similar Posts

  • अब चली आओ

    अब चली आओ तेरी राहों में हर दिन गुजरता है,तेरी यादों में हर पल सिसकता है,दिल को समझाऊँ कैसे,अब तुम ही बताओ,अब नहीं सहा जाता, बस जल्दी से चली आओ। सपनों में आकर फिर दूर चली जाती हो,दिल की पुकार को अनसुना कर जाती हो,बेकरार दिल को अब और ना तड़पाओ,अब नहीं सहा जाता, बस…

  • टूटने वाली थी | Tootne Wali Thi

    टूटने वाली थी ( Tootne Wali Thi ) टूटने वाली थी पर टूटने नहीं दिया ख़ुद को, नाह इस दिल को! और ना ख़ुद को। संभाला कर रखा इस दिल को सबसे बचा कर अपने जज़्बातो को। समेटती रही उन यादों को कभी नाह वापस आने वाले उन लम्हों को। टूटने वाली थी पर टूटने…

  • जीवन और मृत्यु | Jeevan aur Mrityu

    ….जीवन और मृत्यु…. ( Jeevan aur mrityu )    जन्म और मृत्यु के मध्य ही तो संसार है यह उक्ति ही सर्वथा निराधार है वर्तमान तो अतीत के प्रारब्ध का सार है इसमें का कर्म ही भविष्य का द्वार है… लिप्त हो जाना ही लुप्त हो जाना है मोह मे फंसना ही उलझ जाना है…

  • सोने को कुंदन बनाना बाकी है | Baki hai

    सोने को कुंदन बनाना बाकी है ( Sone ko kundan banana baki hai )     दिलों में अभी जगह बनाना बाकी है। भाग्य हमको भी आजमाना बाकी है। सुदर्शन शब्द स्वर्णिम हो तेरे भले ही। तपा सोने को कुंदन बनाना बाकी है। अभी तो रिश्तो को निभाना बाकी है। दिलों में प्यारे फूल खिलाना बाकी…

  • रामजी के गाँव रे | Ram ji Ke Gaon

    रामजी के गाँव रे ( Ram ji ke gaon re )    चला चली धनिया ई माटी कै नाव रे, होई जाई बेड़ा पार रामजी के गाँव रे। फल,फूल,मेवा,नरियल,उहाँ हम चढ़ाईब, सरयू नदी में दूनों डुबकी लगाईब। जनम -जनम से उनसे आपन लगाव रे, होई जाई बेड़ा पार रामजी के गाँव रे। चला चली धनिया…

  • Shiksha Kavita | Shiksha Par Kavita | Poem On Shiksha -शिक्षा

    शिक्षा ( Shiksha )   जगत में शिक्षा है आधार। शिक्षा बिना धुंध सा जीवन शिक्षा मुक्ती द्वार।। जगत में० ।। अनपढ़ मूढ़ निरक्षर क्या -क्या शव्द बुलाये जाते, इन  लोगों  से  भेड़  बकरियां  पशु चरवाये जाते, पढ़ें – लिखे मुट्ठी भर लोग तब करते अत्याचार।। जगतमें० ।। शिक्षा बिना न मिले नौकरी दर-दर ठोकर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *