khabar Shayari

बस हमें ख़बर नहीं | khabar Shayari

बस हमें ख़बर नहीं

( Bas hamen khabar nahin ) 

 

देख पाये जो उसे ,ऐसी हर नज़र नहीं
हर जगह है वो ख़ुदा ,बस हमें ख़बर नहीं

सब मरेंगे एक दिन ,बात है ये लाज़मी
कोई इस जहान में, दोस्तो अमर नहीं

दिल मिला है गर तुझे ,तो मिलेगा दर्द भी
दर्द से तो बेख़बर कोई भी जिगर नहीं

तेरे ग़म को देखकर ,रोऊँ किस तरह न मैं
मोम सा है दिल मेरा ,ये कोई हजर नहीं

उम्र भर रही है बस ,धूप हमसफ़र मेरी
मेरी राह में कोई,दूर तक शजर नहीं

देर से सही मगर ,ख़्वाब पूरे तो हुए
दिल को है सुकून ये ,रायगाँ सफ़र नहीं

अपनी कमतरी पे तू ,इस कदर न रंज़ कर
जिसमें कुछ कमी न हो ,कोई भी बशर नहीं

कह रही तेरी नज़र ,तुझको प्यार मुझसे है
देखता हो क्यों इधर ,प्यार कुछ अगर नहीं

कोई चाहे कुछ कहे ,अपना है मिज़ाज ये
ख़र्च करते हैं बहुत,सोचते मगर नहीं

भीड़ से अलग चला ,रास्ता नया चुना
सबकी है जो रहगुज़र,मेरी वो डगर नहीं

चंद लफ़्ज़ों में जिसे,कर सकूँ बयान मैं
दास्तां ‘अहद’ मेरी इतनी मुख़्तसर नहीं

 

शायर: :– अमित ‘अहद’
गाँव+पोस्ट-मुजफ़्फ़राबाद
जिला-सहारनपुर ( उत्तर प्रदेश )
पिन कोड़-247129
यह भी पढ़ें :

https://thesahitya.com/kam-log-hain-aise/

Similar Posts

  • हमें आपसे | Ghazal Hame Aapse

    हमें आपसे  ( Hame Aapse ) हमें आपसे अब शिक़ायत नही है । मगर अब किसी से मुहब्बत नही है ।।१ झुके सिर हमारा किसी नाज़नी पे । अभी इस जहाँ में वो सूरत नहीं है ।।२ जिसे चाहने में भुलाया खुदी को । वही आज कहता हकीकत नही है ।।३ कसम आज अपनी उसे…

  • क्या कहने | Kya Kahne

    क्या कहने इक तो जुल्फें दराज़, क्या कहनेउसपे बाहें ग़ुदाज़, क्या कहने मुँह को तेड़ा किये यूँ बैठे हैंहुस्न और उसपे नाज़, क्या कहने अहले-दुनिया को ताक पर रख करएक उसका लिहाज़, क्या कहने जब भी गाऐ तो अंदलीब लगेउस पे परवाज़-ए-बाज़, क्या कहने गुफ़्तुगू भी पहेलियों जैसीऔर आँखों में राज़, क्या कहने कल तलक…

  • बेवफ़ा ही सब मिले है | Bewafa hi Sab Mile Hai

    बेवफ़ा ही सब मिले है ( Bewafa hi sab mile hai )    है गिला उस दोस्ती से ? दिल भरा नाराज़गी से वो नज़र आया नहीं है आज गुज़रा उस गली से छोड़ दें नाराज़गी सब तू गले लग जा ख़ुशी से ये वफ़ा देती नहीं है मोड़ लें मुंह आशिक़ी से गुल उसे…

  • कोई अब अरमान नहीं है | Arman Shayari

    कोई अब अरमान नहीं है ( Koi ab arman nahin hai )    प्यार की पहचान नहीं है कोई अब इंसान नहीं है इस जगत में कौन है ऐसा जो यहाँ मेहमान नहीं है हर कोई मायूस लगे अब चेहरों पर मुस्कान नहीं है बाप की बातें न ले दिल पर ये तेरा अपमान नहीं…

  • कर दे जो दूर ग़म

    कर दे जो दूर ग़म कर दे जो दूर ग़म को किसी में हुनर नहींयारब क्या ग़म की रात की होगी सहर नहीं तड़पे जिगर है मेरा ये उनको ख़बर नहींये आग इश्क़ की लगी शायद उधर नहीं घर से निकलना आज तो मुश्किल सा हो गयामहफ़ूज नफ़रतों से कोई रहगुज़र नहीं चलती है चाल…

  • खुमार सावन का | Ghazal Khumaar Sawan ka

    खुमार सावन का ( Khumaar Sawan ka ) बीता मौसम हज़ार सावन का आप बिन क्या शुमार सावन का बात बनती नज़र नही आती है अधूरा जो प्यार सावन का इक नज़र देख लूँ अगर तुमको । तब ही आये करार सावन का वो न आयेगा पास में मेरे क्यों करूँ इंतज़ार सावन का आप…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *