मेजर ध्यानचंद | Major Dhyanchand

मेजर ध्यानचंद

( Major Dhyanchand ) 

 

राष्ट्रीय खेल दिवस (मेजर ध्यानचंद जयंती)

( 2 )

हॉकी भी कायल हुई, जादू भरी अदाओं पर

अलौकिक विलक्षण प्रतिभा ,
जीवन वृत्त हॉकी परिभाषा ।
हर गोल विजयी भव पर्याय,
अंतर कीर्तिमानी अभिलाषा ।
तीन बार ओलंपिक स्वर्ण पदक ,
जग नतमस्तक हिंद फिजाओं पर ।
हॉकी भी कायल हुई,जादू भरी अदाओं पर ।।

हिटलर हो या ब्रैडमैन,
दर्श खेल गुत्थी अनंत नमन ।
सदा शीर्ष राष्ट्र स्वाभिमान,
शोभित सुरभित भारती चमन ।
चार सौ से अधिक अनूप गोल ,
स्वर्णिम रंग इतिहास अल्पनाओं पर।
हॉकी भी कायल हुई,जादू भरी अदाओं पर ।।

अप्रतिम अद्भुत खेल आभा,
प्रतिद्वंदी सदैव अचंभित ।
लोभ प्रलोभन बिंदु दूर ,
प्रथम देश धरा मान मंडित ।
अवतरण राष्ट्रीय खेल दिवस ,
प्रेरणा ज्योत जन भावनाओं पर ।
हॉकी भी कायल हुई,जादू भरी अदाओं पर ।।

राष्ट्र हृदय पुलकित प्रफुल्लित,
स्मृत कर अनुपम खेल चातुर्य ।
विपक्षी टीम पर चढ़ता रहा,
बुलंद प्रतिभा ओज आतुर्य ।
धन्य धन्य परम हॉकी विजार्ड,
सदा गर्वित छटा तिरंगी कलाओं पर।
हॉकी भी कायल हुई, जादू भरी अदाओं पर ।।

( 1 ) 

हॉकी की अठखेलियों में,जादू का परम अहसास

अलौकिक विलक्षण प्रतिभा ,
जीवन वृत्त हॉकी परिभाषा ।
गोल करो विजयी बनो,
अंतर्मन सदैव भव्य अभिलाषा ।
तीन बार ओलंपिक स्वर्ण पदक ,
जग अभिवंदित हिंद उजास ।
हॉकी की अठखेलियों में, जादू का परम अहसास ।।

हिटलर हो या ब्रैडमैन,
खेल गुत्थी को नमन किया ।
शीर्ष रख हिंद स्वाभिमान,
सुरभित राष्ट्र चमन किया ।
चार सौ से अधिक गोल कर,
रचा प्रेरक स्वर्णिम इतिहास ।
हॉकी की अठखेलियों में, जादू का परम अहसास ।।

अप्रतिम अद्भुत खेल आभा,
प्रतिद्वंदी सदा अचंभित ।
लोभ प्रलोभन नित दूर ,
देश धरा मान अभिनंदित ।
अवतरण राष्ट्रीय खेल दिवस ,
रज रज उद्वेलित उमंग उल्लास
हॉकी की अठखेलियों में, जादू का परम अहसास ।।

हिंद हृदय नित पुलकित,
स्मृत कर खेल चातुर्य ।
विपक्षी टीम सदा चढ़ा,
आपकी प्रतिभा का आतुर्य ।
धन्य धन्य हॉकी विजार्ड,
आपसे तिरंगी पहचान खास ।
हॉकी की अठखेलियों में, जादू का परम अहसास ।।

 

महेन्द्र कुमार

यह भी पढ़ें :-

सावन परम सोमवार | Sawan Param Somvar

Similar Posts

  • मानव का उसूल | Kavita manav ka usul

    मानव का उसूल ( Manava ka usul )     चकाचौंध में खो गया नर धन के पीछे भाग रहा आज आदमी नित्य निरंतर व्यस्त होकर जाग रहा   झूठ कपट सीनाजोरी कालाबाजारी रिश्वतखोरी मानव का उसूल कैसा झूठे वादे बस बातें कोरी   प्रलोभन मोह माया के जाल पर जाल फेंक रहा नीली छतरी…

  • Kavita | नाम नही

    नाम नही ( Naam Nahi )   संघर्षो  के  रूग्ण धरातल, पे अब उनका नाम नही। जाने कितने कटे मरे पर, कही भी उनका नाम नही।   ये आजादी चरखे के, चलने से हमको नही मिली, लाखों ने कुर्बानी दी पर, कही भी उनका नाम नही।   बूंद बूंद मिलती है तब ये, सागर विस्तृत…

  • प्रत्येक प्राणि बुद्ध हो

    प्रत्येक प्राणि बुद्ध हो जग भले विरुद्ध हो,राह भी अवरुद्ध हो ।सत्य पथ न छोड़िएहृदय सदैव शुद्ध हो ।। मूढ़ या प्रबुद्ध हो ,मन कभी न क्रुद्ध हो ।अप्प दीपो भव गहें ,भावना विशुद्ध हो ।। न हर्ष हो न क्षुब्ध हो,न‌ द्वेष हो न युद्ध हो।कामना हमारी है,प्रत्येक प्राणि बुद्ध हो ।। रचनाकार…अजय जायसवाल…

  • निवेदन | Kavita Nivedan

    निवेदन ( Nivedan ) निवेदन है धरा से मत हो वीराना , अरदास है ईश से भूलें न कृपाना, आह्वान है आकाश सै रंग नीलिमा न बदलना, गुजारिश है बादलों से वर्षा अमृत न भूलना, आरजू है आदमी से आदिमकाल न जाना। शेखर कुमार श्रीवास्तव दरभंगा( बिहार) यह भी पढ़ें :- छोटी चीजें | Kavita…

  • चांदनी | Chandni

    चांदनी ( Chandni )    पूनम के चांद से सब कतराने लगे अमावस की चांदनी मे नहाने लगे जलने लगी है अब उन्हे सूरज की धूप हैलोजन की फ्लैश मे ही नचाने लगे रंगीन बालों मे ही दिखती है जवानी बूढ़े भी अब तो सिर मे विग लगाने लगे युवतियों के कपड़े उतारने लगे तन…

  • पुड़िया का नशा | Kavita pudiya ka nasha

    पुड़िया का नशा ( Pudiya ka nasha )   पुड़िया खा मुंह भरे गुटखा का रसपान सड़क दीवारें हो गई अब तो पिक दान   दंत सारे सड़ने लगे उपजे कई विकार दिनभर खर्चा ये करे रसिक पुड़ियादार   मुंह तो खुलता नहीं आदत पड़ी बेकार समझाए समझे नहीं छोड़ो नशा अब यार   फैशन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *