मन जीता,जग जीता

मन जीता जग जीता | Man Jeeta

मन जीता,जग जीता

( Man jeeta jag jeeta ) 

 

मन की मुराद होत न पूरी
अनन्त का है सागर,
एक बाद एक की चाहत
होता रहता उजागर।

चंचल मन चलायमान
सदैव चितवत चहुंओर,
चाहत ऐसे सुवर्ण सपनें
जिसका न है ओर।

मन के वश में हो मानव
इधर-उधर धावत है,
सुख त्याग,क्लेश संजोए,
समय भी गंवावत है।

हर्ष-विषाद, क्लेश-द्वेष है
सबही का मन मूल,
प्रवृत्ति ढले जैसे मूल की
वैसा खिलता फूल।

जो मन जीता,वो जग जीता
बुद्धत्व को है पाया,
ज्ञानपुंज की छटा बिखेरत
सबका मन हर्षाया।।

 

लेखक: त्रिवेणी कुशवाहा “त्रिवेणी”
खड्डा – कुशीनगर

यह भी पढ़ें :

https://thesahitya.com/vijay-sankalp-kavita/

Similar Posts

  • सिवा अंबेडकर के | Siva Ambedkar Ke

    सिवा अंबेडकर के ( Siva Ambedkar Ke )   कारवाॅं कोई नहीं है , रास्ता कोई नहीं, अब सिवा अंबेडकर के रहनुमा कोई नहीं। छाॅंव में बाबा ने लाकर तब बिठाया था हमें, धूप से बचने का जब था आसरा कोई नहीं। दासता की दास्ताॅं पढ़ते तो तुम भी जानते, दर्द में डूबी हुई ऐसी,…

  • हत्यारी ठण्ड | Hatyari Thand

    हत्यारी ठण्ड ( Hatyari thand )   दिसम्बर की वो सबसे अधिक, सर्द ओर कोहरे भरी रात थी हर चेहरे के मध्य , सन्नाटा था स्टेशन पर, कोहरे ओर सन्नाटे के मध्य, उस काली मोटी भिखारन ने, खाली चाय के खोखे में, चिथड़े को बिछाया, गठरी बने बच्चे को लिटाया, कुछ ही घण्टो में, शीतलहर…

  • देखते देखते सब बदल जाएगा | Dekhte Dekhte

    देखते देखते सब बदल जाएगा  ( Dekhte dekhte sab badal jayega )    आज का हर समय कल कहलाएगा देखते देखते सब बदल जाएगा। कभी वक्त तो कभी हालात जिंदगी में ना फिर ये कल आयेगा। ना तू डर हो निडर चल कदम दो कदम ले तजुर्बा सभी से ना ये पल आएगा। जीवन डगर…

  • आओ रोएँ

    आओ रोएँ ०जिसको खोया उसे याद कर बिलखें कलपें नयन भिगोएँआओ रोएँ०जो न खो गए उनको भूलेंखुशी दफ़्न कर, मातम वर लेंनंदन वन की जमीं बेचकरझट मसान में बसने घर लेंसुख-सपनों में आग लगाकरदुख-दर्दों के बीजे बोएँआओ रोएँ०पक्ष-विपक्ष नयन बन जाएँभूले से मत हाथ बँटाएँसाथ न चलकर टाँग अड़ाएँफूटी आँख न साथी भाएँनहीं चैन से…

  • सफ़र-ए-हमरंग | Safar-e-Hamrang

    सफ़र-ए-हमरंग ( Safar-e-Hamrang )   नए साल मे प्लानिंग कर कुछ ऐसा हम कर जाएं, लक्ष्य पाने की दिशा में आगे हम सब बढ़ते जाएं। अपनी कमियों को बाहर कर अच्छाईयां अपनाएं, जुड़ें जोड़ें साहित्य से हम सब संकल्प ये उठाएं।। ईमानदारी से कोशिशकर यह रचना हम रच जाएं, अपने आप से नए वर्ष का…

  • जीवन सूना तुम्हारे बिना | Kavita Tumhare Bina

    जीवन सूना तुम्हारे बिना ( Jeevan suna tumhare bina )    एक तुम ही थें हमारे प्रितम वें प्यारे, कभी चाॅंद तारों जैसा प्रेम ‌था हमारे। आज जीवन सूना लगें तुम्हारे‌ बिना, आखिर क्यों किया तुने मुझें किनारे।। मुझको थोड़ा समझाया ज़रुर होता, गलती क्या थी‌ हमारी बताया होता। दूर रहकर तुमसे हमें बहुत अखरता,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *