Man Mandir Mein

मन मंदिर में दीप ज्योति जलाता रहा | Man Mandir Mein

मन मंदिर में दीप ज्योति जलाता रहा

( Man mandir mein deep jyoti jalta raha )

 

हवन करते हाथ खुद का जलाता रहा।
घाटे का लेकर सौदा मैं मुस्कुराता रहा।

ठगती रही मुझे दुनिया मैं ठगाता रहा।
प्यार के मोती लेकर मैं यूं लुटाता रहा।

सद्भावों की गंगा मै नित बहाता रहा।
तूफानों भरी डगर कदम बढ़ाता रहा।

हौसलों से व्योम परचम लहराता रहा।
ख्वाब सुरीले से मन में सजाता रहा।

रूठ गए अपने सारे सदा मनाता रहा।
मन मंदिर में दीप ज्योति जलाता रहा।

आजा मनमीत मैं तुझको बुलाता रहा।
शब्दों का सुमन हार सदा सजाता रहा।

गीत कोई प्रेम भरा मैं गुनगुनाता रहा।
मुड़कर दे आवाज मुझको आता रहा।

खिले चमन में खुशबू महकाता रहा।
प्रीत की डगर पे चलकर जाता रहा।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

कासे कहूँ मैं बात अपने जिया की | Kaise Kahoon

Similar Posts

  • राधेश विकास की कविताएँ | Radhesh Vikas Poetry

    खेल चलो एक खेल मिलकर खेलते हैं। जिसमें प्रतिद्वन्दी कोई नहीं होगा, न किसी को ललकारना ही है। न किसी की मर्यादा रखनी है, क्यों कि मर्यादा है ही नहीं फिर ताख पर भी रखने की जरूरत क्या? ये लोगबाग बिलावजह चिल्ल पों कर रहे है, अब इनको कौन बताये कि हमारे पाजामे में खुद…

  • तुमने बात न मेरी मानी | Tumne

    तुमने बात न मेरी मानी ( Tumne baat na meri mani )    तुमने बात न मेरी मानी। पहुंच नहीं पाई क्या तुम तक, मेरी करुणापूर्ण कहानी? तुमने बात न मेरी मानी। मैंने प्रेम किया था तुमसे, एक आस अन्तर ले अपने। पर तुमने ठुकराया जी भर, सत्य हुये कब, मेरे सपने। नहीं तु़म्हें शीतल…

  • संत गुरु घासीदास | Sant Guru Ghasidas

    संत गुरु घासीदास छोटे-बड़े का भेद मिटाकर,सबको एक समान बनाए।संत गुरु घासीदास का संदेश,जो जग को राह दिखाए।दूसरे का धन पत्थर समझो,परस्त्री को माता मानो।सत्य की डगर पर चलकर,जीवन को उजियारा जानो। जुआ-शराब के मोह को छोड़ो,ये दुख का कारण है।पाप की राह जो चुने,वो केवल संकट का दर्पण है।संत की वाणी अपनाकर, सत्य की…

  • अन्नदाता की पुकार

    अन्नदाता की पुकार ******** हम अन्नदाता है साहब चलते हैं सदा सत्य की राह पर  करते है कड़ी  मेहनत चाहे कड़ी धूप य हो बारिश घनघोर कोहरा या हो कड़ाके की सर्दी दिन हो या काली रात खेतों में लगाता हूं रात भर पानी तब कहीं जाकर उगाता हूं अन्न सोता नहीं चैन की नींद…

  • वक्त के साथ | Waqt ke Sath

    वक्त के साथ ( Waqt ke sath )   अजीब सा चला है दौर आज का लोग तो पहले गम भी बांट लेते थे अब तो खुशियों मे भी शरीक होने का वक्त रहा नहीं बदल गया आशीष भी शुभ कामना का बदल गया सुबह शाम का सम्मान भी आया दौर गुड मॉर्निंग, गुड नाईट…

  • मुंशी प्रेमचंद | Munshi Premchand par Kavita

    मुंशी प्रेमचंद! ( Munshi Premchand )  !! शत -शत नमन !! ( 1) मुंशी प्रेमचंद को कभी न भुलाया जाएगा उन्हें पाठ्यक्रम में हमेशा पढ़ाया जाएगा। सन अट्ठारह सौ अस्सी,लमहीं में जन्में थे सज़दा उस भूमि का हमेशा किया जाएगा। त्याग,तेज और लेखनी के थे वो बहुत धनी उनके संकल्पों को सदा दोहराया जाएगा। आजादी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *