Bharat Desh par Kavita

मेरा वतन है जग से न्यारा

मेरा वतन है जग से न्यारा

मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।।

गंगा, पर्वत झरने, उपवन,
हर लेते ये बरबस ही मन,
राजा हो या फिर वनवासी,
अलग अलग है भाषा भाषी,
सूरज चाँद सितारे मिलकर,
होने देते कभी भी तम नहीं।।

मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।।

शान न कम कभी होने पाए
आन पर इसकी वारी जाए,
दुश्मन गर जो आँख दिखाये,
खैर न उसकी फिर होने पाये,
मिट जाए ये जिस्म औ जान ,
पर ज़रा भी हमको गम नही ।।

मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।।

इस माटी पर जन्म लिया,
इसकी ख़ातिर मिट जायेंगे,
देकर प्राणों की आहुति हम,
तेरा नाम अमर कर जायेंगे,
तुम से बढ़कर तुम से प्यारा,
अपना दिलबर सनम नहीं ।

मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।।

भारत तेरी रक्षा की खातिर
जिन वीरो ने जान जान गंवाई,
लहू बहाकर अपना तुम पर,
अपने वतन की लाज बचाई,
गर्व है हमको उन वीरो पर,
उन सा किसी में है दम नही।।

मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।।

डी के निवातिया

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

इच्छाओं का मर जाना | Ichchaon ka Mar Jana

 

Similar Posts

  • सिंदूर

    सिंदूर   वक्त की चकाचौंधी इतनी भी मंजूर न कर। तेरा सिंदूर हूं तूं सर मुझे दूर न कर।।   दीखता चुटकियों में हूं मगर विशाल हूं मै, हर एक रंग समेटे हुये पर लाल हूं मै।, तेरा श्रृंगार हूं तूं कांच जैसे चूर न कर।।तेरा सिंदूर ०   नीले गगन मे सूर्य की चमक…

  • प्रेयसी | Preyasi

    प्रेयसी ( Preyasi )    सृष्टि में  संचरित अथकित चल रही है। प्रेयसी ही ज्योति बन कर जल रही है।।   कपकपी सी तन बदन में कर गयी क्या, अरुणिमा से उषा जैसे डर गयी क्या, मेरे अंतस्थल अचल में पल रही है।। प्रेयसी०   वह बसंती पवन सिहरन मृदु चुभन सी, अलक लटकन नयन…

  • झरती बुंँदियों संग आखरों की जुगलबंदी

    झरती बुंँदियों संग आखरों की जुगलबंदी…   सावनी सहर का आलम गर्म चाय की प्याली और हम पसंदीदा पुस्तक का साथ नर्म – नम बूंँदों की तुकबंदी ऐसी बंदिश इस उजास में रच देती है सबसे सुहाने पल। आंँगन बुहारती बूँदें आनंद वर्षा में भिगो भावों की तपिश को शीतल कर देती है कि नई…

  • शिक्षक दिवस पर | Teachers Day Poem in Hindi

    शिक्षक ( Shikshak )    भटके हुए राही को मंजिल का रास्ता दिखाया उन्होंने, रोको न कदम बस बढ़ते रहो ये  सिखाया उन्होंने। अपनी ज्ञान की ज्योति से एक सभ्यता को वह बो‌ कर चले, कलम की धार से समाज के‌ प्रतिबिंब को पिरो कर चले, गलतियों को सुधार गलत को पनपने से बचाया उन्होंने,…

  • साथ चलो | Kavita saath chalo

    साथ चलो ( Saath chalo )   हर हर हर हर महादेव के, नारे के संग साथ चलो। गंगा के गोमुख से लेकर, गंगा सागर तक साथ चलो।   काशी मथुरा और अयोध्या, तक निनाद का जाप करो। जबतक भारत पूर्ण समागम,ना हो तब तक साथ चलो।   काश्मीर अपनी है पर, गिलगित और गारों…

  • शिकायत Shikayat

    शिकायत ( Shikayat ) तूने नज़रें फेरीं, मगर तू मेरी रूह में बसी रह गई,तेरे बिना ये अधूरापन, जैसे कोई दास्तां अधूरी रह गई।तेरे बिना भी ये दिल तुझसे ही जुड़ा रहता है,शिकायतें हैं तुझसे, पर प्यार फिर भी हदों से परे करता है। तेरी खामोशियों में छिपी हैं अनगिनत बातें,तेरे ख्यालों से अब भी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *