सफलता हेतु हंसना जरूरी है
सफलता हेतु हंसना जरूरी है

सफलता हेतु हंसना जरूरी है

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कठिन परिश्रम से तू ना मुंह मोड़,
हंसना भी न छोड़ तू बंदे, हंसना भी ना छोड़।
मेहनत करो जी तोड़,बंद राहों को खोल,
नफा नुकसान न तोल।
टेढ़े-मेढ़े रास्तों को छोड-
सीधी सच्ची राह तू पकड़,
छोड़ दें अपनी सारी तू अकड़;
मंजिल पर हो केवल तेरी नज़र।
बिना मंजिल तक पहुंचे प्रयास न छोड़,
रास्ते की बाधाओं से तू हाथ जोड़।
हंसना न छोड़ हंसना न छोड़!
आएंगी राहों में बाधाएं,
घेरेंगी तुझको घनघोर घटाएं।
विचलित न होना,चिंतित न होना,
बरस कर उसे है छूटना ।
तू इन अवरोधों के आगे-
कभी घुटने न टेकना;
न कभी तू झुकना ।
कुछ संगी साथी प्रिय संबंधी-
भी कर सकते हैं तुझसे तकरार,
राह में डाल सकते हैं रोड़े हजार।
शांत चित्त तू रहना,
मुंह से कभी कुछ उन्हें न कहना।
वक्त उनका करेगा हिसाब,
चेहरा खुद-ब-खुद हो जाएगा उनका बेनकाब।
धीरे धीरे हो जाएगा तेरा बेड़ा पार,
हंसना कभी न तू छोड़ना मेरे यार;
बिना मंजिल तक पहुंचे रूकना न दिलदार।
जब मंजिल पा जाओगे-
दुनिया नई दिखेगी,
नफ़रत करने वाले भी –
गुलदस्ता लिए खड़ी मिलेगी।
अपने व्यवहार पर वो शर्मिंदा होंगे
बेमन से ही सही-
तेरे जीत का जश्न मना रहे होंगे।
मन ही मन तू भी मुस्कुराना,
सपने में भी कभी उनका दिल ना दुखाना;
सदा सर्वदा तू हंसना और मुस्कुराना।
जीत का यही फलसफा है,
विरोधियों की भी यही दवा है।

 

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नवाब मंजूर

लेखक– मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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