मेरी कविता के शब्द | Meri Kavita ke Shabd

मेरी कविता के शब्द

( Meri Kavita ke Shabd )

तुम्हारे शब्द निहार रहे हैं मुझे
और लज्जा से गढ़ी जाती हूं मैं

बंद करके भी देखा है मैंने किताब में खुद को
तुम्हारे शब्दों में फिर पढ़ी जाती हूं मैं

मेरे कंधों को छूते हुए गुजर रही थी तुम्हारे शब्दों की क्यारी
पलकें झुका ली हमने कि रुक ना जाए कहीं सांसें हमारी

तेरे शब्दों को अनेकों बार पढ़ लूं तो संवार लूंगी खुद को
विरामों से भरी पंक्तियों को गढ़ लूं तो निखार लूंगी खुद को

तेरे शब्दों के सागर में तैरती हूं मीन बनकर मैं सुनहरी
तेरे शब्दों से मचल उठती हूं तेरे शब्दों में हूं ठहरी

तेरे शब्दों के कोष को अंतस में संभाल रही हूं मैं
तेरा एक एक शब्द अपने ज़हन में उतार रही हूं मैं

तेरे शब्दों में तेरे भावों का मेल रोज़ देखती हूं मैं
भावों का कागज़ पर उतरने का खेल रोज़ देखती हूं मैं

तेरे शब्दों में मिलते हैं, तेरी मुस्कान, तेरे आंसू, तेरी बेबसी, तेरी आहें
तेरे शब्दों को लय मिल है तो तरन्नुम को मिल जाती हैं नई राहें

तेरे शब्दों से तेरे भावों की सरिता बन जाती हूं मैं
तेरे हर शब्द से मिलकर तेरी कविता बन जाती हूं मैं

शिखा खुराना

शिखा खुराना

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