Poem in Hindi on Lekhni | लेखनी

लेखनी

( Lekhni ) 

 

जाती ही नही लेखनी कल्पना के लोक मे
कैसे करूं श्रृंगार,समय के इस वियोग मे

खमोशभाईं बच्चे,बेटियां भी हैं सहमी हुई
अधरों पर आए हंसी कैसे,अपनों के शोक मे

सुना था की ,देश को मिल गई है आजादी
पर,हुए हैं आज़ाद कौन इस मुल्क में

सिसक रही झोपड़ी,आज भी महलों के नीचे
अनाथ मांग रहे भीख, ले कटोरा हाथ में

वस्त्र नही ढकने को, कोई फाड़ पहन रहा
नग्न सी हो रही नारियां,आज अपने देश में

मिट न जात पात,गरीबी अमीरी का द्वंद्व है
छल कपट मचे शोर मे,केवल रोष ही रोष है

अन्याय,अनाचार मे भी ,अदालतें बंद हैं
गाउं मैं गजल गीत कैसे,इस हालते दौर में

कलम को हो सुकून कैसे, इस समाज में
कैसे करूं श्रृंगार अब,समय के वियोग में

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

मन की दीवार | Man ki Deewar

Similar Posts

  • वादा | Kavita Vaada

    वादा ( Vaada )    प्रेमी का प्रेमिका से वादा हाथ छोड़ ना जाने का भक्त का भगवान से वादा भक्ति में डूब जाने का पति का पत्नी से वादा संकट में साथ निभाने का एक मां का बेटे से वादा संस्कारवान बनाने का एक बेटी का मां से वादा घर दूजा रोशन करने का…

  • सूरज है आदर्श हमारा | Suraj par kavita

    सूरज है आदर्श हमारा ( Suraj hai adarsh hamara : Poem on sun in Hindi )   सूरज है आदर्श हमारा, हर घर में उजाला भर देता। रोशन करता है कण-कण को, तम की छाया हर लेता।।   सूरज की उजली भोर उजाला, भू पर जब फैलाती है। पंछी करते शोर चमन की, कली कली…

  • वार्षिकोत्सव की पावन बेला पर | Varshik Utsav

    वार्षिकोत्सव की पावन बेला पर ( Varshik utsav ki pawan bela par )    वार्षिकोत्सव की पावन बैला पर देते आपको बधाई, साहित्यिक गतिविधियों में अद्वितीय सेवाऍं निभाई। छोटे-बड़े और नऐ कलमकारों का इसने दिल जीता, काव्य काॅर्नर फाउंडेशन की इस दिन ही नींव लगाई।। सफ़र संघर्षों का शुरु किया आपने पाॅंच साल पहले, धीरे-धीरे…

  • नवदुर्गा पर कविता | Maa Durga Kavita

    नवदुर्गा पर कविता ( Navdurga par kavita )   मां मुझको तू शक्ति दे दे जीवन के तू दुख हर ले जुड़ा रहे तुझसे यह नाता इतनी मेरी बिनती सुन ले मांगू मैं ना तुझसे कुछ मैं चरणों में शरणागत कर ले दीया जनम जो तूने मुझको दूजो की सेवा का वर दे तुझे चढ़ाऊं…

  • साथ

    साथ * कहते हैं वो हम साथ हैं साथ हैं ? तो कहने की क्या बात है? साथ! एक एहसास है। जो न आपके न मेरे पास है! फिर कहिए कौन किसके साथ है? एहसास ही जज़्बात है जहां जज़्बात है वहीं साथ हैं बाकी सब बात है। और , बात की क्या औकात है?…

  • प्रगति का रस्ता | Pragati ka Rasta

    प्रगति का रस्ता ( Pragati ka rasta )    मैं कभी नहीं मुड़ूंगा पीछे हमेशा चलता रहूंगा अपने पथ पर बिना किसी परवाह किए मैं अपने सभी गम को भुलाते हुए भूख प्यास को भुलाते हुए तन पर फटे कपड़े सजाते हुए आगे बढूंगा और मैं इस दुनिया में अपना नाम रोशन करूगा जब मैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *