मुझे अपने काबिल बना ज़िन्दगी

मुझे अपने काबिल बना ज़िन्दगी

मुझे अपने काबिल बना ज़िन्दगी

मुझे अपने काबिल बना ज़िन्दगी
नहीं ऐसे ठोकर लगा ज़िन्दगी

हमें भी तो जीना सिखा ज़िन्दगी
नई राह कोई दिखा ज़िन्दगी

किसी रोज़ उनसे मिला ज़िन्दगी
पता उनका मुझको दिला ज़िन्दगी

बने बुत हैं बैठे मेरे ईश तो
उन्हें हाल मेरा सुना ज़िन्दगी

मिली ही नही है जिसे छाँव कल
उसे धूप से मत डरा ज़िन्दगी

चले आ रहे हैं सभी स्वार्थ बस
मेरा इनसे दामन बचा ज़िन्दगी

कभी तो कोई बनके अपना मिले
मुझे भी उन्हीं से मिला ज़िन्दगी

तरसता रहा जिस खुशी के लिए
खुशी वो प्रखर को दिला ज़िन्दगी

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • मस्तियों में जी मैंने

    मस्तियों में जी मैंने शराबे – शौक़ निगाहों से उसकी पी मैंनेतमाम उम्र बड़ी मस्तियों में जी मैंने हज़ारों किस्म की चीज़ों से घर सजाया थातुम्हारे शौक़ में रख्खी नहीं कमी मैंने जुनून ऐसा चढ़ा था किसी को पाने कालगाई दाँव पे हर बार ज़िन्दगी मैंने हज़ारों ग़म थे खड़े ज़िन्दगी की गलियों मेंहरेक मोड़…

  • क्या कहूँ | Kya Kahoon

    क्या कहूँ क्या कहूँ दिल ने मुझे उल्फ़त में पागल कर दियाथोड़ा में पहले से था उसने मुकम्मल कर दिया अपनी आँखों का सनम तूने तो काजल कर दियाआँख से छूकर बदन को तूने संदल कर दिया शह्र में चर्चे बड़े मैला ये आँचल कर दियाक्या कहें दिल रूह को भी मेरी घायल कर दिया…

  • ज़िंदगी के वास्ते | Ghazal Zindagi ke Vaaste

    ज़िंदगी के वास्ते ( Zindagi ke Vaaste ) जब इजाज़त उसने मांगी रुख़सती के वास्ते। कह दिया हमने भी जा,उसकी ख़ुशी के वास्ते। तीरगी फिर भी न मिट पाई हमारे क़ल्ब की। फूंक डाला घर भी हमने रोशनी के वास्ते। आग को पानी करे है और पानी को धुआं। आदमी क्या-क्या करे है ज़िंदगी के…

  • ये नफ़रत की दुनिया

    ये नफ़रत की दुनिया संभालो तुम अपनी ये नफ़रत की दुनिया।बसानी है हम को मुह़ब्बत की दुनिया। लड़ाती है भाई से भाई को अकसर।अ़जब है तुम्हारी सियासत की दुनिया। नहीं चाहिए अब , नहीं चाहिए अब।ये दहशत की दुनिया ये वहशत की दुनिया। फंसी जब से नर्ग़े में यह बातिलों के।तमाशा बनी है सदाक़त की…

  • कृष्ण कन्हाई | Krishna Ghazal

    कृष्ण कन्हाई ( Krishna Kanhai )    किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई तिरी राधिका भी चली दौड़ी आई नहीं और कुछ देखने की तमन्ना तुम्हारी जो मूरत है मन में समाई हुई राधिका सी मैं भी बाबरी अब कथा भागवत माँ ने जब से सुनाई रहे भक्त तेरी शरण में सदा जो भंवर से…

  • मुहब्बत से भर गई | Muhabbat Shayari in Hindi

    मुहब्बत से भर गई ( Muhabbat se bhar gayi )    रंगीनिये -हयात के मंज़र से भर गई बस इक नज़र मिली थी कि दिल में उतर गई प्यासों की प्यास और बढ़ा कर गुज़र गई लेकर सरापा-हुस्न के साग़र जिधर गई उसकी निगाहे-नाज़ बड़ा काम कर गई खाली था दिल का जाम मुहब्बत से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *