मुझे दिवाली मनानी है

मुझे दिवाली मनानी है

आओ ना दिकु, ये दिवाली मुझे तेरे संग सजानी है,
तेरी हंसी की रोशनी से हर रात को जगमगानी है।

दीप जलें हैं चौखट पर, तेरे स्वागत की आस में,
अब बस तेरी महक को साँसों में समेट लानी है।

सजाई है रंगोली, जिसमें तेरी छवि उभर आई है,
तेरी यादों की खुशबू से दिल की धड़कन महकानी है।

फूलझड़ी के हर शोर में बस तेरा नाम पुकारूं,
तेरी आँखों में बसी ख्वाहिशों की दिवाली मनानी है।

ये जगमगाती दुनिया भी फीकी लगती है तुझ बिन,
आओ ना दिकु, मुझे मेरे ख्वाबों की हकीकत सजानी है।

तू साथ हो तो त्यौहार भी जैसे सांस लेने लगे,
तेरी आहट से इस रात को फिर से संवार लानी है।

आओ ना दिकु, ये दिवाली तेरे संग सजानी है,
तेरी हंसी की रौशनी से हर अंधेरे की कसक मिटानी है।

आओ ना दिकु, ये दिवाली मुझे तेरे संग सजानी है,
तेरी हंसी की रौशनी से हर रात को जगमगानी है।

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात

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