बड़े ख्वाब

बड़े ख्वाब | Bade Khwaab

बड़े ख्वाब

( Bade Khwaab )

अक्सर मैंने बड़े ही
ख्वाब देखे हैं,
परन्तु ,
बहुत से गुमनाम
देखे है,
ये भी देखा है,
कि कहाँ ईश्वर है,
कहाँ फ़कीर खाली है,
मैंने उन पदचिन्हों के
भी निशान देखे है।
किस तरफ रूख करूँ अपना,
चलने से पहले सैकड़ों सवाल
देखे है।
जवाब कहाँ से पाती,
कहीं कोई निशान नही उनका,
ये समझ आ गया
जिम्मेदारियों तले
सभी ख्वाब टूटते भी देखे है,
सच है—
कुछ ख्वाब – ख्वाब ही
रह जाते है,
और हम फिर
इस मुफलिसी दुनियां
में सिमटकर
रह जाते है।।

डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’

लेखिका एवं कवयित्री

बैतूल ( मप्र )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • कोई मुझसे रूठ रहा है | Kavita koi mujhse rooth raha hai

    कोई मुझसे रूठ रहा है ( Koi mujhse rooth raha hai )   कोई मुझसे रूठ रहा है वो प्रेम पुराना टूट रहा है। वक्त की कैसी आंधी आई कोई अपना छूट रहा है।   टांगे खींच रहे हैं मिलकर रिश्ता नाता टूट रहा है। सद्भावों की धारा में जहर नफरत का फूट रहा है।…

  • हुंकार भरो | kavita Hunkar Bharo

    हुंकार भरो ( Hunkar bharo )     तेल फुलेल क्रीम कंघी से, नकली  रूप  बनाओगे। या असली सौन्दर्य लहू का, आनन पे चमकाओगे।   रक्त शिराओ के वेगों को, रोक  नही  तुम पाओगे। क्राँन्ति युक्त भारत पुत्रों के,सामने गर तुम आओगे।   हम आर्यो के वंशज है जो, दुर्गम पथ पर चल कर भी।…

  • निष्पक्ष मतदान | Nishpaksh Matdan

    निष्पक्ष मतदान ( Nishpaksh matdan )   निर्भीक निष्पक्ष मतदान, सजग नागरिक पहचान अष्टादश वय पार हर नागरिक, अधिकृत अप्रतिम मत प्रयोग । निर्वहन अहम अनूप भूमिका, निर्मित लोकतंत्र सुखद जोग । राष्ट्र धर्म प्रतिज्ञा अनुपालन, उरस्थ चित्र समृद्ध हिंदुस्तान । निर्भीक निष्पक्ष मतदान, सजग नागरिक पहचान ।। देश सेवा तत्पर कर्तव्य निष्ठ , सुयोग्य…

  • मां महागौरी | Maa Mahagauri

    मां महागौरी ( Maa Mahagauri )    नवरात्रि की अष्टमी शुभ तिथि है आई, माता पूजन और हवन कर लो सब भाई। अष्टम दुर्गा के रूप में आती हैं महागौरी, वृष सवारी करती माता चार भुजाधारी। एक हाथ में त्रिशूल धरे दूजे डमरू बजाए, शान्त स्वभाव वाली माता वर मुद्रा दिखलाए। शिव प्रिया मां उमा…

  • शरद का चाँद

    शरद का चाँद ***** शरद का चाँद लिए दिखा आज अंबर, चांदनी में नहाया जग दिख रहा अतिसुंदर। जगमगा रहा जग सारा रौशनी में नहाकर, कभी छत तो कभी आंगन से- निहार रहा हूं नीलांबर। पछुए की छुअन से सिहरन सी हो रही है, देख चांदनी , चकोरी विभोर हो रही है। उमड़ रहा नयनों…

  • वोट देना जरा संभाल के | Vote Dena

    वोट देना जरा संभाल के ( Vote dena jara sambhal ke )    नए-नए नेता ले टोली, धवल वेश और मीठी बोली। उमड़ पड़ा हुजुम यहां, बंद तिजोरी नेताजी खोली। वादे मधुर बड़े कमाल के, बदल देंगे ढंग हाल के। नेता फिर भी सशक्त चुने, वोट देना जरा संभाल के। वोट देना जरा संभाल के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *