Muktak adhar

अधर | Muktak adhar

अधर

( Muktak adhar  )

( मात्रा भार 16-16 )

 

अधरों पर जब मुरली बाजे
मोर मुकुट पीतांबर साजे
राधा कृष्ण प्रेम दीवानी
घट घट वासी हृदय बिराजे

 

अधरों पर मुस्कान ले आती
कविता मंचों पर छा जाती
भाव भरी बहती गंगा है
साहित्य सरिता सबको भाती

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

वक्त की रफ्तार | Kavita waqt ki raftar

 

Similar Posts

  • ज़िन्दगी | Kavita Zindagi

    ज़िन्दगी ( Zindagi )   कभी शोला, कभी शबनम, कभी मधुर झनकार ज़िदगी। कभी है तन्हाई का गीत, न जाने कब आयेंगे मीत, मिलन जब होगा परम पुनीत, धन्य जब होंगे नयन अधीर, लगती है अभिसार जिंदगी। बगीचे में जो रोपे फूल, बने फिर आगे चल कर शूल, नहीं मिलता है कोई कूल, जिगर के…

  • जय महाराणा प्रताप | Kavita on Maharana Pratap

    जय महाराणा प्रताप ( Jai Maharana Pratap )   हल्दीघाटी युद्ध चरम पर था स्वयं अरि काल बने राणा नर मुंडो से सटी रणभूमि जिधर निकलते महाराणा   महाराणा के बिन बोले ही अरि दल में जा घुसता चेतक पराक्रमी सवार प्रतापी राणा ओजस्वी दमकता मस्तक   ना भूख लगे ना पांव थके मेवाड़ी वीरों…

  • स्वास्तिक | Swastika

    स्वास्तिक ( Swastika )    स्वास्तिक शुभता का परिचायक मृदु मृदुल अंतर श्रृंगार, सुख समृद्धि वैभव कामना । धर्म कर्म जीवन पर्याय , परम शीर्ष भाव आराधना । सुसंस्कार भव्य बीजारोपण, निज संस्कृति गुणगायक । स्वास्तिक शुभता का परिचायक ।। अभिवंदित पुरुषार्थ पथ, सौभाग्य दिव्य जागरण । विघ्न दुःख दर्द हरण, आनंदिता स्पर्शन आवरण ।…

  • चक्र सुदर्शन धारी | Poem chakra sudarshan dhari

    चक्र सुदर्शन धारी ( Chakra sudarshan dhari )   चक्र सुदर्शन धारी केशव लीला अपरंपार तेरी मंझधार में डूबी नैया आकर करना पार मेरी   मुरली मोहन माधव तेरी मधुर मनोहर शान है सकल चराचर के रखवाले जन करे गुणगान है   संकट मोचन मोहिनी मूरत मुरली अधर सुहानी कृष्ण कन्हैया दीनदयाला भजन करते सुरज्ञानी…

  • संकल्प | Sankalp Poem

    संकल्प ( Sankalp )   आज फिर पराजित हुआ हूं फिर से अपनी काबिलियत को पहचान नहीं पाया आज खुद की ही नजरों में गिरा हूं बन गया हूं अपना ही खलनायक आज फिर पराजित हुआ हूं सोचा था, मंजिल का सामना करेंगे, किंतु ,हिम्मत ही जवाब दे गई अफसोस हुआ है मुझे अपने आप…

  • शराबी की दुनिया | Sharabi

    शराबी की दुनिया ( Sharabi ki duniya )    शराबी की दुनिया अब बोतल में बंद है। मधुशाला डेरा बना बस दारू आनंद है। नदी नाले कीचड़ में कचरे में वो जाता है। झूम झूम शराबी राहों में शोर मचाता है। जमीं बिकती ईमान बिके बीवी तज जाती है। भाई बंधु कुटुंब कबीला प्रीत कहां…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *