Muskurao tum

माँ मुस्कुराओ तुम | Muskurao tum

माँ मुस्कुराओ तुम

( Maa Muskurao tum ) 

 

मुस्कुराओ तुम मुस्कुराने पर रोक नहीं है
हंसो नाचो झूमो गाओ तुम कोई टोंक नहीं है
बंदीसों में बंधने की मां तुम्हें जरूरत नहीं है
हर समय कहती हो मुझे कोई शौक नहीं हैl
सब पूछ पूछ कर किया अब पूछने की जरूरत नहीं
बहुत सहेजा हम सबको और सहेजने की जरूरत नहीं
उन्मुक्त उत्कंठ हो हंसो हमने आपकी हंसी सुनी ही नहीं
कमा रहा हूँ मैं अब आराम करो जो किया ही नही
जी लो जिंदगी जो हमारे कारण जी ही नहीं
मां हो आप मां से गलती का कोई सवाल ही नहीं
मां तुम हमेशा सही थी सही हो पूछने की जरूरत नहीं
ना बहा ये आंसू अनमोल है
कर्ज चुका पाऊं इतनी हिम्मत नहीं

 

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

वे भाग्यशाली हैं बड़े | Bhagyashali

 

Similar Posts

  • पाज़िटिव कविता! | Vyang

    पाज़िटिव कविता! ( Positive Kavita : Vyang )   कोरोना नहीं है कोरोना नहीं है रोना नहीं है रोना नहीं है आॅक्सीजन की कमी नहीं है फैक्ट्रियों में पड़ी हुई हैं बहुत सारी भरी हुई हैं टैंकरों से आ रही है हवाई जहाज भी ला रही है बेड की कमी नहीं है दवाएं भी हैं…

  • शख्सियत | Shakhsiyat

    शख्सियत ( Shakhsiyat )    बदल तो लेते हालात भी हम गर साथ भी तुम्हारा मिल गया होता झुका लेते हम तो जमाने को भी गर हाथों मे हाथ मिल गया होता गलियों से गुजरने मे चाहत थी तुम्हारी आज भी वो यादें दफन हैं सीने में गैरों पर उछलने के काबिल ही कहां यादों…

  • तिरंगा | Tiranga par Kavita

    तिरंगा! ( Tiranga )    आजादी की कोख से निकला तिरंगा, प्राणों से प्यारा है हमको तिरंगा। बीज आजादी का देखो ये बोया, हम सबकी आँखों का तारा तिरंगा। बलिदानियों का खून इसमें समाया, इंकलाबी राह भी सजाया तिरंगा। क्रांति और शांति का देता है संदेश, जवानी लुटाना सिखाया तिरंगा। जवान-किसान का सबका दुलारा, मर…

  • नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) चतुर्थ दिवस

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) चतुर्थ दिवस भुवाल माता तार दो तार दो हमको , माता तार दो ।राग – द्वेष का पर्दा हमारे नयनों के आगे छाया ।भव भ्रमण की ठोकरें खाकर भी हम सम्भल नहीं पाये ।भुवाल माता तार दो तार दो हमको , माता तार दो ।संसार में घूम घूम कर देखा…

  • नदी का किनारा

    नदी का किनारा बहती नदी संग मैं ठहरा सा बैठा,तेरी राहों में उम्मीदों को समेटा।लहरें भी अब तो कहने लगीं,दिकु, लौट आओ,इन्हीं दुआओं के धागों से हूँ मैं लिपटा। धूप-छाँव का ये खेल भी सुना सा है,तेरी हँसी के बिना हर रंग धुंधला सा है।पानी में देखूँ तो चेहरा तेरा उभरे,तेरी आहटों का हर साया…

  • तेरे पाठ और तेरे गीत | Kavita Tere Paath Aur Tere Geet

    तेरे पाठ और तेरे गीत पढ़ा रहे हो पाठ कोई, या सुना रहे हो कोई गीत, कुछ भी हो सुंदर हैं दोनों, तेरे पाठ और तेरे गीत, याद रखूंगी पाठ तुम्हारे, याद रखूंगी तेरे गीत, जीवन के लिए जरूरी दोनों, तेरे पाठ और तेरे गीत, सीख जरूरी जीवन में, संगीत जरूरी जीवन में, दोनों ही…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *