नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) सप्तम दिवस

नवरात्रि पर्व (चैत्र ) अष्टम दिवस

नवरात्रि पर्व (चैत्र ) अष्टम दिवस


सत्य समता के तटों से उन्मुक्त धारा बहे ।
भुवाल – माता को नमन हमारा ।
हम सबका सम्पूर्ण समर्पण हों ।
आन्तर ह्रदय विनय अनुनय हों ।
मलयाचल की मधुर हवाएं ।
जिधर निहारें दाएं बाएं ।
सांस- सांस सुरभित शोभित बन ।
जीवन का कण – कण मधुमय हो ।
कल्पवृक्ष यह कामदुधामा ।
यह नवरात्रि पर्व की आभा ।
पंछी चहक रहे खुशियों में ।
खुशियों के ये क्षण अक्षय हों ।
घोर आभा में यह उजियारा ।
पद – दलितों का प्रवर सहारा ।
तरल गरल पर धार सुधा की ,
विघ्न – विनायक मंगलमय हों ।
ह्रदय पुकारे , नयन पुकारे ।
जिन पर हमने तन – मन वारे ।
भुवाल माता का स्मरण करते ।
मन तन्मय बन जायें ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

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