नवरात्र

नवरात्र

नवरात्र

(नवरात्र पर विशेष )

 

 

भूलो मत अपना नाता ।

माता-पिता जिसे भुला दे बालक जग में चैन कहां पाता।।

 

ममतामयी तुम करूणामयी तुम प्रेम तुम्हारा विख्याता।

कपूत को भी गले लगाती शरण तुम्हारी जो आता ।।

 

रक्तबीज हो या महिषासुर सामने तेरे जो जाता।

महाकाली के तेज के आगे कोई ठहर नहीं पाता।।

 

फैली है महामारी जग में रण में कूद पङो माता।

तुम ने ही उद्धार किया है जब-जब जग संकट छाता।।

 

फैला दो ममता का आंचल मन बहुत ही घबराता।

चाहूं आशीर्वाद तुम्हारा “कुमार” सदा तव शीश नवाता।।

 

?

 

कवि व शायर: Ⓜ मुनीश कुमार “कुमार”
(हिंदी लैक्चरर )
GSS School ढाठरथ
जींद (हरियाणा)

यह भी पढ़ें : 

किया फिर घात दुश्मन ने बढाकर हाथ यारी का

 

Similar Posts

  • प्यार निभाना पड़ता है | Pyar Nibhana Padta Hai

    प्यार निभाना पड़ता है ( Pyar Nibhana Padta Hai ) प्यार निभाना, पड़ता है ।चाहे जितनी, कठिन डगर हो ।उस पर ,जाना पड़ता है ।ह्रदय यदि, होता है विचलित ।उसको, समझाना पड़ता है ।जो कुछ, पीछे छूट गया है ।उसे ,भुलाना पड़ता है ।जिससे भी ,किया हो वादा ।उसे ,निभाना पड़ता है ।प्रेम स्वत ही…

  • श्री रामवतार जी | Shri Ramvatar Ji

    श्री रामवतार जी ( Shri Ramvatar Ji )   श्री रामवतार जी,प्रेरणा पुंज आदर्श शिक्षक पर्याय ************* स्नेहिल व्यक्तित्व प्रेरक कृतित्व , शोभना शिक्षा विभाग राजस्थान । परम शिक्षक पद सेवा स्तुति, सरित प्रवाह स्काउटिंग प्रज्ञान । कर्तव्य निष्ठ अनूप नैतिक छवि, शिक्षण अधिगम नव अध्याय । श्री रामवतार जी,प्रेरणा पुंज आदर्श शिक्षक पर्याय ।।…

  • फलों के चमत्कार | Phalon ke Chamatkar

    फलों के चमत्कार! ( Phalon ke chamatkar )   आंवला ** रस आंवला का , खाएं चूस चूस। बढ़ाए एम्युनिटी, भरे ऊर्जा ठूंस ठूंस।। अनार *** चबाकर खाएं दाना भरपूर अनार का। नाम लेवा ना रहेगा आदम बीमार का।। पपीता *** पेट का रोगी खाएं पपीता कांच ही। समूल नष्ट करेगा व्याधि, शीघ्र सांच ही।।…

  • चक्र समय का चलता रहता | Kavita Chakra Samay ka

    चक्र समय का चलता रहता ( chakra samay ka chalta rehta )    इस समय का यही इतिहास है, कभी आँधी तूफ़ान बरसात है। कभी धूप और कभी ये छाॅंव है, तो कभी पतझड़ गर्मी शीत है।। ये चक्र समय का चलता रहता, अपनें ही हाल में यह है रहता। किसी के रोकने से नही…

  • वेश्याएं | Veshyaen

    वेश्याएं ( Veshyaen )    उनकी गलियों में, दिन के उजाले में जाना, सभ्य समाज को, अच्छा न लगता, इसलिए छद्म वेश में , रात्रि के अंधियारे में , छुप-छुप कर वह जाता है , सुबह दिन के उजाले में, सभ्यता का लबादा ओढ़े , सदाचरण पर भाषण देता, लोग उसे देवता समझ , फूल…

  • गजल लिख रहा है

    गजल लिख रहा है   जिसकी माचिस से घर जल  रहा है, वो उसी पर गज़ल लिख रहा है।।   आपके आने का ये असर है, झोपड़ी को महल कह रहा है।।   अच्छी लगती नही बेरुखी अब, मैं नहीं मेरा दिल कह रहा है।।   शेष क्या हो गया है उसे अब, लब को…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *