नज़र ने बोल दिया

नज़र ने बोल दिया

नज़र ने बोल दिया

नज़र ने बोल दिया बू-ए-हाथ से पहले
न जाने किस से मिला है वो रात से पहले

वो मेरे साथ ही ग़मगीन सा नज़र आया
जो हँस रहा था बड़ा मेरे साथ से पहले

मुझे लगा ही था ये बात होने वाली है
सो देखना था तेरा हाल बात से पहले

ख़बर बुरी ही सही मैं तो संग दिल ठहरा
प दिल से आह उठी जुज़्ज़ियात से पहले

वो हर तरह से मुझे भूलने लगा यानी
उसे मैं याद था इस एहतियात से पहले

वो दिन भी आए ‘असद’ काश जीतेजी मेरे
सभी को प्यार दिखे ज़ात पात से पहले

असद अकबराबादी 

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • चाहता हूँ | Chahta Hoon

    चाहता हूँ ( Chahta Hoon ) माँग तेरी मैं सज़ाना चाहता हूँहाँ तुझे अपना बनाना चाहता हूँ राह उल्फ़त की बनाना चाहता हूँप्यार हर दिल में बसाना चाहता हूँ आप बिन तो इस जहाँ में कुछ नही हैबात मिलकर ये बताना चाहता हूँ दो कदम जो साथ मेरे तुम चलो तोइक़ नई दुनिया दिखाना चाहता…

  • इस जमाने में | Ghazal Is Zamane Mein

    इस जमाने में ( Is Zamane Mein )  जुबां को थोड़ी सी असरदार कीजिए, करो जब भी बात, वजनदार कीजिए। =================== कलंक पसरा है इतना संभल के इनसे, जहान में बेदाग,तुम किरदार कीजिए। =================== कभी किसी से मिलो,लगे मिला कोई, दुखे दिल,रिश्ता ऐसा दमदार कीजिए। =================== शराफ़त न ढूंढो इस जमाने में यार मेरे, सभंल…

  • बिजलियां | Bijliyan

    बिजलियां ( Bijliyan ) किस क़दर रक़्स़ां हैं हाय बहरो-बर में बिजलियां।ख़ौफ़ बरपा कर रही हैं दिल-जिगर में बिजलियां। जिनकी हैबत से लरज़ता है बदन कोहसार का।बन्द हैं ऐसी तो मेरे ख़स के घर में बिजलियां। या ख़ुदा मेह़फ़ूज़ रखना , आशियाने को मिरे।वो गिराते फिर रहे हैं शहर भर में बिजलियां। क्या डरेंगे हम…

  • वो नहीं | Ghazal Wo Nahi

    वो नहीं ( Wo Nahi ) ये असल है वो नहीं ये नकल है वो नहीं घास वो गेहूं है ये ये फ़सल है वो नहीं आदमी दोनों हैं पर ये सरल है वो नहीं फर्क दोनों में है क्या ये तरल है वो नहीं फूल हैं दोनों “कुमार” ये कमल है वो नहीं कुमार…

  • गलतफ़हमी रही हरदम | Galatfehmi Shayari

    गलतफ़हमी रही हरदम ( Galatfehmi rahi hardam )    हमारी मानते वो ये गलतफ़हमी रही हरदम बरतने में उन्हें दिल में मिरे नर्मी रही हरदम। जफ़ा करके भी मैं उनका भरोसा जीत ना पाई मेरी ख़ातिर नज़र सरकार की वहमी रही हरदम। मुझे ले डूबी ये गफ़लत की बस मेरे रहेंगे वो मगर गैरों की…

  • जो नज़रों से गिर जाते हैं | Ghazal Shayari in Hindi

    जो नज़रों से गिर जाते हैं ( Jo nazron se gir jaate hain )    वो नफ़रत से घिर जाते हैं जो नज़रों से गिर जाते हैं मस्जिद में हैं अल्लाह वाले मयख़ाने काफ़िर जाते हैं कौन यक़ीं करता है उन पर जो बातों से फिर जाते हैं चालाकी से दूर रहा कर इस रस्ते…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *