निकल गया

निकल गया | Nikal Gaya

निकल गया

ऐसे वो आज दिल के नगर से निकल गया।
जैसे परिन्द कोई शजर से निकल गया।

किस रूप में वो आया था कुछ तो पता चले।
बच कर वो कैसे मेरी नज़र से निकल गया।

क्यों कर न नफ़़रतों का हो बाज़ार गर्म आज।
जज़्बा-ए-इ़श्क़,क़ल्बे-बशर से निकल गया।

उस दिन ही मेरे दिल के महक जाएंगे गुलाब।
जिस दिन वो मुस्कुरा के इधर से निकल गया।

सिखलाएं हैं उसी ने हुनर उस को दौड़ के।
आगे पिसर यूं आज पिदर से निकल गया।

हरगिज़ न मिल सकेगा ठिकाना उसे कहीं।
जिस दिन वो मेरे ज़ह्नो-जिगर से निकल गया।

दिल को मिरे ह़दफ़ पे रखा छोड़ कर फ़राज़।
तीर-ए-निगाहे-नाज़ किधर से निकल गया।

जिसको सलाम आ गया यमदूत का फ़राज़।
वो शख़्स़़ ज़िन्दगी के सफ़र से निकल गया।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • तुम्हें जिस घड़ी | Tumhen Jis Ghadi

    तुम्हें जिस घड़ी ( Tumhen Jis Ghadi ) तुम्हें जिस घड़ी चश्मे नम देखते हैं। दिल ए मुज़तरिब में अलम देखते हैं। निगाहों से दिल की जो देखो तो जानो। तुम्हें किस मुह़ब्बत से हम देखते हैं नज़रबाज़ हम को समझ ले न दुनिया। ह़सीनों को हम यूं भी कम देखते हैं। अ़दू को भी…

  • नाम तेरा | Naam Tera

    नाम तेरा ( Naam Tera ) नाम तेरा सदा गुनगुनाता रहा । मन ही मन सोचकर मुस्कराता रहा ।। जब कभी ख्वाब में आप आये मेरे । रात फिर सारी घूँघट उठाता रहा ।। क्या हुआ मुश्किलों से जो रोटी मिली । प्रेम से तो निवाला खिलाता रहा ।। बद नज़र है जमाने की सारी…

  • बेकरार | Bekarar Shayari

    बेकरार ( Bekarar )   ये दुनिया इतनी आसानी से न तुझे समझ आएगी, प्यार भी करेगी तुझसे और तुझ को ही रुलाएगी! बेकरार दिल की धड़कनों में शामिल करके तुझे दिल के तेरे जज्बातों को ही नामुनासिब ठहराएगी! ख्यालों को तेरे बेसबब यह दुनिया साबित कर एक दिन प्रश्नों से कटघरे में तुझको फसाएगी!…

  • लगी कुछ देर | Latest Ghazal

    लगी कुछ देर ( Lagi kuch der )   लगी कुछ देर उनको जानने में हां मगर जाना हमारे प्यार का होने लगा है कुछ असर जाना। कभी वो हंस दिये रहमत ख़ुदा की हो गई हम पर हुए नाराज़ तो उसको इलाही का कहर जाना। हुए ग़ाफ़िल मुहब्बत में भुला दी जात भी अपनी…

  • गुज़र जाते हैं | Guzar Jaate Hain

    गुज़र जाते हैं ( Guzar jaate hain )   पल रहे क़ल्ब में मलाल गुज़र जाते हैं आते जब नव्य,विगत साल गुज़र जातें हैं ॥ रंज शिकवे शिकायतें भी कही दम भर के जश्न के साथ बहरहाल गुज़र जातें हैं ॥ शादमानी थी रही या कि रही ये नुसरत ताज़े वादों के संग हाल गुज़र…

  • भला क्या माँगा

    भला क्या माँगा तुझ से दिलदार से मैंने भी भला क्या माँगातेरे जलवों से शब-ए-ग़म में उजाला माँगा तेरी रहमत ने जो भी फ़र्ज़ मुझे सौंपे हैंउनको अंजाम पे लाने का वसीला माँगा हर ख़ुशी इनके तबस्सुम में छुपी होती हैरोते बच्चों को हँसाने का सलीक़ा माँगा तू है दाता हैं तेरे दर के भिखारी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *