बिमल तिवारी की कविताएं | Bimal Tiwari Poetry
फिर मिलेंगे झंझटें तमाम आ के चली गईहोना था बदनाम हो के चली गईजीवन में वसंत इतने देख लिए,कीकई सुहानी शाम आ के चली गई, हर सुबह एक ख्वाब में ही बीत गईकुछ करने की ख्याल में ही बीत गईक्या खोया क्या पाया अब तक मैंनेसमय इसी सवाल में ही बीत गई, जीवन आ के…










