• गांधीजी के जीवन सिद्धांत

    गांधीजी के जीवन सिद्धांत २ अक्टूबर १८६९ को पोरबंदर में जिसने जन्म लिया,पुतली बाई मां पिता करमचंद ने मोहनदास नामकरण किया,पीर पराई देख जिसकी आंखें और हृदय भर आता था,करूणा दया देख टैगोर ने जिन्हें महात्मा नाम दिया। माता के गुरु श्रीमद राजचंद्र जैन धर्म के अनुयायी थे,गांधीजी के विदेश जाने पर मां के मन…

  • हमें होश ऐसे भुलाए गए हैं

    हमें होश ऐसे भुलाए गए हैं हमें होश ऐसे भुलाए गए हैं।निगाहों से साग़र पिलाए गए हैं। सितम हम पे ऐसे भी ढाए गए हैं।हंसा कर भी अक्सर रुलाए गए हैं। जिन्हें देखकर ताब खो दे ज़माना।वो जलवे भी हम को दिखाए गए हैं। जो चाहो करो हम से बरताव यारो।हम आए नहीं हैं बुलाए…

  • मुलाक़ात कीजिए | Mulaqaat Kijiye

    मुलाक़ात कीजिए ( Mulaqaat Kijiye ) काबू में पहले अपने ये जज़्बात कीजिएफिर चाहे जैसे हमसे मुलाक़ात कीजिए जिस में ख़ुशी हो आप की वोही करेंगे हमज़ाहिर तो अपने आप ख़यालात कीजिए फ़ुर्क़त की धूप सहने- चमन को जला न देशिकवे भुला के प्यार की बरसात कीजिए अफ़साना मत बनाइये छोटी सी बात कामुद्दे की…

  • अपनी हस्ती ही मिटा दी हमने | Apni Hasti

    अपनी हस्ती ही मिटा दी हमने अपनी हस्ती ही मिटा दी हमनेअपने दुश्मन को दुआ दी हमने क्या सज़ा मुझको खुदा कल देगाआज जो ज़ीस्त सजा ली हमने। अपने यारो पे भरोसा करकेअपनी दुनिया ही मिटा दी हमने कोई वादा नही था मिलने काआँख राहों में बिछा दी हमने हाथ अपने ही उठाकर रब सेतेरी…

  • किसी के लिए | Kisi ke Liye

    किसी के लिए ( Kisi ke Liye ) कौन मरता जहाँ में किसी के लिएमर मिटे हम मगर दोस्ती के लिए तुग़लक़ी देते फ़रमान वो हैं सदामारे निर्दोष भी बंदगी के लिए ग़ैर की बाँह में प्यार को देखकरचाँद रोता रहा चाँदनी के लिए आज छाई उदासी चमन में बहुतकोई भँवरा मरा है कली के…

  • अर्जुन कागिया परिवार | Arjun Kagiya Family

    श्री अर्जुन कागिया गांव कागिया छाछरो ज़िला थरपारकर सिंध के पुत्र श्री पूरा की शादी सन् 1847 को गांव भाडासिंधा में श्री सोहजो पुत्र लाखो जोगू के घर श्रीमती बाओली से हुई । जिसकी तीन संतान क्रमश:1, खेतो 2, ठाकरो 3, टोहो हुए जिसमें टोहो की शादी सन् 1875 को गांव बिकलोकर श्रीमती रेखी पुत्री…

  • आई लव आरटीसी जोधपुर

    आई लव आरटीसी जोधपुर अब बनने जा रहें है हम भी अधिनस्थ अधिकारी,जिसके लिए कर रहें है हम दिन और रात तैयारी‌।कर दिया है केरिपु बल ने आदेश इसका ये जारी,वक्त निरन्तर निकल रहा बढ़ेगी अब जिम्मेदारी।। कभी ना सोचा हमने सपने में लगेगा यह सितारा,मुश्किल राहें क़दम डगमगाएं पर हिम्मत न हारा।समझा मेंने सबको…

  • आखिर तुम हो मेरे कौन?

    आखिर तुम हो मेरे कौन? खिलते हो मुरझाते हो,आकर रोज सताते हो।सुन्दर गीत एक सुनाकर,मन बेचैन दर्पण बनाकर ।सुधि आते हो बारम्बार,करते हो मुझपर ऐतबार।बात नहीं कर पाती तेरी,रोकूँ याद न रूकती तेरी।आखिर तुम हो मेरे कौन?? प्रति रोम-रोम स्पन्दित होती,सुधियों में आनन्दित होती।आच्छादित प्रियवर बन कर,आह्लादित उर करते मन भर।अनमोल भाव तेरा ठाकुर,तुमसे मिलन…

  • नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) चतुर्थ दिवस

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) चतुर्थ दिवस भुवाल माता तार दो तार दो हमको , माता तार दो ।राग – द्वेष का पर्दा हमारे नयनों के आगे छाया ।भव भ्रमण की ठोकरें खाकर भी हम सम्भल नहीं पाये ।भुवाल माता तार दो तार दो हमको , माता तार दो ।संसार में घूम घूम कर देखा…

  • रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँ | Roz Jeetee Hoon Roz Marti Hoon

    रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँ ( Roz jeetee hoon roz marti hoon ) रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँशम्अ सी रोज मैं तो जलती हूँ पिघला देती हूँ मैं तो पत्थर कोमैं जो सोचूँ वही मैं करती हूँ ईंट का दूँ जवाब पत्थर सेमैं कहाँ अब किसी से डरती हूँ बीत जाता तो फिर…