माता हरती हर संताप
माता हरती हर संताप देव, ऋषि और पितृ ऋण होते,जग में ऋण के तीन प्रकार।इन्हें चुकाना सनातनी का,होता जन्मसिद्ध अधिकार।पर इन तीनों से पहले है,सर्वोपरि माता का ऋण।इसे चुकाना परमावश्यक,हो सकते ना कभी उऋण।माता ने ही जन्म दिया और,मां ने हमको पाला है।इसीलिये अनगिन रूपों में,मां का रूप निराला है।बेटी, बहन, मां रूप साथ में,पत्नी…










