जो यहाँ | Ghazal Jo Yahan

जो यहाँ

( Jo Yahan )

हमनशीं हमनवा दिलदार हुआ करते थे
इश्क़ के वो भी तलबगार हुआ करते थे

लूट लेते थे वो पल भर में ही सारी महफ़िल
शेर ग़ज़लों के असरदार हुआ करते थे

चंद सिक्को में ये अख़बार भी बिक जाते अब
जो कभी सच के तरफ़दार हुआ करते थे

सबको हासिल थी ज़माने की ही दौलत लेकिन
हम तो बस अश्कों के हक़दार हुआ करते थे

फ़स्ल नफ़रत की ही बोने की थी फ़ितरत उनकी
जो यहाँ कौम के गद्दार हुआ करते थे

छोड़ तूफ़ा में हमें कर के किनारा निकले
मेरी कश्ती के जो पतवार हुआ करते थे

आज लिखते हैं वहीं मुल्क की क़िस्मत देखो
जो कभी ज़ुल्मों के सरदार हुआ करते थे

नींव हिलने लगी उस घर की भी अब तो मीना
जिसके पत्थर बड़े दमदार हुआ करते थे

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

राखी का त्यौहार निराला | Rakhi ka Tyohar Nirala

Similar Posts

  • इस तरह याद आया न कर

    इस तरह याद आया न कर तू मुझे इस तरह याद आया न करमेरी ही धुन में तू वक़्त ज़ाया न कर तेरी महफ़िल में चल के अगर आ गयातो नज़र मुझसे दिलबर चुराया न कर गुल में भी तू नज़र आए जान-ए- ग़ज़लहर किसी के दिलों को यूँ भाया न कर काफ़िया हूँ मैं…

  • भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार है

    भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार है भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार हैइनकी कश्ती फँसी आज  मझधार है जब भी भक्तों पे संकट की आई घड़ीदुर्गे माँ ने लिया तब ही अवतार है दैत्य दानव दरिंदों के संहार कोमाँ उठाती सदा अपनी तलवार है झूमते नाचते धुन पे गरबे की सबहर्ष उल्लास भरता ये …

  • जाने क्यों आज | Jaane Kyun Aaj

    जाने क्यों आज ( Jaane Kyun Aaj ) जाने क्यों आज वो निढाल सा था।उसके रुख़ पर अजब मलाल सा था। हाय क्या दिन थे प्यार के दिन भी।दिल की दुनिया में इक धमाल सा था। कोशिशें यूं भी रायगां ठहरीं।उसका मिलना ही कुछ मुह़ाल सा था। फूल झड़ते थे उसके होठों से।उसका लहजा ही…

  • मुस्कुराने के बाद | Muskurane ke Baad

    मुस्कुराने के बाद ( Muskurane ke Baad ) दिल की महफ़िल से मुझको उठाने के बादकोई रोता रहा मुस्कुराने के बाद उनके तीर – ए – नज़र का बड़ा शुक्रियाज़िन्दगी खिल उठी चोट खाने के बाद हौसलों को नई ज़िंदगी दे गयाएक जुगनू कहीं झिलमिलाने के बाद उसने दीवाना दिल को बना ही दियाइक निगाह…

  • गुजारा है आजकल | Gujara hai Aajkal

    गुजारा है आजकल ( Gujara hai aajkal )    चुपचाप रहोगे तो गुजारा है आजकल बर्बाद ये निज़ाम ही सारा है आजकल। हर आदमी की शख़्सियत में राज सौ छिपे कैसे बताएं कौन हमारा है आजकल। कमबख़्त दिल है ढीठ तलबग़ार उन्हीं का उनपर ही दिलो जान से हारा है आजकल। मशहूर हैं जनाब जमाने…

  • गए वो दिन | Gaye Woh Din

    गए वो दिन ( Gaye Woh Din)    अजब इस दौर में हमने शरीफों का चलन देखा I डुबो के हाथ खूं में फिर बदलते पैरहन देखा II हुई बर्बाद कश्ती जो ,वजह है ना-ख़ुदा खुद ही I उजड़ता बाग़बाँ के सामने ही ये चमन देखा II किया था नाज़ जब कहते, मिरी हर शै…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *