जो मुमकिन हो | Ghazal Jo Mumkin ho

जो मुमकिन हो

( Jo Mumkin ho )

मिलो जिनसे कभी, लहजा नरम रखना,
जमीं पर तुम सदा अपने कदम रखना ।।

बहक जाए नहीं इकदाम इशरत मे,
अदावत में ज़रा अपना करम रखना ।।

मुलाक़ातों का होगा सिलसिला कायम,
मिलें नजरें तो आँखो मे शरम रखना।।

बनाकर दूरिया चलना मुहब्बत में,
फसाने मे हकीकत का भरम रखना ।।

नसीहत आज करता है ‘धरम’ सब को,
जो मुमकिन हो मिजाज अपना नरम रखना ।

डी के निवातिया

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

मेरा वतन है जग से न्यारा

Similar Posts

  • फ़ौरन संभाल लेता है

    फ़ौरन संभाल लेता है वो गुफ़्तगू में मिसालों को डाल लेता हैबिगड़ती बात को फौरन संभाल लेता है बढ़ेगा कैसे मरासिम का सिलसिला उससेज़रा सी बात पे आँखे निकाल लेता है छुपाना उससे कोई राज़ है बड़ा मुश्किलवो बातों बातों में दिल भी खंगाल लेता है कशिश अजीब सी रहती है उसके लहजे मेंहरेक शख़्स…

  • यूं ही रखना सदा ख़याल अपना।

    यूं ही रखना सदा ख़याल अपना। दूर जाकर भी ख़ुश जमाल अपना।यूं ही रखना सदा ख़याल अपना। जो भी है आपका ही है वल्लाह।हम को कुछ भी नहीं मलाल अपना। कुछ तो बतलाओ ऐ तबीब-ए-दिल।ह़ाल कैसे हो अब बह़ाल अपना। कौन देखेगा माहो-अन्जुम को।छत पे आ जाए गर हिलाल अपना। ह़ालत-ए-ह़ाल भूल जाओगे।हम दिखा दें…

  • मैं खूबसूरत नहीं | Ghazal Main Khubsurat Nahi

    मैं खूबसूरत नहीं  ( Main Khubsurat Nahi )   कोई मुझे पसंद करे इतना मैं खूबसूरत नहीं ! देखता यहां कोई ज़माने में भली मूरत नहीं ! गोरी घनी सूरत के सब कायल रहे होते सदा, मेरी ज़माने को यहां, कोई जरुरत ही नहीं ! होते वो किस्मत के धनी जिन्हे मिले कोई परी, कोई…

  • जाइए सो जाइए | Jayie so Jayie

    जाइए सो जाइए ( Jayie so Jayie ) छोड़िए भी अब ज़राफ़त जाइए सो जाइए। हो गयी काफ़ी शरारत जाइए सो जाइए। जानेमन जान-ए-मसर्रत जाइए सो जाइए। बन्द कीजे बाबे उल्फ़त जाइए सो जाइए। नींद सा आराम दुनिया की किसी शय में नहीं नींद है अल्लाह नेअ़मत जाइए सो जाइए। मैं तो पागल हूं न…

  • प्यार के गुल खिले है यहाँ | Pyar ke Gul

    प्यार के गुल खिले है यहाँ ? ( Pyar ke gul khile hai yahan )    प्यार के गुल खिले है यहाँ ? नफ़रत की बू घटे है यहाँ उम्रभर एक लड़की से हम प्यार करते रहे है यहाँ हाथ किससे मिलाऊँ भला दोस्त दुश्मन बने है यहाँ कौन महफूज़ है अब भला देखिये घर…

  • मज़ा आ गया | Mazaa aa Gaya

    मज़ा आ गया ( Mazaa aa Gaya )  था तो मुश्किल सफ़र पर मज़ा आ गया इक मुसाफ़िर गया दूसरा आ गया इक मुलाकात उस से हुई थी कहीं मेरे घर वो पता पूछता आ गया उसके आते ही लगने लगा है मुझे वक़्त दर पर मेरे ख़ुशनुमा आ गया लुत्फ़ ही लुत्फ़ आने लगा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *