• देश प्रेम | Kavita Desh Prem

    देश प्रेम ( Desh Prem ) मां, ऐसी मुझे जवानी दे मर जाऊ, इस देश के खातिर, शाम सूबा ये, पानी दे मां ऐसी मुझे जवानी दे । नही चाहिये हल्दी, चंदन, तन को पीला करने को l देना है तो गर्व से मुझको,  तिलक धारा धूल बलिदानी दो l मां ऐसी मुझे जवानी दो…

  • स्त्री योद्धा होती है | Stree Yoddha Hoti hai

    स्त्री योद्धा होती है ( Stree Yoddha Hoti hai ) खून पानी ही नहीं, अपनी रंगत भी देती है, माँ गर्भ धारण कर, खुशी का संगत देती है। नौ महीने का सफर आसान नहीं, हर बच्चे का ओर(गतिविधि) सामान नहीं। एक में करती बहुत उल्टी, तो दूसरे में खाती मिट्टी। चेहरे पर झाई(दाग), पक गये…

  • हमारा देश | Geet Hamara Desh

    हमारा देश ( Hamara Desh ) है प्यार बहुत देश हमारा हिन्दुतान। है संस्कृति इसकी सबसे निराली। कितनी जाती धर्म के, लोग रहते यहाँ पर। सब को स्वत्रंता पूरी है, संविधान के अनुसार।। कितना प्यार देश है हमारा हिंदुस्तान। इसकी रक्षा करनी है आगे तुम सबको।। कितने बलिदानों के बाद मिली है आज़ादी। कितने वीर…

  • खुमार सावन का | Ghazal Khumaar Sawan ka

    खुमार सावन का ( Khumaar Sawan ka ) बीता मौसम हज़ार सावन का आप बिन क्या शुमार सावन का बात बनती नज़र नही आती है अधूरा जो प्यार सावन का इक नज़र देख लूँ अगर तुमको । तब ही आये करार सावन का वो न आयेगा पास में मेरे क्यों करूँ इंतज़ार सावन का आप…

  • गाथाएँ बलिदानों की | Gathayen Balidano ki

    गाथाएँ बलिदानों की ( Gathayen balidano ki ) सुनो सुनाऊँ एक कहानी, मतवाले दीवानों की। प्रबल प्रेरणा स्त्रोत अनूठी, गाथाएँ बलिदानों की।… मंगल बिस्मिल भगत सिंह का, आजादी ही नारा था। नाना शेखर खुदीराम को, देश प्राण से प्यारा था।। हँसकर फाँसी चढ़े भगत जब, वो अनमोल जवानी थी। अंग्रेजों के अतिचारों की, रोकी सब…

  • ओ सितमगर तू भी | Ghazal O Sitamgar

    ओ सितमगर तू भी ( O Sitamgar tu Bhi ) शह्र वीरान भी दहशत की गवाही देंगे ढ़ेर बारूद के दुनिया को तबाही देंगे शब अमावस की न हम तुमको सियाही देंगे हम तुम्हें जाने अदा सिर्फ़ वफ़ा ही देंगे टूट जाये मेरा ये जाम भी परवाह नहीं मेरे हाथों में तो मयख़ार सुराही देंगे…

  • रहते हैं ज़मीरों को | Ghazal Rahte Hain

    रहते हैं ज़मीरों को ( Rahte Hain Zameeron ko )  रहते हैं ज़मीरों को यहाँ बेचने वाले दुश्मन ने यही सोच के कुछ जाल हैं डाले बेटे ही जहाँ माँ का गला नोच रहे हों उस घर की मुसीबत को तो भगवान ही टाले दुश्मन है इसी बात पे हैरान अभी तक हम से कभी…

  • राखी | Kavita Rakhi

    राखी ( Rakhi ) “धागा” तो इसका कच्चा सा होता है. मगर यह रिश्ता यह पक्का सा जोड़ता है। होता तो है यह कमजोर बहुत ही… सबसे ज्यादा मजबूती यही प्रदान करता है। भाई तो हर बहन का ही मान होता है. कभी दोस्त कभी पिता समान होता है. कभी हँसाता है, तो कभी रुला…

  • नए जगत की रीत निराली | Kavita Naye Jagat ki Reet Nirali

    नए जगत की रीत निराली ( Naye jagat ki reet nirali ) नए जगत की रीत निराली, सुनो आज तुम धरम ज़बानी, मौसम बदले,बदली कहानी, विष है मीठा, अमृत कुनैनी !! बीता बचपन, गई जवानी, बीत गई सब बात पुरानी, बुढ़ापे छलकी अब रवानी, आई बनकर नूतन कहानी !! कलयुग की है नई कहानी, उलटी…

  • हर लम्हा है हसीन | Ghazal Har Lamha

    मेरी ग़ज़ल ( Meri Ghazal ) मिलती सभी से मेरी ग़ज़ल दिलकशी के साथ शीरीं ज़ुबां है उसकी बड़ी चासनी के साथ हम जीते ज़िंदगी को हैं दरियादिली के साथ हर लम्हा है हसीन फ़क़त मैकशी के साथ बातें करेंगे वस्ल की और इंतिज़ार की इक़रार-ए-इश्क़ की सदा संजीदगी के साथ बीती सुख़नवरी में ही…