रहते हैं ज़मीरों को

रहते हैं ज़मीरों को | Ghazal Rahte Hain

रहते हैं ज़मीरों को

( Rahte Hain Zameeron ko ) 

रहते हैं ज़मीरों को यहाँ बेचने वाले
दुश्मन ने यही सोच के कुछ जाल हैं डाले

बेटे ही जहाँ माँ का गला नोच रहे हों
उस घर की मुसीबत को तो भगवान ही टाले

दुश्मन है इसी बात पे हैरान अभी तक
हम से कभी हारे नहीं भारत के जियाले

दुश्मन तू छुपे चोरी लगाता है निशाना
मैदान में जब चाहे जिसे हमसे लड़ा ले

हर बार नतीजे में तुझे हार मिली है
देते हैं गवाही ये जहां भर के रिसाले

आहट से हमारी ही दहल जाते हैं दुश्मन
जांबाज़ हमेशा से हैं भारत के निराले

दीवाना समझते हैं तो समझे हमें सागर
हम ढूँढने निकले हैं अंधेरों में उजाले

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

सुलग रही है | Kavita Sulag Rahi Hai

Similar Posts

  • देश में | Desh Mein

    देश में ( Desh Mein )    प्यार के हर घड़ी गुल खिले देश में बस अमन प्यार हर पल रहें देश में हो मुबारक आजादी सभी को सदा एकता की ताक़त बस बने देश में मुख पर जय हिंद जय हिंद जय हिंद हो ये ही आवाज़ यारों उठे देश में नाम रोशन हमेशा…

  • मुहब्बत तू निभाए रख | Muhabbat tu Nibhaye Rakh

    मुहब्बत तू निभाए रख ( Muhabbat tu nibhaye rakh )    गुलों से घर सजाए रख ? वफ़ा अपनी बनाए रख अंधेरों से लगे है डर चिरागो को जलाए रख ज़रा दीदार करने दे नहीं चेहरे छुपाए रख उदासी छोड़ दिल से तू लबों को तू हंसाए रख बढ़ेगा प्यार दिल में और नज़र मुझसे…

  • ख़बर रखता है

    ख़बर रखता है ज़ख़्म देकर भी वो पल-पल की ख़बर रखता हैनब्ज़ कब बन्द हो इस पर भी नज़र रखता है उसकी उल्फ़त पे यक़ीं कैसे भला मैं कर लूँहैसियत पर जो मेरी आँख ज़बर रखता है जाने कितने ही किराये के मकानों में रहेअपना घर ही मेरा ख़ुश जान जिगर रखता है जब अचानक…

  • मगर दिल मे प्यार है | Magar Dil me Pyar Hai

    मगर दिल मे प्यार है ( Magar dil me pyar hai )         मेरी आखों मे है जलन, मगर दिल मे प्यार है। कलम उठाऊं या हथियार, दोनो मे धार है ।। कहते है कुछ और , करते है कुछ और सियासत बन गई देखो व्यापार है। कलम उठाऊं या हथियार, दोनो मे…

  • बिठाये पहरे हैं | Bithaye Pahre Hain

    बिठाये पहरे हैं ( Bithaye Pahre Hain ) दर पे मुर्शिद बिठाये पहरे हैंइन के सर पर भी अब तो ख़तरे हैं दाग़ दामन पे लाख हों इनकेफिर भी उजले सभी से चेहरे हैं जब्र करता है इसलिए जाबिरलोग गूंगे हैं और बहरे हैं तुम भी दिल में हमारे बस जाओइसमें कितने ही लोग ठहरे…

  • फूल तो ज़िन्दगी में खिला ही नहीं

    फूल तो ज़िन्दगी में खिला ही नहीं फूल तो ज़िन्दगी में खिला ही नहींकोई अपना तो जग में हुआ ही नहीं आज वो भी सज़ा दे रहें हैं मुझेजिनसे अपना कोई वास्ता ही नहीं मैं करूँ भी गिला तो करूँ किसलिएकोई अपना मुझे तो मिला ही नहीं जिनसे करनी थी कल हमको बातें बहुतउसने लम्हा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *