• पिकनिक | वनभोज

    पिकनिक  ( Picnic ) जाता नहीं कोई रोज, मनाने को वनभोज, करते मुझे क्यों हो तंग, चलो पिकनिक हर रोज, बच्चों जरा पढ-लिख लो, खुल गई है स्कूल, फिर छुट्टी के दिन चलेंगे, करेंगे छुट्टी वसूल, बड़े-बूढ़े और बच्चे खुश, हो जाते हैं पिकनिक से, सारी चिंताएं वो भूल, वहीं हो जाते हैं मसगूल, जाते…

  • नजारा | Kavita Nazara

    नजारा ( Nazara ) रंग बिरंगी प्रकृति देखो, यौवन के मद मे झूमे, पर्वत पेंड़ों की ये श्रंखला, आकाश नारंगी को चूमें, हरित धरा पर सुमन खिले हैं, बनी मेखला गलियारा, कौन भला इस यौवन पर नही है अपना हिय हारा, अरुणोदय मे अस्ताचल का, अद्भुत देख नजारा, कुछ और देर को ठहर मै जाऊं,…

  • क्या भारत यूरोप का गोदाम था

    क्या भारत यूरोप का गोदाम था भावार्थ लेखक – कुमार अहमदाबादी रुबाई का भावार्थ समझने से पहले कवि अकबर इलाहाबादी के जीवनकाल के बारे में थोडी सी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। अकबर इलाहाबादी का जन्म १६ नवंबर १८४६ के दिन हुआ था। अवसान १५ फरवरी १९२१ के दिन हुआ था।बालपन में उन्हों ने मुगल…

  • झमाझम बारिश | Jhamajham Barish

    झमाझम बारिश ( Jhamajham Barish ) देखो देखो बारिश का मौसम है आया। सुहाना मौसम ये सबके मन को भाया। काले काले घनघोर बादल नभ में छाए। गर्मी से व्याकुल पशु पक्षी देख हर्षाए। पेड़ पौधे नव पुष्पों से हुए आच्छादित। जीव जगत के हृदय देख हुए हैं पुलकित। बारिश की बूंदें तन मन को…

  • मोह | Kavita Moh

    मोह ( Moh ) दौड़ रहा वीथिका-वीथिका, सुख सपनों की मृगमरीचिका, थोड़ी देर ठहर ले अब तू, कर ले कुछ विश्राम। भले पलायनवादी कह दें, रखा नहीं कुछ मोह में। सारी दुनिया नाच रही है, जग के मायामोह में। मोह बिना अस्तित्व नहीं है, बात पुरानी नई नहीं है। सारा जगत इसी पर निर्भर, कितनों…

  • आम फल | Kavita Aam Fal

    आम फल ( Aam Fal ) मेरी क्या गलती थी जो मुझे छोड़ दिया। मेरे रस का रसपान बहुत तुमने कर लिया। जब-जब तेरा मन हुआ तब-तब तुमने मुझे चूसा। अब जाने का समय हुआ तो आम से मुँह मोड लिया।। जब आता हूँ तो गुण गान करते हो। मेरी प्रसन्नता के लिए क्या क्या…

  • आँखों में बसी हुई चाँदनी सी | Laghu Katha

    स्कूल की जिंदगी की कहानी कुछ और होती है, कुछ कहानी दूर तक सफर तय करती है तो कुछ सिमट कर वहीं की वहीं रह जाती है अपने आप में। किंतु दूर की करती कहानी अपनी अलग पहचान छोड़ जाती है। शेखर ने हाई स्कूल में दाखिला लिया तो क्लास नौ से दस तक जाते-जाते…

  • एकाकार दो रंग अलहदा – लता और बप्पी दा

    हिंदी फिल्मी गीतों का सफर “सुरों की लता “जो महकी तो रूह को छू गई। लता की उत्कृष्टता, सुरों की पावनता व शुद्धता , स्वरसाधना शिखरों को परिभाषित करती है । व्योम पर हस्ताक्षर करती है। वह जो कुछ करती हैं , एक तिलिस्म रच जाता है। अद्भुत आरोह -अवरोह में डूबे हुए हम हम…

  • प्यारे बच्चे | Kavita Pyare Bache

    प्यारे बच्चे ( Pyare Bache ) मन के सच्चे प्यारे बच्चे, हर जिद को रोकर मनवा लेते, शैतानी में शैतान के बप्पा, फिर जिद से हर काम करा लेते। बातें ऐसी मन को मोहें, वीर भाव से लोहा लें। नंग-धडंग घूमते घर में, इटली दो, पोहा पर लोटें। ऐसी हालत घर का बनाए, मेहमान भी…

  • चाँद की व्यथा | Kavita Chand ki Vyatha

    चाँद की व्यथा ( Chand ki Vyatha ) चाँद सागर से कहता रहा रात भर, तुम मचलते रहो मैं तरसता रहूँ ।। तुम उफनते रहो अपनी लहरों के संग मैं तो खामोश तुम को तकता रहूँ l अपनी पलकों में तुमको छिपाये हुए, मैं यूँ ही उम्र भर बस पुलकता रहूँ ।। अपने दामन को…