व्रीड़ा

व्रीड़ा | Kavita Vrida

व्रीड़ा

(  Vrida )

खोया स्वत्व दिवा ने अपना,
अंतरतम पीड़ा जागी l
घूँघट नैन समाए तब ही,
धड़कन में व्रीड़ा जागी ll

अधर कपोल अबीर भरे से,
सस्मित हास लुटाती सी,
सतरंगी सी चूनर ओढ़े,
द्वन्द विरोध मिटाती सी,

थाम हाथ साजन के कर में
सकुचाती अलबेली सी,
ठिठक सिहर जब पाँव बढ़ा तो,
ठाढ़ी रही नवली सी ll

आई मन में छाई तन में,
चौक सिहर सब बंध गए l
हुआ गगन स्वर्णिम आरक्तिक,
खग कलरव सब बंध गए ll

चपल चमक चपला सी मन में,
मेरे मन को रोक लिया l
कैसे करूँ अभिसार सखी मैं,
उसने मुझको टोक दिया ll

Sushila Joshi

सुशीला जोशी

विद्योत्तमा, मुजफ्फरनगर उप्र

यह भी पढ़ें :-

आज की रात | Ghazal Aaj ki Raat

Similar Posts

  • सैनिक | Sainik kavita

    सैनिक  ( Sainik )    वो सैनिक है, वो रक्षक है || 1.न हिन्दू है न मुस्लिम है, वो केवल मानव राशी हैं | न दिन देखें न रात पता हो, वो सच्चे भारतबासी हैं | चाहे गर्मी हो या बर्फ जमे, अपना कर्तव्य निभाते हैं | खुद जान गंवा कर सीमा पर, हिन्दुस्तान बचाते…

  • जरूरत-मन्द -hindi poetry || jaroorat mand

    जरूरत-मन्द   –>नकली के सम्मुख, असली फीका पड़ जाता है ||   1.नकली जेवर की चमक मे, असली सोना फीका पड गया | नकली नगीनों की चमक मे, असली हीरा फीका पड गया | दिखावटी लोगो की चमक मे, असली इंसान फीका पड गया | मतलबी दोस्तों की धमक मे, सच्चा दोस्त फीका पड गया…

  • बेटियां – पूर्णिका

    बेटियां – पूर्णिका मां की हर भावना का,पिता के स्नेह का, जग में सदा मान सम्मान रखती है बेटियां । मंदिर ले जातीं,शॉपिंग करातीं, घर का साज, सजाती हैं बेटियां।। बचपन में मां-बाप,उनकी दुनिया होते, बड़े में मां-बाप को,दुनिया घूमातीं हैं बेटियां।। बेटा है राजा भैया,पर दिल के पास सदा अपनापन ,फिकर लिए, रहती है…

  • वह प्यार कहां से लाऊं | Wah Pyar Kahan se Laoon

    वह प्यार कहां से लाऊं ( Wah pyar kahan se laoon )   जो प्यारा तुमको भी हो, वह प्यार कहाॅ से लाऊॅ? तुमको अपना कहने का अधिकार कहाॅ से लाऊॅ? तुम मुझसे रूठ गये हो, मैं कैसे तुम्हें मनाऊॅ? वह राह तुम्हीं बतला दो, मैं पास तुम्हारे आऊॅ। वह मंदिर कौन तुम्हारा, जिसमें निवास…

  • मानवता बना एक खिलौना | Manavta

    मानवता बना एक खिलौना ( Manavta bana ek khilona )  खिलौनों से खेलते खेलते कब आदमी आदमी से खेलने लगा, गुड्डे गुड़ियों से खेलते खेलते ना जाने कब गुड्डा,गुड्डी का बलात्कार करने लगा, कितना आसानी से सबने गुड्डी को खिलौना बना दिया, पर हर गुड्डा बुरा नहीं ये किसी ने सोचा ही नहीं, कभी ये…

  • आदमी बड़ा चाटुकार है | Aadmi Bada Chatukar

    आदमी बड़ा चाटुकार है! ( Aadmi Bada Chatukar Hai ) आदमी बड़ा चाटुकार है- स्वार्थ देखा नहीं; कि, झटपट चाटने लगता है। ऐसी-ऐसी चाटुकारी… आदमी-आदमी लेकर बैठा है; कि, वक्त आने पर… आदमी, आदमी को चाट लेता है। चाटुकारों की इस दुनिया में, आदमी इतना चाटुकार है- अपना काम निकल जाये, इसकी ख़ातिर… थूक तक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *