• हक की बात | Haq ki Baat

    हक की बात ( Haq ki Baat ) पत्थर के सब देवता, पत्थर के जो लोग। होते सौरभ खुश तभी, चढ़ जाता जब भोग।। देकर जिनको आसरा, काटा अपना पेट। करने पर वो हैं तुले, मुझको मलियामेट।। टूटे सपना एक तो, होना नहीं उदास। रचे बढ़े या फिर करे, कोई नया प्रयास। अपने हक की…

  • जगन्नाथ भगवान की कहानी

    जगन्नाथ भगवान की कहानी आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष द्वितीया शुभ दिन, निकलती है जगन्नाथ भगवान के सवारी। वर्ष भर में आता है एक बार , देखने को इसे भीड़ उमड़ती है भारी। साथ रहते भाई बलभद्र चक्र सुदर्शन, और है साथ लाडली बहना सुभद्रा प्यारी। पांव नहीं है छोटे हाथ अधगढ़ी सी मूरत, धन्य हुए…

  • नाम तेरा | Naam Tera

    नाम तेरा ( Naam Tera ) नाम तेरा सदा गुनगुनाता रहा । मन ही मन सोचकर मुस्कराता रहा ।। जब कभी ख्वाब में आप आये मेरे । रात फिर सारी घूँघट उठाता रहा ।। क्या हुआ मुश्किलों से जो रोटी मिली । प्रेम से तो निवाला खिलाता रहा ।। बद नज़र है जमाने की सारी…

  • विध्यालय का पहला दिन | First Day of School

    विध्यालय का पहला दिन ( First Day of School ) आया आपकी शरण में गुरुजन…| प्यार से पुकार कर, पुचकार कर सम्हाल दो । मैं आपकी शरण में गुरुजन, मुझमें सुंदर विचार दो ।। हो जरुरत फटकार दो, झाड दो लताड़ दो। अपने पन की आश-प्यार, ज्ञान का प्रकाश दो ।। हूँ अभी मैं कोरा…

  • मेरी ट्रेन यात्रा | Meri Train Yatra

    अभी गर्मी की छुट्टी चल रही है हर काॅलेज और विश्वविधालय में पठन – पाठन का कार्य बंद है कहीं समर कैंप तो कहीं कुछ चल रहा है हम भी गर्मी छुट्टी मनाने के लिए अपने गाँव आए कुछ दिन रहने के बाद मन ही नहीं करता कि वापस विश्वविधालय जाऊँ। लेकिन मेरे चाहने से…

  • क्या कविता क्या गीत | Kya Kavita Kya Geet

    क्या कविता क्या गीत ( Kya Kavita Kya Geet ) ऐसा लगता जीवन सारा, व्यर्थ गया हो बीत। क्या कविता क्या गीत। पीड़ाओं ने मुझको पाला, अभिशापों ने मुझे सम्हाला। अंधियारे भरपूर मिले हैं, अंजुरी भर मिल सका उजाला। आंख झपकते सदा किया है, सपनों ने भयभीत। क्या कविता क्या गीत। कैसा कथन कौन सी…

  • बचपना | बालगीत

    बचपना  ( Bachpana ) पुआल पर दौड़कर जीत जाते हैं, बारिश में भीगकर नाव चलाते हैं। बर्तनों से खेलकर खाना बनाते हैं-, चुपके से चलके याद, बचपन में चले जाते हैं । मुकुट मोर पंखों का लगाकर, कृष्ण बन जाते हैं, नीले आकाश को छूकर धरती पर इतराते हैं। कपड़ा ओढ़ मेढ़क बनकर, बारिश करवाते…

  • अपने और पराये | Kavita Apne aur Paraye

    अपने और पराये ( Apne aur Paraye ) जो कल तक दोस्त थे अब वो दुश्मन बन गये हैं। जो खाते थे कसमें यारों सदा साथ निभानें की। जरा सा वक्त क्या बदला की बदल गये ये सब। और छोड़कर साथ मेरा चले गये कही और।। जो अपने स्वर्थ को तुम रखोगे जब साथ अपने।…

  • संक्षिप्त पाक यात्रा

    दिनांक 4 जून से 19 जून तक 5 जून से 18 जून तक पाक सर ज़मीन पर अपने नज़रिये से सफ़र आसान अरमान के अनुकूल रहा सिंध स़़बे ढाट में हिंदू मुस्लिम एकता भाई-चारा का कनूठा उदाहरण मिला। देहाती इलायके में बुनियादी हु़कू़क़ से मह़रूम है विशेषकर पेयजल के बारे बच्चे बुढ्ढे युवा बुज़ुर्ग महिलाऐं…

  • राष्ट्रधर्म | Kavita Rashtradharm

    राष्ट्रधर्म ( Rashtradharm ) देश काल सापेक्ष संस्कृति का जिसमें विस्तार है। राष्ट्र धर्म है श्रेष्ठ सभी से, सब धर्मों का सार है। प्राप्त अन्नजल जिस धरती से, बनी प्राणमय काया, जिसकी प्रकृति सम्पदा पाकर, हमने सब भर पाया, पवन प्रवाहित हो श्वांसों में, ऊर्ज्वस्वित है करता, अपने विविधि उपादानों से, जीवन सुखद बनाया, करे…