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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • अपनापन
    कविताएँ

    अपनापन | Kavita Apnapan

    ByAdmin July 2, 2024

    अपनापन ( Apnapan ) सफर करते-करते कभी थकती नहीं, रिश्ता निभाने का रस्म कभी भूलती नहीं, कभी यहाँ कभी वहाँ आनातुर, कभी मूर्खता कभी लगता चातुर्य, समझ से परे समझ है टनाटन, हर हालत में निभाते अपनापन, किसी को नहीं मोहलत रिश्तों के लिए, कोई जान दे दिया फरिश्तों के लिए, कोई खुशी से मिला,कोई…

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  • Soch Badalna Hoga
    निबंध

    बरसात का मौसम : एक प्राकृतिक वरदान

    ByAdmin July 2, 2024July 2, 2024

    प्रस्तावना: बरसात का मौसम, जिसे मॉनसून भी कहते हैं, प्रकृति का एक अनमोल तोहफा है। यह मौसम साल के उन कुछ महीनों में आता है जब आसमान से बूंदों की बारिश होती है और धरती पर हरियाली का विस्तार होता है। यह केवल एक मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि मानव जीवन और पर्यावरण के लिए…

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  • बनारस में साहित्यिक महोत्सव :  “काशी की क़लम” और “बरगद के साये में” पुस्तक का भव्य लोकार्पण
    साहित्यिक गतिविधि

    बनारस में साहित्यिक महोत्सव : “काशी की क़लम” और “बरगद के साये में” पुस्तक का भव्य लोकार्पण

    ByAdmin July 2, 2024July 3, 2024

    बनारस में एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें गिरीश पांडेय बनारसी जी के ग़ज़ल संग्रह ” बरगद के साये में “ और जय प्रकाश मिश्र धानापुरी जी की पुस्तक “काशी की क़लम” का लोकार्पण किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में साहित्य और कविता प्रेमियों का जमावड़ा लगा, जहां सभी ने दोनों लेखकों की साहित्यिक…

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  • हरियाली तुम आने दो
    कविताएँ

    हरियाली तुम आने दो | Kavita Hariyali Tum Aane Do

    ByAdmin July 2, 2024

    हरियाली तुम आने दो ( Hariyali Tum Aane Do ) बारिश को अब आने दो। तपती गर्मी जाने दो।। ये बादल भी कुछ कह रहे। इनको मन की गाने दो।। कटते हुए पेड़ बचाओ। शुद्ध हवा कुछ आने दो।। पंछी क्या कहते है सुन लो। उनको पंख फैलाने दो।। फोटो में ही लगते पौधे। सच…

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  • कौन किसका
    कविताएँ

    कौन किसका | Kavita Kon Kiska

    ByAdmin July 2, 2024

    कौन किसका ( Kon Kiska ) रिश्तों का अर्थ देखो कैसे लोग भूल गये है। होते क्या थे रिश्तें क्या समझाए अब उनको। कितनी आत्मीयता होती थी सभी के दिलों में। मिलने जुलने की तो छोड़ों आँखें मिलाने से डरते है।। कौन किस का क्या है किसको सोचने का वक्त है। मैं बीबी बच्चें बस…

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  • मेरी यह कहानी है जरा हट के, नाम रखे हैं बड़े सोच समझ के
    कहानियां

    मेरी यह कहानी है जरा हट के, नाम रखे हैं बड़े सोच समझ के

    ByAdmin July 2, 2024July 9, 2024

    प्रस्तुत कहानी पूर्ण रूप से काल्पनिक है। इसका किसी भी तरह का किसी से कोई भी संबंध नहीं है। विद्युत उपकरण कंपनी के नाम का इस्तेमाल करके लेखक ने यह कहानी लिखी है। यदि कोई नाम या घटना किसी से मिलती है तो इसे मात्र संयोग समझा जाए। “मेरी यह कहानी है जरा हट के,…

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  • मन के भाव
    कविताएँ

    मन के भाव | Kavita Man ke Bhav

    ByAdmin July 2, 2024

    मन के भाव ( Man ke Bhav ) करूँ मैं कैसे व्यक्त भाव मन के ठहरते नहीं जब भाव मन के भावों ने ही तोड़ दिया रिश्ते सारे बिखर गए भाव के मनके मनके मर सी गई हैं भावनाएं मन की सूख सी गई हैं शाखे जीवन की अपनापन तो कहीं दिखता नहीं दिल से…

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  • बहुत खूबसूरत हैं ये यादें
    कविताएँ

    बहुत खूबसूरत हैं ये यादें

    ByAdmin July 1, 2024July 1, 2024

    बहुत खूबसूरत हैं ये यादें इंतजार उनका करने की कुछ ऐसी आदत पड़ी है। जानते हैं कि नहीं आएंगे वो, फिर भी द्वार पर नज़र गड़ी है। रह रह कर राह तकते हैं, आए नहीं वो यादों से निकलकर। लग रहा है थक गई है घड़ी भी चल‌ चलकर। उम्र गुजर गई पर खुद को…

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  • ये बहके बहके से कदम
    कविताएँ

    ये बहके बहके से कदम | Kavita ye Behke Behke se Kadam

    ByAdmin July 1, 2024July 1, 2024

    ये बहके बहके से कदम ये बहके बहके से कदम थाम लो तुम जरा। लड़खड़ा ना जाए कहीं संभलना तुम जरा। चकाचौध की दुनिया चमक दमक लुभाती। भटक ना जाए तरुणाई चिंता यही सताती। मधुर मधुर रसधारो में छल छद्मों का डेरा है। डगर डगर पे चालाकियां अंधकार घनेरा है। झूठा आकर्षण झूठे वादे केवल…

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  • मूल पंजाबी कविता: रणधीर | अनुवादक: डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक
    कविताएँ

    मूल पंजाबी कविता: रणधीर | अनुवादक: डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक

    ByAdmin July 1, 2024October 21, 2024

    भारतीय साहित्य अकादमी, (पंजाबी काव्य) 2023 का युवा कवि पुरस्कार विजेता रणधीर की चर्चित काव्य पुस्तक “ख़त जो लिखने से रह गए” में से चुनिन्दा कविताओं का अनुवाद करते हुए प्रसन्नचित हूँ। उनकी यथार्थ से जुड़ी हुई कविताएँ पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करने में समर्थ हैं। समाज की कुरीतियों के सामने नये प्रश्न चिन्ह…

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