• बरखा बहार आई | Kavita Barkha Bahar Aayi

    बरखा बहार आई ( Barkha Bahar Aayi ) 1. बरखा बहार आई,मौसम मे खुशबू छाई | मिट्टी की खुशबू सोंधी,पैरों के साथ आई | बारिस मे अमृत बरसा,चौतरफा हरियाली छाई | बारिस की बूँन्दे जैसे,कलियों-पत्तों मे मोती आईं | 2.बादल मे इन्द्र-धनुष,रंगों की टोली लेकर | आई है बरखा रानी,चिडियों की बोली लेकर | कोयल…

  • दुआ रही सबकी | Kavita Doa Rahi Sabki

    दुआ रही सबकी ये दुआ रही हम सबकी, हो जाए सारी जहां आपकी। यह खुशी का दिन सदा, आते रहे आपके जीवन में रोजाना। बनिए खिलकर सुगन्धित फूल। हो रोशनमय आपसे ,आपका कुल। जन्म का सद्फल है आपको पाना। माया के तम में ना हो कभी डगमगाना। नित गुणगान हो आपके व्यक्तित्व की। ये दुआ…

  • रिश्तों की डोर | Kavita Rishton ki Dor

    रिश्तों की डोर ( Rishton ki Dor ) घरौंदे टूटकर फिर बनते हैं बदलते हैं महल खंडहर और खंडहर महल में सतत चलती ही रहती है यह प्रक्रिया हार के बाद कभी जीत न मिली हो ऐसा नहीं होता किसी के साथ कोशिश तो करिये और एक बार शायद सफलता इसी मे हो होती नहीं…

  • समस्या और जीवन | Kavita Samasya aur Jeevan

    समस्या और जीवन समस्या और जीवन दोनों रहते हैं संग-संग l दोनों की महिमा का भारी विचित्र प्रसंग l घुल-मिल ऐसे रहते पति-पत्नी जैसे संग l टांगें पकड़ खींचें कोई निकले न आगे l गाजे-बाजे-गाजे साथ-साथ इक दूजे की बारात l कोई किसी से जीत न पाया l नूरा कुश्ती का आज तक अंत न…

  • रिमझिम-रिमझिम बारिश आई

    रिमझिम-रिमझिम बारिश आई   रिमझिम-रिमझिम बारिश आई। गर्मी सारी दूर भगाई।। बारिश ले कर आये बादल। भीग गया धरती का आँचल।। चली हवाएं करती सन-सन। झूम उठे हैं सबके तन-मन।। बादल प्यारे गीत सुनाते। बच्चे मिलकर धूम मचाते।। जीव जन्तु और खेत हर्षाए। पंछियों ने पँख फैलाए।। बनते घर में मीठे पूड़े। चाय के संग…

  • टीम इंडिया को जीत की बधाई

    टीम इंडिया को जीत की बधाई ख़्वाब जिसे सभी ने आँखों में सजाया। टीम इंडिया ने सपना सच कर दिखाया। T20 वर्ल्ड कप चैंपियन खिताब जीतकर, भारत ने विश्व में जीत का परचम लहराया। नहीं है भारतीय किसी भी क्षेत्र में अब पीछे, एक बार फिर इन्होंने साबित कर दिखाया। सभी खिलाड़ियों की काबिलियत देख…

  • स्त्री मन सदा कुंवारा

    स्त्री मन सदा कुंवारा कोमल निर्मल सरस भाव, अंतर अनंत मंगल धार । त्याग समर्पण प्रतिमूर्ति, धैर्य संघर्ष जीवन सार । सृजन अठखेलियों संग, अनामिक अविरल धारा । स्त्री मन सदा कुंवारा ।। अप्रतिम श्रृंगार सृष्टि पटल, स्नेहगार दया उद्गम स्थल । पूजनीय कमनीय शील युत, नैतिक अवलंब दृष्टि सजल । आत्मसात नित्य यथार्थ बिंदु,…

  • दिल लगा मत दिल्लगी में

    दिल लगा मत दिल्लगी में है सुकूँ बस दोस्ती में ! चैन उजड़े दुश्मनी में ए ख़ुदा पैसे मुझे दे जी रहा हूँ मुफ़लिसी में कौन मिलता प्यार से है अब नहीं उल्फ़त किसी में दे ख़ुशी अब तो खुदाया ग़म भरे है जिंदगी में हिज्र बस आज़म मिलेगा दिल लगा मत दिल्लगी में शायर: आज़म…

  • जरूरत क्या है | Ghazal Zaroorat kya Hai

    जरूरत क्या है ( Zaroorat kya Hai ) बेसबब बात बढ़ाने की ज़रूरत क्या है सर पे तूफ़ान उठाने की ज़रूरत क्या है। बात होती हो अगर हल जो मुहब्बत से तो तोप तलवार चलाने की ज़रूरत क्या है। जो हैं मशहूर बहुत खुद पे तक़ब्बुर जिनको उनसे उम्मीद लगाने की ज़रूरत क्या है। भूल…

  • जब छाई काली घटा

    जब छाई काली घटा जब छाई काली घटा, उमड़ घुमड़ मेंघा आए। रिमझिम बदरिया बरसे, उपवन सारे हरसाए। जब छाई काली घटा घन गाए बिजली चमके, नेह बरसे हृदय अपार। मूसलाधार बूंदे पड़ रही, सावन की मधुर फुहार। ठंडी ठंडी मस्त बहारें, भावन अंबर में छाई घटा। दमक रही दामिनी गड़ गड़, व्योम में बादल…