• सताता है बहुत | Ghazal Satata hai Bahot

    सताता है बहुत ( Satata hai Bahot ) है तबीयत में बला की ज़िद सताता है बहुत फिर भी जाने क्यों मुझे वो शख़्स भाता है बहुत। अब तवक्को ही नहीं उससे किया करती कोई कर के कुछ एहसान वो मुझपे जताता है बहुत। बेवफ़ाई से रुलाना शग़्ल है उसका मगर महफ़िलों में वो वफ़ा…

  • बोलचाल भी बंद | Kavita Bolachaal hi Band

    बोलचाल भी बंद ( Bolachaal hi Band ) करें मरम्मत कब तलक, आखिर यूं हर बार। निकल रही है रोज ही, घर में नई दरार।। आई कहां से सोचिए, ये उल्टी तहजीब। भाई से भाई भिड़े, जो थे कभी करीब।। रिश्ते सारे मर गए, जिंदा हैं बस लोग। फैला हर परिवार में, सौरभ कैसा रोग।।…

  • घुमड़ घुमड़ घन अंगना आए

    घुमड़ घुमड़ घन अंगना आए घुमड़ घुमड़ घन अंगना आए। रिमझिम रिमझिम बुंदे लाए। ताल तलैया सब भर गए सारे। कारे बदरा घने गगन में छाए। धरा हर्षित हो झूमी भारी। धानी चुनरिया ओढ़े सारी। वृक्ष लताएं पुष्प सब महके। बारिश में भीग रहे नर नारी। कड़ कड़ दमक उठी दामिनी। मस्त बहारें हुई पुरवाई…

  • बादल प्यारे | Kavita Badal Pyare

    बादल प्यारे ( Badal Pyare )   जल मग्न होती यह धरती घिर आए जब जून में बादल काले काले बदरा प्यारे प्यारे उमड़ घुमड़ जब छाए बादल।। अंबर से जब बरसे मेघ अमृत खुशहाली छाए झूम के आए बरखा की बहार संग ये सावन पुकारे धरती तुमको प्रिय बादल।। त्राहि त्राहि जब होता जग…

  • बरसो बादल | Kavita Barso Badal

    बरसो बादल ( Barso Badal )   प्रतीक्षा पल पल करती अंखियां अब तो सुन लो मानसून बात हमारी, इंतजार कर अब ये नयन थक गए कब बरसोगे रे बादल तुम प्यारे।। इस धरती के तुम बिन मेघा प्यारी सारे पौधे,वन उपवन गए मुरझाये, तुम बिन नही कोयल कूके अब लता पताका पुष्प गए कुम्हलाये।।…

  • मैं स्वाभिमान हूं | Kavita Main Swabhimaan Hoon

    मैं स्वाभिमान हूं ( Main Swabhimaan Hoon ) मैं हर जगह दिखता नहीं हूं क्योंकि मैं बाजारों में बिकता नहीं हूं मैं कभी अभिमानी के साथ में टिकता नहीं हूं मैं स्वाभिमान हूं मैं हर व्यक्ति में होता नहीं हूं मुझे ढूंढना इतना आसान नहीं है, क्योंकि मैं इतनी आसानी से मिलता नहीं हूं मैं…

  • ख़्याल | Kavita Khayal

    ख़्याल ( Khayal ) ढली है शाम ही अभी , रात अभी बाकी है हुयी है मुलाकात ही, बात अभी बाकी है शजर के कोटरों से, झांक रहे हैं चूजे पंख ही उगे हैं अभी, उड़ान अभी बाकी है अभी ही तो, उभरी है मुस्कान अधरों पर मिली हैं आँखें ही अभी, दिल अभी बाकी…

  • शत: शत: प्रणाम | Geet Shat Shat Pranam

    शत: शत: प्रणाम ( Shat Shat Pranam ) हिमालय की शान को, माँ, गंगा की आन को, सागर के सम्मान को, झरनों की मधुर तान को इंद्रधनुषी आसमान को, मेरे वतन की शान को शत: शत: प्रणाम है, मेरा शत: शत: प्रणाम है !! १ !! गीता और कुरआन को वेदो को और पुराण को,…

  • Hindi Poetry of Gurudeen Verma | गुरुदीन वर्मा की कविताएं

    मेघों की तुम मेघा रानी शेर)- जैसे जल को तरसे मछली, वैसे मेघ को तरसे धरती। मेघ बिना नहीं मिलता पानी, मेघ बिना यह बंजर धरती।। ——————————————————- मेघों की तुम मेघा रानी, मेघ तुम बरसाओ। करके वर्षा मेघों की, धरती की प्यास मिटाओ।। मेघों की तुम मेघा रानी———————–।। किसको जरूरत नहीं जल की, यह जल…

  • अनपढ़ प्रेम | Kavita Anpadh Prem

    अनपढ़ प्रेम ( Anpadh Prem )   प्रेम अनपढ़ होता है, न सुकुन से रहता न रहने देता है। रहता हमेशा मन के विपरीत, सिखाता तरीका प्रीति की रीत। विरोधाभास में जीवन व्यतीत होता, न हस्ताक्षर करता न सुलह ही कराता । धधकती चिंगारी जिसका नाम दिल, धड़कन की तेज रफ्तार करता उद्विग्न । चन्दन…