बोलचाल भी बंद | Kavita Bolachaal hi Band

बोलचाल भी बंद

( Bolachaal hi Band )

करें मरम्मत कब तलक, आखिर यूं हर बार।
निकल रही है रोज ही, घर में नई दरार।।

आई कहां से सोचिए, ये उल्टी तहजीब।
भाई से भाई भिड़े, जो थे कभी करीब।।

रिश्ते सारे मर गए, जिंदा हैं बस लोग।
फैला हर परिवार में, सौरभ कैसा रोग।।

फर्जी रिश्तों ने रचे, जब भी फर्जी छंद।
सगे बंधु से हो गई, बोलचाल भी बंद।।

सब्र रखा, रखता सब्र, सब्र रखूं हर बार।
लेकिन उनका हो गया, जगजाहिर व्यवहार।।

कर्जा लेकर घी पिए, सौरभ वह हर बार।
जिसकी नीयत हो डिगी, होता नहीं सुधार।।

घर में ही दुश्मन मिले, खुल जाए सब पोल।
अपने हिस्से का जरा, सौरभ सच तू बोल।।

सौरभ रिश्तों का सही, अंत यही उपचार।
हटे अगर वो दो कदम, तुम हट लो फिर चार।।

Dr. Satywan  Saurabh

डॉo सत्यवान सौरभ

कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी,
हरियाणा

यह भी पढ़ें :-

सबल- स्वस्थ हो देश

Similar Posts

  • मां पर कविता | Hindi me Maa par Kavita

      मां पर कविता ( Maa par kavita )    माता  सबकी जान है आन  बान  सम्मान है ईश्वर  सी   वरदान  है सारे गुण  की खान है और  कौन मां से बढ़कर है, जिसका हममें प्राण है। सबका पालनहार  है जीवन  तारणहार  है रग -रग की संचार है वर्षा  धूप   बयार  है झर झर झरते…

  • वसंत ऋतु पर कविता | Hindi Poem Basant

    वसंत ऋतु पर कविता उड़ा जाये पीत पात पछुआ पवन में। आग लगी हुई है पलाश वन में। सेमल की डाली से बोल रहा मोर। पाकर के कोटर से झांके कठफोर। जाने क्या सोच रही गिलहरिया मन में। आग लगी हुई है पलाश वन में। कोयलिया देख गई आज भिनसारे, डालों में टांग दिये किसने…

  • माना कि तुम | Love kavita

      माना कि तुम ( Mana ki tum )     माना कि इन हाथों की लकीरों में तुम नहीं….…….. फिर भी मुझमें तुम शामिल हो, लकीरें तो उनके हाथ में भी नहीं होती जिनके हाथ नहीं होते। तुम मुझे हासिल नहीं फिर भी मुझसे तुम दूर तो नहीं हो। इन हाथों की लकीरों में…

  • मेरे दिल की बस्ती

    मेरे दिल की बस्ती मेरे दिल की बस्ती क्यों इतनी है सस्तीन कोई हलचल न कोई मस्तीलोग आकर चले जाते हैंनहीं रुकती कोई हस्ती।। मैं भी सोचता हूं कोई आकर गुलज़ार करेंथोड़ा रुक कर यहां इंतजार करेंकुछ बहार लाए जिन्दगी मेंहमसे भी कोई प्यार करें।। जिंदगी का मेरे कोई थोड़ा किनारा बनेसाथ साथ चलने का…

  • नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) पंचम दिवस

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) पंचम दिवस भुवाल माता के गीत सब गाओनवरात्रि पर्व आया है – 2भुवाल माता का सब ध्यान लगाओनवरात्रि पर्व आया है – 2भुवाल माता का स्मरण हमे पावन बना देगी ।कर्म का मैल भव भव का , हमारे मिटा देगी ।ज्ञान गंगा से सब नहाओनवरात्रि पर्व आया है – 2आत्मा…

  • मां का आंचल | Maa ka Aanchal

    मां का आंचल  ( Maa ka aanchal )  ( 2 ) मां का आंचल हर पल याद आता मां का आंचल पल पल याद आता आंचल की ओट में छिपा लेती मां बचा लेती बुरी नज़र से याद आता चेहरे के दाग़ नाक स़ाफ़ कर देती पूंछ लेती आंखों के आंसू याद आता जब रोता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *