शत: शत: प्रणाम

शत: शत: प्रणाम | Geet Shat Shat Pranam

शत: शत: प्रणाम

( Shat Shat Pranam )

हिमालय की शान को,
माँ, गंगा की आन को,
सागर के सम्मान को,
झरनों की मधुर तान को
इंद्रधनुषी आसमान को,
मेरे वतन की शान को
शत: शत: प्रणाम है, मेरा शत: शत: प्रणाम है !! १ !!

गीता और कुरआन को
वेदो को और पुराण को,
महात्माओं के ज्ञान को,
ग्रंथो के श्लोक गान को,
सर्वधर्म के अभिमान को,
योद्धाओं के प्राणदान को
शत: शत: प्रणाम है, मेरा शत: शत: प्रणाम है !! २ !!

खेतों को, खलिहान को,
गुलिस्ताँ, बागवान को,
दरख्तों के अभिमान को
कोयल के मधुर गान को
तितली भँवरे गुंजान को,
शत: शत: प्रणाम है, मेरा शत: शत: प्रणाम है !! ३ !!

मजदूर और किसान को
सीमा पे तैनात जवान को
शिक्षा संस्कृति विज्ञान को
हिंदी भाषा के अभिमान को
शिक्षक यांत्रिक कुशलवान को
भरता माता के अभिमान को
शत: शत: प्रणाम है, मेरा शत: शत: प्रणाम है !! ४ !!

तिरंगे के सम्मान को,
देशभक्ति के गान को,
शहीदों के बलिदान को,
वीर हुए जो कुर्बान को,
गाँधी सुभाष महान को,
भगत सिंह नौजवान को,
शत: शत: प्रणाम है, मेरा शत: शत: प्रणाम है !! ५ !!

निज गौरव अभिमान को,
नर नारी सम सम्मान को
माँ बेटी बहनों के मान को
मात पिता गुरु पहचान को
नवग्रह के सृष्टि यान को,
अदृशय नश्वर भगवान् को,
शत: शत: प्रणाम है, मेरा शत: शत: प्रणाम है !! ६ !!

डी के निवातिया

डी के निवातिया

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