• माँ: त्याग की मूर्ति या शोषण की शिकार?

    हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट देखी, जिसमें लिखा था — “अगर घर में चार रोटियाँ हों और खाने वाले पाँच, तो एक ही शख्स होगा जो कह देगा कि मुझे भूख नहीं है — और वो है माँ।” यह वाक्य दिल को छू गया, लेकिन इसके साथ एक गहरा सवाल भी मन…

  • माँ से बढ़कर कुछ नही

    साथियो मुझे बहुत ही गहरा एहसास हुआ एक इंसान की मातृ भक्ति को देखकर की कैसे वो अपनी बूढ़ी माँ की सेवा करता है। दोस्तों कुछ करो कितने भी दयालू बनो , दान धर्म करो , परन्तु यदि वो इंसान अपने माता पिता की सेवा या उनका आदर नहीं करता तो वो कभी भी सुखी…

  • मदर्स डे | Mother’s day

    जब ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई, तो सृजनकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि को संवारने के लिए अनेक रूप रचे। देव, असुर, गंधर्व, यक्ष, किन्नर, मानव — सब अस्तित्व में आए। परंतु जब उसने देखा कि हर जीव अपनी सुरक्षा, पोषण और संवेदना के लिए किसी शक्ति की तलाश में है, तो ब्रह्मा ने अपनी करुणा से एक…

  • भक्त हूँ मैं देख ऐसा देश का

    भक्त हूँ मैं देख ऐसा देश का साथ दूंगा मैं हर लम्हा देश का !भक्त हूँ मैं देख ऐसा देश का ख़ून से सींचा वतन हर सैनिक नेहै बना तिरंगा चेहरा देश का छोड़ कर मां बाप सब भाई बहनहाँ निभाता सैनिक वादा देश का लहराना तिरंगा अदू की छाती परगा रहा है दिल ये…

  • स्त्री ही स्त्री की दुश्मन: क्यों?

    आज जब हर ओर स्त्री सशक्तिकरण की बात हो रही है, तो यह प्रश्न और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या स्त्री को सशक्त बनने के लिए केवल पुरुषों से लड़ना पड़ता है? क्या उसके संघर्ष का केन्द्र पुरुष ही है? यदि हम गहराई से सोचें, तो पाएँगे कि स्त्री के मार्ग की सबसे…

  • मेरी डायरी से

    मनुष्य जब जीवन के उत्तरार्ध में होता है तो जिंदगी के अनुभवों को किसी  सुपात्र व्यक्ति को सौंपना चाहता है। सोचता है जिंदगी में जो कुछ हम नहीं रह कर सके उसे आने वाली पीढ़ियों को सौंप दूं । जिससे ज्ञान की धारा सतत बहती रहे । जितने भी बड़े बुढो से मिलता हूं एक…

  • मुझ से खफा खफा ये सुंदरियाँ : भाग.. 1

    अचानक मेरे फोन पर कुछ तस्वीरे, कुछ फिल्मे आयी तो मैं चौक पड़ा.. कोई नया नम्बर था.. अपरिचित.. किसी खूबसूरत महिला की तस्वीरे थी.. अलग अलग परिधान में वह बहुत ही सुंदर और लुभावनी लग रही थी.. मैने याददाश्त पर जोर लगाया मगर कुछ याद नही बन पड़ा कि वो कौंन है.. यक़ीनन वह मेरे…

  • न्याय की पुकार

    न्याय की पुकार उपेक्षित को आज तक न्याय नहीं मिला,अपेक्षित को आज तक न्याय नहीं मिला। सालों से होते ज़ुल्मो सितम ग़रीबों से,ग़रीब को आज तक न्याय नहीं मिला। सुनते नहीं पुकार कानों में ठोंसा कपास,शोषित को आज तक न्याय नहीं मिला। बहिन बेटियों से होते बलात्कार सरे आम,अछूत को आज तक न्याय नहीं मिला।…

  • ख़बर रखता है

    ख़बर रखता है ज़ख़्म देकर भी वो पल-पल की ख़बर रखता हैनब्ज़ कब बन्द हो इस पर भी नज़र रखता है उसकी उल्फ़त पे यक़ीं कैसे भला मैं कर लूँहैसियत पर जो मेरी आँख ज़बर रखता है जाने कितने ही किराये के मकानों में रहेअपना घर ही मेरा ख़ुश जान जिगर रखता है जब अचानक…

  • उद्धव की वापसी

    आधुनिक समय में चेतना की पुकार भारतीय चिंतन परंपरा में पुराणों को केवल मिथक मानना एक भूल होगी। वे प्रतीक हैं—समय, चेतना, संस्कृति और आत्मा के गहरे संवाद के। ऐसे ही एक संवाद का वाहक है ‘उद्धव प्रसंग’—जहाँ ज्ञान, प्रेम के सम्मुख सिर झुकाता है।यह प्रसंग केवल द्वापर युग की कथा नहीं, आज के युग…