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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • स्वस्थ जीवन
    आलेख

    स्वस्थ जीवन

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    यह बात तो साधारण सी है पर स्वस्थ जीवन के लिए अपरिहार्य भी है। हम अपने जीवन में चाहते हैं कि अगर अच्छे काम करें वह अपने कुल का नाम करें आदि – आदि तो सर्वप्रथम अपनी आदतों पर सही से ध्यान दें। यह आदतें ही तो हमारे जीवन की दशा और दिशा सही से…

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  • हरियाणवी को भाषा का दर्जा दिलाने के लिए अलख जगा रहे हैं , साहित्यकार डॉ.चंद्रदत्त शर्मा
    आलेख

    हरियाणवी को भाषा का दर्जा दिलाने के लिए अलख जगा रहे हैं , साहित्यकार डॉ.चंद्रदत्त शर्मा

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    हर किसी को अपनी मातृभाषा या बोली प्यारी होती है। बच्चा अपना पहला शब्द अपनी मां बोली में ही बोलता है। यही कारण है कि आदमी कहीं भी जाए वह अपनी बोली को नहीं भूलता। हरियाणवी तो ऐसी बोली है कि फिल्म से लेकर विदेश तक धूम मचाए हुए है। उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह…

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  • एक पत्र आप सभी के नाम
    आलेख

    एक पत्र आप सभी के नाम

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    आज एक ऐसे विषय पर आप सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ और एक मंच पर आमंत्रित कर रहा हूँ जो की हर समाज और जाति धर्म के लोगों के साथ हो रहा है। आधुनिकता के इस युग में वैसे तो पैसे की कोई भी कीमत नही है और न ही संस्कारों की, कीमत…

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  • भारत रत्न भीमराव अंबेडकर
    आलेख

    भारत, अंबेडकर और वर्तमान भारत

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

            डॉ. भीमराव अंबेडकर भारत के इतिहास में एक ऐसे महानायक हैं जिन्होंने न केवल समाज में व्याप्त भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाई, बल्कि भारत को एक मजबूत और समतावादी संविधान भी प्रदान किया। उनका जीवन संघर्ष, ज्ञान और साहस की मिसाल है। उन्होंने अपने विचारों, कार्यों और क़ानूनों के माध्यम से एक ऐसे भारत…

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  • ‘संवेदनाओं के साक्ष्य’ काव्य संग्रह की समीक्षा
    पुस्तक समीक्षा

    ‘संवेदनाओं के साक्ष्य’ काव्य संग्रह की समीक्षा

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    जीवन के विभिन्न पहलुओं और सामाजिक रिश्तों के दायरों में बंधी कवयित्री कल्पना भार्गव ‘देशना’ की काव्य कृति ‘संवेदनाओं के साक्ष्य’ मन के आंतरिक भावों में समाहित कृति है। उनकी प्रत्येक रचना की पंक्तियों में सामाजिक चेतना, देश के प्रति प्रेम, समर्पण एवं अध्यात्म, भारतीय संस्कृति से जुड़े तीज-त्यौहारों के दर्शन स्पष्ट दिखलाई देते है।…

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  • राजस्थानी साहित्य के द्रौणाचार्य जनकवि बजरंग लाल पारीक ‘लाल’ की 39वीं पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी आयोजित
    साहित्यिक गतिविधि

    राजस्थानी साहित्य के द्रौणाचार्य जनकवि बजरंग लाल पारीक ‘लाल’ की 39वीं पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी आयोजित

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    नवलगढ़। राजस्थानी साहित्य के द्रोणाचार्य एवं सुप्रसिद्ध काव्य रचना “चांद चढ़्यो गिगनार” के रचयिता जनकवि बजरंग लाल पारीक ‘लाल’ की 39वीं पुण्यतिथि के अवसर पर एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत जनकवि ‘लाल’ के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। मुख्य अतिथि के रूप में ठाकुर आनंद सिंह शेखावत…

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  • dr.bhimrao ambedkar
    आलेख

    बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर:-व्यक्तित्व एंव कृतित्व

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    अगाध ज्ञान के भंडार, घोर अध्यवसायी, अद्भुत प्रतिभा, सराहनीय निष्ठा और न्यायशीलता तथा स्पष्टवादिता के धनी डॉ.भीमराव अंबेडकर जी का जन्म 14, अप्रैल,1891ई. को इंदौर के पास महू छावनी में हुआ था।जन्म के समय उनका नाम भीम सकपाल था।डॉ.अंबेडकर साहब का जन्म महाराष्ट्र की सब से अछूत समझी जाने वाली महार जाति में हुआ था।,बाबा…

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  • संविधान निर्माता नमन वंदन हे राष्ट्र रतन भारत पंचशील सिद्धांत अपनाया बौद्ध धर्म में हुये रत समानता भाईचारा मानवतावाद के पथ प्रदर्शक
    आलेख

    “डॉ. भीमराव अंबेडकर: समता, न्याय और मानव गरिमा के पुरोधा”

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    14 अप्रैल को सम्पूर्ण भारतवर्ष में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। यह दिवस न केवल एक महापुरुष के जन्म की स्मृति है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समता और मानव गरिमा की स्थापना के संकल्प का प्रतीक भी है। डॉ. अंबेडकर का जन्म 1891 में एक निर्धन और…

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  • Dr. Bhimrao Ambedkar par Kavita
    आलेख

    दलितों के भगवान थे: डॉ भीमराव अम्बेडकर

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    आधुनिक समय में जहां लोग कुत्ते का जूठा पानी तो पी सकते थे लेकिन एक मनुष्य के छूने से लोगों का धर्म भ्रष्ट हो जाता था। उन्हें गांव से दूर जंगलों बस्तियों में रहने को मजबूर होना पड़ता था। उनकी जिंदगी जानवरों से भी बदतर थी। ऐसी परिस्थिति में एक ऐसे दिव्य महामानव का जन्म…

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  • राष्ट्र निर्माता एवं दलितों के मशीहा डॉ भीमराव अंबेडकर
    आलेख

    भीमराव अंबेडकर और आज: विचारों का आईना या प्रतीकों का प्रदर्शन?

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारत को एक समतामूलक, न्यायप्रिय और जातिविहीन समाज का सपना दिखाया था। उन्होंने संविधान बनाया, शिक्षा और सामाजिक न्याय को हथियार बनाया, और जाति व्यवस्था का खुला विरोध किया। आज उनका नाम हर मंच पर लिया जाता है, लेकिन उनके विचारों को गंभीरता से अपनाया नहीं जाता। आरक्षण को राजनीतिक हथियार…

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