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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
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    गीत

    श्रमिक दिवस गीत

    ByAdmin May 1, 2025May 1, 2025

    श्रमिक दिवस गीत तुम वर्तमान के पृष्ठों पर ,पढ़ लो जीवन का समाचार ।क्या पता कौन से द्वारे से ,आ जाये घर में अंधकार।। आशा की किरणें लौट गयीं ,बैठी हैं रूठी इच्छायेंप्रात: से आकर पसर गईं ,आँगन में कितनी संध्यायेंइन हानि लाभ की ऋतुओं में, तुम रहो सदा ही होशियार ।।तुम वर्तमान—– चल पड़ो…

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  • Hindi Kavita Majdoor
    आलेख

    मजदूर दिवस : श्रम, संघर्ष और सामाजिक न्याय का उत्सव

    ByAdmin May 1, 2025May 1, 2025

    मजदूर दिवस, जिसे अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस या मई दिवस के रूप में भी जाना जाता है, प्रतिवर्ष 1 मई को दुनिया भर में मनाया जाता है। यह दिन न केवल श्रमिकों और मजदूर वर्ग के लोगों के सम्मान और उनके अधिकारों के समर्थन में समर्पित है, बल्कि उन अनगिनत संघर्षों और बलिदानों का भी स्मरण…

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  • सच बोलने की सजा
    आलेख

    सच बोलने की सजा

    ByAdmin May 1, 2025May 1, 2025

    तो संतश्री कुछ नाखुश से थे.. शायद कुछ खफा खफा से भी.. दूध के लिए पशुओ पर होने वाले अत्यचार को ले कर मुझे उन से कुछ मार्गदर्शन लेना था.. हिंसा अहिंसा को ले कर कुछ धार्मिक चर्चाएं करनी थी.. कुछ शास्त्रों के संदर्भ होने थे जो कि मानव की अनजाने में होने वाली अनैतिकता…

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  • Bhagwan Parshuram
    छंद

    भगवान जय श्री परशुराम जी

    ByAdmin April 29, 2025April 29, 2025

    भगवान जय श्री परशुराम जी ( छंद-मनहरण घनाक्षरी ) जमदग्नि रेणु सूत ,अति बलशाली पूत,छठे अवतार विष्णु ,राम  कहलाए है! अक्षय तृतीया आई,अटल मुहुर्त लाई,रामभद्र जन्मोत्सव ,जगत मनाए है। राम  बसे श्वास श्वास, करने अधर्मी नाश,हाथ में सदैव अस्त्र,परशु उठाए है । शिव धनु तोड़े राम , हर्ष हुआ चारों धाम,विलोकित राम-राम ,दोनों मुस्कुराए है। डॉ कामिनी व्यास…

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  • हिंदी शिक्षण की चुनौतियाँ एवं राम कथा
    आलेख

    हिंदी शिक्षण की चुनौतियाँ एवं राम कथा

    ByAdmin April 29, 2025April 29, 2025

    भाषा क्या है? भाषा का मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। भाषा के विकास ने ही मनुष्य को अन्य जीव-जंतुओं पर वरीयता पाने में मदद की है। भाषा ज्ञान का भंडार है। ‘भाषा’ शब्द संस्कृत की भाष् धातु से निष्पन्न हुआ है, जिसका कोशीय अर्थ है ‘कहना’ या ‘प्रकट करना’। भाषा को मनुष्य के…

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  • Bacchon ke Results
    व्यंग्य

    खूब हुई नंबरों की बरसात

    ByAdmin April 28, 2025April 28, 2025

    इस बार खूब हुई नंबरों की बरसात। बरसात ऐसी हुई कि सैकड़ो वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया। जिनको बुद्धू समझा जाता था वह भी सीना तान टापरो की लिस्ट में शामिल हो गया है। उसे खुद भी विश्वास नहीं हो रहा है कि ऐसा अचम्भा कैसे हो गया? उसके मां-बाप भी भूल कर कुप्पा हो…

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  • सिंधु नदी जल और सियासत
    आलेख

    सिंधु नदी जल और सियासत

    ByAdmin April 28, 2025April 28, 2025

    सिंधु नदी भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके तहत भारत ने तीन पूर्वी नदियों — रावी, व्यास और सतलज — का अधिकतर जल उपयोग करने का अधिकार प्राप्त किया, जबकि तीन पश्चिमी नदियों — सिंधु, झेलम…

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  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल
    आलेख

    आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी आलोचना के शिल्पकार और विचारक

    ByAdmin April 24, 2025April 24, 2025

    अनुसंधानकर्ता नाम: अमरेश सिंह भदौरियापद: हिंदी प्रवक्तासंस्थान: त्रिवेणी काशी इंटर कॉलेज, बिहार, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)शोध-वर्ष: 2025 शोध-पत्र हिंदी साहित्य का आलोचना-परिदृश्य यदि आज एक सुसंस्कृत, तर्कसंगत और ऐतिहासिक चेतना से समृद्ध अनुशासन के रूप में देखा जाता है, तो इसका श्रेय आचार्य रामचंद्र शुक्ल को जाता है। उन्होंने न केवल हिंदी आलोचना की आधारशिला रखी,…

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  • अमरेश सिंह भदौरिया की कविताएं | Amresh Singh Bhadauriya Poetry
    कविताएँ

    अमरेश सिंह भदौरिया की कविताएं | Amresh Singh Bhadauriya Poetry

    ByAdmin April 20, 2025August 31, 2025

    अमलतास चुपचाप झरता है अमलतास,जैसे पीली चूड़ियाँगिर रही हों किसी दुल्हन की कलाई से। गाँव की पगडंडी परजब धूप भी सो रही होती है,तब वहरंग भरता है उदासी में। न फूलों का शोर,न ख़ुशबू का घमंड—बस पीली परतों मेंएक ऋतु की मुस्कान ओढ़ेवह खड़ा रहता है। लड़कियाँ उसके नीचेखेल जाती हैं ब्याह-बनाव की कल्पनाएँ,बुजुर्ग उसकी…

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  • ये गूंगी शाम
    कविताएँ

    ये गूंगी शाम

    ByAdmin April 19, 2025April 19, 2025

    ये गूंगी शाम ये गुंगी शाम मेरे कानों में कुछ कहती है, तु है कहीं आसपास ये अहसास मुझे दिलाती है,बेशक तू मुझे छोड़ गया, वादा अपना तोड़ गया, किया था वादा तूने ता-उम्र साथ निभाने का, हर ग़म मेरा बांट कर मुझे खुशी के फूलों की लड़ियां दिखाने का, दे गया तू ग़म उम्र-भर…

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