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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • अक्षय तृतीया
    कविताएँ

    अक्षय तृतीया : आखा तीज

    ByAdmin May 1, 2024

    अक्षय तृतीया : आखा तीज   अक्षय तृतीया पर्व पर इस जीवन को पावन बनाये । पापों व तापों के हैं घेरे उनको ढहाते हुए चले । संसार सागर को पार कर मोक्ष की और बढ़ते चले । उमड़ती घटाएं है यहाँ कामना की , उफनती हैं नादियाँ यहाँ वासना की , हां , भूले…

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  • Baba Bhim Hamara
    विवेचना

    डॉक्टर भीमराव अंबेडकर: राष्ट्र निर्माता एवं दलितों के मशीहा

    ByAdmin May 1, 2024

    प्रस्तावना: भारतीय समाज के उत्थान और समानता के चिर स्मरणीय स्तम्भ के रूप में भीमराव अंबेडकर का नाम हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने न केवल अपने जीवन में समाज में बदलाव के सपने देखे, बल्कि उन्होंने उन्हें प्राप्त करने के लिए सख्त कठिनाइयों का सामना भी किया। भीम राव अम्बेडकर का जीवन परिचय: भीमराव अंबेडकर…

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  • तिरंगा काव्य मंच पर साहित्य उत्सव
    साहित्यिक गतिविधि

    तिरंगा काव्य मंच पर साहित्य उत्सव: कुंवर वीर सिंह और विनय सागर जायसवाल के सानिध्य में हुआ शानदार आयोजन

    ByAdmin May 1, 2024

    दिनांक 30/04/2024 को तिरंगा काव्य मंच पर 46वें कवि सम्मेलन में कोलकाता से वरिष्ठ साहित्यकार श्री कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड जी की अध्यक्षता और मुशायरे में बरेली से वरिष्ठ शायर श्री विनय सागर जायसवाल गुरु जी की सदारत में बेहद शानदार आयोजन हुआ। महावीर जयंती के उपलक्ष्य में कवि सम्मेलन में इस बार श्रीमान कुंवर…

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  • वह पानी बेचता है | Kavita Wah Pani Bechta Hai
    कविताएँ

    वह पानी बेचता है | Kavita Wah Pani Bechta Hai

    ByAdmin May 1, 2024

    वह पानी बेचता है ( Wah Pani Bechta Hai )   इस बचपन में वह बेचता है पानी ट्रेन में, बस में, धूप में, फुटपाथ पर । वह बेचता है पानी- एक रुपये के पोली बैग से लेकर पन्द्रह-बीस रुपये की बोतल में, अपनी जिंदगी के सुनहले सपने संजोए सजल आंसू वर्षाए ! ‘ जल…

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  • भाषा विभाग, पटियाला के प्रांगण में डॉ जसप्रीत कौर फ़लक के पाँचवे काव्य संग्रह”कैनवस के पास” के टाइटिल पेज का विमोचन हुआ
    साहित्यिक गतिविधि

    भाषा विभाग, पटियाला के प्रांगण में डॉ जसप्रीत कौर फ़लक के पाँचवे काव्य संग्रह”कैनवस के पास” के टाइटिल पेज का विमोचन हुआ

    ByAdmin May 1, 2024

    29 अप्रैल 2024,भाषा विभाग, पटियाला के प्रांगण में कश्मीर विश्वविद्यालय श्रीनगर एवं गिना शोध संस्थान(भिवानी) के तत्वाधान में दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न हुई। भव्य एवं सुज्जित संगोष्ठी में वरिष्ठ कवयित्री डॉ जसप्रीत कौर फ़लक के पाँचवे काव्य संग्रह ”कैनवस के पास” के आवरण पृष्ठ का विमोचन श्रीमती हरप्रीत कौर (‘भाषा विभाग निदेशक, पटियाला’) एवं…

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  • Aalekh Maharashtra Diwas
    कविताएँ

    महाराष्ट्र दिवस | Aalekh Maharashtra Diwas

    ByAdmin May 1, 2024

    कोकण, मराठवाडा, विदर्भ, खानदेश को शामिल कर २२९ तालुका वाले महाराष्ट्र राज्य की स्थापना १ मई, १९६० ई. को हुई थी, इसके पीछे की एक कहानी है। महाराष्ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पू. २३० से २२५ ई.) थे जो कि महाराष्ट्र के संस्थापक थे। अल्लाउद्दीन खिलजी से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने लंबे समय…

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  • Kavita Konark Mandir
    कविताएँ

    कोणार्क सूर्य मंदिर | Kavita Konark Mandir

    ByAdmin May 1, 2024

    कोणार्क सूर्य मंदिर ( Konark Surya Mandir )    वास्तुकला व डिजाइन का वो है ऐसा उदाहरण, समय की गति को दर्शाता सुंदर वहां पर्यावरण। काला पगोड़ा भी कहते इसे गहरे रंग के कारण, एस्ट्रोनोमी, आर्किटेक्चर का अद्भुत उदाहरण।। सूर्य देव की प्रथम किरण आती है इस मंदिर में, ७७२ वर्ष पुराना मंदिर है जो…

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  • श्रमिक दिवस समर्पित गीत
    गीत

    श्रमिक दिवस समर्पित गीत

    ByAdmin May 1, 2024May 1, 2024

    श्रमिक दिवस समर्पित गीत   तुम वर्तमान के पृष्ठों पर ,पढ़ लो जीवन का समाचार । क्या पता कौन से द्वारे से ,आ जाये घर में अंधकार।। आशा की किरणें लौट गयीं ,बैठी हैं रूठी इच्छायें प्रात: से आकर पसर गईं ,आँगन में कितनी संध्यायें इन हानि लाभ की ऋतुओं में, तुम रहो सदा ही…

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  • Kavita Pyari Paati
    कविताएँ

    प्यारी पाती | Kavita Pyari Paati

    ByAdmin May 1, 2024

    प्यारी पाती ( Pyari Paati )   मां की आस पिता का संबल बच्चों की अभिलाषा! प्यारी पाती आती जब थी पुलकित घर हो जाता!! घरनी घरमें आस लगाए रहती बैठी ऐसे ! ‘जिज्ञासु’ चकोर चांद के लिए टक टकी लगाए जैसे!! सीमापर जवान को अपनी चिंता दूर भगाती ! बीवी बच्चे मात-पिता संग सबका…

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  • Man ka Dar
    कविताएँ

    मन का डर | Man ka Dar

    ByAdmin May 1, 2024

    मन का डर ( Man ka Dar )   चलते चलते न जाने कहाँ तक आ गये हैं, कामयाबी की पहली सीढ़ी शायद पा गये हैं, कुछ पाने का जूनून आँखों में है बसा हुआ मगर पहला क़दम रखूं कैसे डर ये सता रहा, ख़ुद पर इतना यक़ीन कभी किया ही नहीं, कुछ जीत लेने…

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